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टीबी के खिलाफ लड़ाई में पहचान, उपचार और जागरूकता बढ़ाने के लिए 100-दिवसीय तपेदिक (टीबी) उन्मूलन कार्यक्रम शुरू

टीबी के खिलाफ लड़ाई में पहचान, उपचार और जागरूकता बढ़ाने के लिए 100-दिवसीय तपेदिक (टीबी) उन्मूलन कार्यक्रम शुरू

-सिविल सर्जन डॉ. जय भगवान जाटान ने मीटिंग कर दिए जरूरी दिशा-निर्देश-

पलवल-23 दिसंबर
कृष्ण कुमार छाबड़ा

एक महत्वाकांक्षी और ऐतिहासिक पहल में जिला स्वास्थ्य विभाग पलवल में टीबी के खिलाफ लड़ाई में पहचान, उपचार और जागरूकता बढ़ाने के लिए एक व्यापक 100-दिवसीय तपेदिक (टीबी) उन्मूलन कार्यक्रम शुरू किया गया है। यह कार्यक्रम सिविल सर्जन डॉ. जय भगवान जाटन की अध्यक्षता व मार्गदर्शन में शुरू किया गया।
सिविल सर्जन डॉ जाटान ने इस उपलक्ष्य में मीटिंग ली, जिसमें डिस्ट्रिक्ट टीबी ऑफिसर डॉ संजीव तंवर व अन्य टीबी स्टाफ ने भाग लिया।
100-दिवसीय कार्यक्रम की शुरुआत 7 दिसंबर से की गई व ये टीबी उन्मूलन के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए राष्ट्रीय सरकार के चल रहे प्रयासों का हिस्सा है। इसकी शुरुआत स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा द्वारा पंचकुला में की गई। यह पहल जमीनी स्तर पर टीबी देखभाल और सहायता सेवाओं को मजबूत करने के लिए स्वास्थ्य अधिकारियों, स्वास्थ्य देखभाल पेशेवरों, सामुदायिक नेताओं और विभिन्न हितधारकों को एक साथ लाती है।
100 दिवसीय टीबी कार्यक्रम हमारे जिले की तपेदिक के खिलाफ लड़ाई में एक गेम-चेंजर साबित होगा। हम प्रत्येक टीबी रोगी को पूरी तरह से ठीक होने के लिए आवश्यक देखभाल और सहायता प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. जय भगवान ने कहा, ”एक साथ मिलकर, हम जिला पलवल और हमारे देश में टीबी को खत्म करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति करेंगे।सिविल सर्जन ने बताया की इस काम के लिए हमारे जिले में 3 मोबाइल एम्बुलेंस वेन लगायी गई हैं जो अलग अलग गांव में जाकर कैम्प लगायेंगे। इस वेन में एक डॉक्टर , फार्मासिस्ट और एलटी लगाया गया है और जिस मरीज को टीबी निकलती है उसको हजार रुपए हर महीने दिए जाते हैं व जो व्यक्ति डायग्नोसिस करवाइए उसको ₹500 दिए जाएंगे।
क्षय रोग (टीबी) के बारे में:
क्षय रोग एक संक्रामक रोग है जो मुख्य रूप से फेफड़ों को प्रभावित करता है। इसका इलाज एंटीबायोटिक दवाओं के कोर्स से किया जा सकता है, लेकिन शीघ्र निदान और लगातार उपचार इस बीमारी को खत्म करने की कुंजी है। 100 दिवसीय कार्यक्रम का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि इस लड़ाई में कोई भी पीछे न छूटे।
100 दिवसीय टीबी कार्यक्रम के मुख्य उद्देश्य
प्रारंभिक जांच: संदिग्ध टीबी मामलों की पहचान करने के लिए उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में व्यापक घर-घर सर्वेक्षण और स्क्रीनिंग करें।
उपचार और देखभाल: प्रत्यक्ष अवलोकन उपचार (डॉट्स) के माध्यम से निदान किए गए टीबी रोगियों के लिए मुफ्त, समय पर और पूर्ण उपचार सुनिश्चित करें।
जागरूकता अभियान: सामुदायिक आउटरीच, मीडिया और स्कूल कार्यक्रमों के माध्यम से टीबी की रोकथाम, लक्षण और उपचार विकल्पों के बारे में जागरूकता बढ़ाना।
स्वास्थ्य प्रणालियों को मजबूत करना: एक व्यापक और सहायक देखभाल वातावरण सुनिश्चित करते हुए, टीबी रोगियों के प्रबंधन और निगरानी के लिए स्वास्थ्य सुविधाओं की क्षमता बढ़ाना।
संपर्क का पता लगाना: ऐसे व्यक्तियों की पहचान करें जो बीमारी को और अधिक फैलने से रोकने के लिए टीबी रोगियों के संपर्क में आए हों।
जनता कैसे योगदान दे सकती है: पलवल के निवासियों से इसमें शामिल होने का आग्रह किया जाता है।
-टीबी जागरूकता सत्र में भाग लेना। -अगर उनमें लगातार खांसी, वजन कम होना, रात में पसीना आना या बुखार जैसे लक्षण दिखें तो जांच कराएं।
-मित्रों और परिवार के सदस्यों को उनके टीबी उपचार को पूरा करने के लिए प्रोत्साहित करना।
बैठक में यह दिए निर्देश
100 दिवसीय टीबी कार्यक्रम के मुख्य प्रयासों को तेज करने के उद्देश्य से एक जिला स्तरीय बैठक सोमवार को मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. जय भगवान के नेतृत्व में आयोजित की गई। इसमें बताया गया कि इस वर्ष कुल 2471 टीबी के मामले सामने आए हैं, जिनमें से 145 मामले दवा प्रतिरोधी मामलों के हैं।
बैठक में सरकारी अधिकारियों, स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं, गैर-सरकारी संगठनों और सामुदायिक नेताओं सहित प्रमुख हितधारकों को एक साथ लाया गया।
इसमे उन्होंने निक्षय शिविर अभियान के बारे में विस्तार से चर्चा की और निक्षय शिविर अभियान को सफल बनाने के सभी एसएमओ, एमओ व सीएचओ को निर्देश दिए।जिस गांव में निक्षय शिविर लगाया जा रहा है वहां सभी गांव वालों की स्क्रीनिंग करना अनिवार्य है।
शिविर के दौरान सभी लोगों की टीबी, एचआईवी, डायबिटिक, बीपी, एचबी आदि की जांच करने के आदेश दिए।वहीं टीबी स्क्रीनिंग के लिए लोगों के एक्सरे, बलगम की जांच शिविर में ही करायी जाये, जिससे ज़्यादा से ज़्यादा टीबी के मरीज़ों की खोज की जा सकें
मीटिंग में उपस्थित रहे डॉ. संजीव तंवर डीटीओ, जिला प्रोग्राम संयोजक वेद प्रकाश शर्मा, जिला पब्लिक प्राइवेट संयोजक दिनेश कुमार और डीटीसी स्टाफ मौजूद रहे

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