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हमारी आवश्यकताओं की पूर्ति हमारे गांव से हो यही वास्तविक विकास है- स्वामी गोपालानंद सरस्वती

हमारी आवश्यकताओं की पूर्ति हमारे गांव से हो यही वास्तविक विकास है-

स्वामी गोपालानंद सरस्वती

 

सुसनेर। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव द्वारा मध्य प्रदेश के निराश्रित गोवंश के संरक्षण हेतु सम्पूर्ण मध्यप्रदेश में भारतीय नूतन संवत 2081 से घोषित “गोवंश रक्षा वर्ष” के तहत जनपद पंचायत सुसनेर की समीपस्थ ननोरा, श्यामपुरा, सेमली व सालरिया ग्राम पंचायत की सीमा पर मध्यप्रदेश शासन द्वारा स्थापित एवं श्रीगोधाम महातीर्थ पथमेड़ा द्वारा संचालित विश्व के प्रथम श्री कामधेनु गो अभयारण्य मालवा में चल रहें एक वर्षीय वेदलक्षणा गो आराधना महामहोत्सव के 246 वें दिवस पर स्वामी गोपालानंद सरस्वती महाराज ने बताया कि आज के दिन मानव अधिकार दिवस (Human Rights Day) मनाया जाता है। यह दिन इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसी दिन 1948 में संयुक्त राष्ट्र महासभा (United Nations General Assembly) ने मानव अधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा (UDHR) को अपनाया था।मानवाधिकार दिवस का उद्देश्य दुनिया भर में इन अधिकारों के प्रति सम्मान और जागरूकता को बढ़ाना है।

स्वामीजी ने बताया कि अपनी भक्ति का उपयोग किसी को तोड़ने के लिए नहीं बल्कि जोड़ने के लिए करना चाहिए और उसकी शक्ति के लिए गोमाता की सेवा ही सबसे श्रेष्ठ माध्यम है क्योंकि भगवती गोमाता की पूछ में तो साक्षात धर्म निवास करते है इसलिए हम गाय को प्रिय लगे ऐसा हमारा कार्य होना चाहिए ताकि हमारा कल्याण हो सकें क्योंकि आत्मकल्याण के लिए पहले लोक कल्याण करना होता है ।
स्वामीजी ने सुसनेर बताया कि आजकल बहुत से विद्यालय अपने बालकों को जूं में जानवर दिखाने के लिए ले जाते है लेकिन अक्षपाद विद्यामंदिर सुसनेर के बालक बालिकाएं विश्व के इस प्रथम गो अभयारण्य में आएं है ,यहां जूं तो नहीं है बल्कि यहां जीवन सुधरने का साधन जरूर है क्योंकि गो हमारी मां है और गायमाता की विद्यार्थी समझ जाएं तो फिर से हमारा देश नालंदा,तक्षशिला,विक्रमशिला एवं विक्रमी के काल में जिस प्रकार की उन्नति की पुनः उन्नत हो सकता है, लेकिन जबसे बच्चों को यह समझाया गया कि काऊ इज यूजफुल एनिमल उसके बाद से भारत की तकनीकी,भारत की कलां एवं भारत का विकास थम सा गया है । भले ही हम गाल बजा ले कि भारत विकास कर रहा है लेकिन वस्तुएं तो ज्यादातर मेड इन चाइना की ही आ रही है ।विकास का मतलब हमारी आवश्यकताओं की पूर्ति हमारे गांव में हो , इंपोर्ट का मतलब चाइना,अमेरिका,ब्रिटेन से वस्तुएं मंगाना ही नहीं है और पड़ोसी शहर से कुछ मंगाना आयात कहलाता था और जब नालंदा एवं तक्षशिला की संस्कृति भारत में थी तब गांव आत्म निर्भर थे क्योंकि गोमाता सब कुछ दे देती थी और विद्यार्थी इतने बुद्धिमान थे कि उन्होंने दुनियां को बहुत कुछ सिखा के गए है अर्थात भारत के विद्यार्थियों ने ही शून्य दिया एवं धरती से सूर्य तक की दूरी माप के दिखा दी ।

विश्व के प्रथम गो अभयारण्य में आगामी 11 दिसम्बर को गीता जयंती,13 दिसंबर को दवा देवी फाउंडेशन का शुभारंभ एवं 15 दिसंबर को कल्पगुरु दत्तात्रेय भगवान का प्रकट उत्सव रहेगा

गो कृपा कथा के 246 वें दिवस पर पं रामनारायण छापेड़ा,विक्रम सिंह मोहन,धन सिंह, नन्द किशोर शर्मा, बने सिंह बाली गांव,मोतीलाल लोवंशी, भंवर लाल गुप्ता डोंगरगांव, सरपंच सिद्धनाथ कारपेंटर, गोविन्द सिंह झाला,,सज्जन सिंह एवं अक्षपाद विद्यामंदिर सुसनेर के प्राचार्य नरेन्द्र कुमार जोशी अपने सम्पूर्ण स्टाफ एवं बालक बालिकाओं के साथ अतिथि उपस्थित रहें

246 वे दिवस पर चुनरीयात्रा मध्यप्रदेश राजस्थान ओर से

एक वर्षीय गोकृपा कथा के 246 वें दिवस पर चुनरी यात्रा मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले की जीरापुर तहसील के मोहन गांव से ठाकुर धन सिंह की बहुरानी व चिरंजीव श्यामसुंदर की धर्मपत्नी राधाकुंवर के जन्म दिवस पर झालावाड़, झालरापाटन, बालीगांव, रायपुर, बकानी, डोंगरगांव,सोयत,पिड़ावा, नानौर,सुसनेर, केशरपुरा, लसुड़िया, काडीयाखेड़ी,गुमडी, जीरापुर व छापेड़ा के सेंकड़ों गौभक्तों एवं श्रीअक्षपाद विद्यामंदिर सुसनेर के बालक बालिकाएं प्राचार्य नरेन्द्र कुमार जोशी एवं संतोष गिरी, मनोहर राव, बने सिंह, बीना जोशी,प्रियांशी जोशी,दिव्यांशी जोशी, मीना तिवारी, छाया शर्मा,आरती सोनी,लाड शर्मा, श्वेता देशमुख, पूजा पाटीदार,संजू बाई राठौर,दीपक राव व शिवसिंह राजपूत आदि अध्यापक अध्यापिकाओं एवन राजस्थान के झालावाड़ जिले की पचपहाड़ तहसील के सागड़िया ग्राम के श्योदान सिंह,बालू सिंह अर्जुन सिंह,चेतन प्रकाश गोस्वामी, चन्द्र सिंह, पंडित राधेश्याम,आशीष गोस्वामी,प्रकाश बरवाड़ा ने सम्पूर्ण विश्व के जन कल्याण के लिए गाजे बाजे के साथ भगवती गोमाता के लिए चुनरी लेकर पधारे और कथा मंच पर विराजित भगवती गोमाता को चुनरी ओढ़ाई एवं गोमाता का पूजन कर स्वामी गोपालानंद सरस्वती महाराज से आशीर्वाद लिया और अंत में सभी ने गो पूजन करके यज्ञशाला की परिक्रमा एवं गोष्ठ में गोसेवा करके सभी ने गोव्रती महाप्रसाद ग्रहण किया।
चित्र 1 : गोकथा सुनाते स्वामी गोपालानंद सरस्वती।
चित्र 2 : गोकथा में उपस्थित गौभक्त।
चित्र 3,4 : गोकथा में गोमाता को चुनड़ ओढाते गोभक्त ।
चित्र 5,6 : चुनरी यात्रा में आए गोभक्तो को सम्मानित करते महोत्सव के कार्यकर्ता
चित्र 7 : गो पूजन करते गो भक्त ।
चित्र 8 : गोमाता के लिए चुनड़ लाते गोभक्त

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