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सिरोही में बना प्रदेश का प्रथम अतिसंवेदनशील गवाह बयान केंद्र, शनिवार को हाईकोर्ट के जज ने किया शुभारंभ

हर्षल रावल
सिरोही/राज.

सिरोही में बना प्रदेश का प्रथम अतिसंवेदनशील गवाह बयान केंद्र, शनिवार को हाईकोर्ट के जज ने किया शुभारंभ


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सिरोही। राजस्थान के सिरोही में प्रदेश का प्रथम अतिसंवेदनशील गवाह बयान केंद्र शनिवार, 2 दिसंबर को न्यायाधिपति विरेन्द्र कुमार और फरजंदअली द्वारा उद्घाटित किया गया। यह केंद्र संवेदनशील गवाहों जैसे यौन उत्पीड़न पीड़ित, बच्चों, और तनावग्रस्त गवाहों के बयान रिकॉर्ड करने के लिए विशेष रूप से डिज़ाइन किया गया है।
न्यायाधिपति विरेन्द्र कुमार एवं फरजंदअली द्वारा जिला मुख्यालय सिरोही स्थित सरूपविलास परिसर में शनिवार दोपहर 1.30 बजे अतिसंवेदनशील गवाह बयान केंद्र का शुभारम्भ किया गया। यह प्रदेश का प्रथम अतिसंवेदनशील गवाह बयान केन्द्र हुआ। जिला एवं सेशन न्यायाधीश सिरोही रूपा गुप्ता ने बताया कि सर्वोच्च न्यायालय एवं राजस्थान उच्च न्यायालय के आदेशानुसार इस प्रकार के केंद्रों की स्थापना की जा रही है। इसमें राजस्थान में ऐसा प्रथम केंद्र सिरोही जिला मुख्यालय पर स्थापित किया गया है।

अतिसंवेदनशील गवाह केंद्र पर मिलेगी कई प्रकार की सुविधाएं:-
अतिसंवेदनशील गवाह बयान केंद्र में संवदेनशील गवाहों जैसे कि यौन उत्पीड़न के पीड़ितों, बच्चों या उन गवाहों के बयान रिकाॅर्ड किए जांएगे, जो गवाही देने के दौरान भय अथवा तनाव महसूस करते हैं। केंद्र में वीडियो कांफ्रेंस से बयान की सुविधा, आरामदायक एवं सहायक वातावरण उपलब्ध कराया जाएगा। इससे गवाह के मानसिक तनाव में कमी और साक्ष्य की गुणवत्ता में सुधार सुनिश्चित होगा। इसके अतिरिक्त गवाहों को भयभीत और धमकाने वाले मामलों पर रोकथाम एवं ऐसे गवाहों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी। इसके लिए केंद्र में सहज एवं सुविधायुक्त गवाह बाॅक्स और पृथक आरोपी बाॅक्स की व्यवस्था की गई है।

जागरूकता के लिए हुआ कार्यक्रम का आयोजन:-
सिरोही जिले के ग्राम पंचायत झाड़ोली की आंगनबाड़ी केंद्र पर अंशु राठौड़, हेमलता भाटी, रुचिका रावल, कुलसुमबानो महिलाओं का कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीड़न रोकथाम सप्ताह के तहत् जागरूकता महिलाओं एवं बालिकाओं की सुरक्षा, सशक्तीकरण व समग्र विकास की दिशा में जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। महिलाओं को कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीड़न (रोकथाम, प्रतिषेध, निवारण) अधिनियम 2013 के विषय में जानकारी देते हुए कहा महिलाओं को कार्यस्थल पर सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना है। जिस भी संस्थान में 10 या उससे अधिक लोग कार्य करते हैं उन पर यह अधिनियम लागू होगा। उन्हाेंने अधिनियम के तहत शिकायत प्रक्रिया सहित अन्य आवश्यक जानकारी दी।

अपराध और अपराधी को बढ़ावा तभी मिलता है, जब विरोध नहीं होता:-
कार्यक्रम के तहत महिलाओं को पॉक्सो एक्ट के विषय में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि अपराध और अपराधी को बढ़ावा तभी मिलता है, जब इसका विरोध नहीं किया जाता। इसलिए आवश्यक है कि महिलाएं स्वयं की शक्ति को पहचानें और अत्याचार के विरुद्ध आवाज बुलंद करें। क्षेत्र तथा आस पास किसी भी महिला के साथ हिंसा हो रही है तो महिलाओं की सहायता के लिए विभाग द्वारा संचालित केंद्र सखी वन स्टॉप सेंटर और महिला सुरक्षा एवं सलाह केंद्र से सहायता ले सकती हैं। महिला सुरक्षा एवं सलाह केंद्र और सखी वन स्टॉप सेंटर की कार्य प्रणाली से भी अवगत कराया साथ ही महिला हेल्पलाइन 181 और चाइल्ड हेल्प लाइन नंबर 1098 के विषय में जानकारी दी और कहा कि महिलाएं शोषण ओर अत्याचार के विरुद्ध बेझिझक होकर सहायता ले सकती है। साथीन मनीषा, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता पिंकी उपस्थित रहीं।

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