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सामाजिक कुरीति बाल विवाह को रोकने जनजागरूकता जरूरी

बरेली रायसेन से कृष्ण कुमार भार्गव की रिपोर्ट

सामाजिक कुरीति बाल विवाह को रोकने जनजागरूकता जरूरी

बाल विवाह कराने तथा शामिल होने पर दो साल की सजा और एक लाख रू तक जुर्माने का प्रावधान
रायसेन में बाल विवाह निषेध अधिनियम और इसके उल्लंघन के कानूनी परिणामों पर वेबिनार और सत्र आयोजित

जेण्डर आधारित हिंसा की रोकथाम हेतु मनाए जा रहे हम होंगे कामयाब पखवाड़ा अंतर्गत रायसेन स्थित पीएमश्री स्वामी विवेकानंद शासकीय महाविद्यालय सभागार में आयोजित बाल विवाह निषेध अधिनियम और इन कानूनों के उल्लंघन के कानूनी परिणामों पर वेबिनार और सत्र का कलेक्टर श्री अरविंद दुबे, अपर सत्र न्यायाधीश श्री राजीव राव गौतम, एसपी श्री पंकज पाण्डे तथा नगर पालिका अध्यक्ष श्रीमती सविता सेन द्वारा शुभारंभ किया गया। वेबिनार और सत्र में भारत सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा आयोजित बाल विवाह मुक्त भारत अभियान शुभारंभ कार्यक्रम का लाईव प्रसारण भी देखा व सुना गया।
इस अवसर पर कलेक्टर श्री दुबे ने कहा कि बाल विवाह एक सामाजिक कुरीति है। बाल विवाह के सामाजिक, शारीरिक, आर्थिक और शैक्षणिक दुष्परिणाम होते हैं तथा यह अपराध की श्रेणी में आता है। बाल विवाह कराने तथा इसमें शामिल लोगों के लिए सजा और जुर्माने का प्रावधान है। उन्होंने कहा कि जिन परिवारों में पहले कभी बाल विवाह हुए हैं, वह भी इसके दुष्परिणामों को जानते हैं। बाल विवाह, बालक-बालिका दोनों के लिए परेशानीदायक होता है। वह शारीरिक और मानसिक रूप से विवाह के तैयार नहीं होते हैं।

कलेक्टर श्री दुबे ने कहा कि शासन द्वारा बाल विवाह को रोकने के लिए लगातार योजनाएं, अभियान संचालित किए जा रहे हैं। कोई भी बच्चा माता-पिता पर बोझ ना बने, इसके लिए सरकार द्वारा विभिन्न योजनाएं चलाई जा रहीं हैं। बच्चों को निःशुल्क शिक्षा, निःशुल्क पाठ्यपुस्तक, गणवेश, छात्रवृत्ति प्रदान की जाती है। साथ ही शासकीय स्कूलों में मध्यान्ह भोजन भी प्रदान किया जाता है। उन्होंने कहा कि आज जिले के सभी विकासखण्डों और ग्राम पंचायतों में भी बाल विवाह की रोकथाम हेतु जनजागरूकता लाने कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।

कलेक्टर श्री दुबे ने कहा कि शासन के प्रयासों के सकारात्मक परिणाम भी मिल रहे हैं। यदि कोई माता-पिता बालिका का बाल विवाह करते हैं तो प्रायः बालिका द्वारा स्वयं या किसी के माध्यम से शासन को सूचना पहुंचाई जाती है तथा अधिकारियों, कर्मचारियों द्वारा तत्परता के साथ संबंधित के यहां पहुंचकर बाल विवाह रूकवाया जाता है। साथ ही माता-पिता को समझाईश देने के साथ ही दण्डात्मक कार्रवाई के बारे में भी बताया जाता है। उन्होंने उपस्थित बालक-बालिकाओं और नागरिकों से कहा कि अपने परिवार में, आसपड़ोस में सभी को बाल विवाह की रोकथाम हेतु प्रेरित करें। साथ ही बाल विवाह होने की सूचना प्राप्त होने पर तत्काल शिक्षकों, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता या शासकीय अमले को अवगत कराएं। कलेक्टर श्री दुबे द्वारा सभी को बाल विवाह की रोकथाम हेतु पूरी लगन और निष्ठा से कार्य करने की शपथ दिलाई गई।

कार्यक्रम में अपर सत्र न्यायाधीश श्री राजीव राव गौतम ने बाल विवाह अधिनियम 2006 के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि 1 नवंबर, 2007 से लागू इस अधिनियम के तहत, 18 साल से कम उम्र की लड़की या 21 साल से कम उम्र के लड़के का विवाह बाल विवाह माना जाता है। उन्होंने कहा कि बाल विवाह दंडनीय अपराध है तथा बाल विवाह करने वाले या करवाने वाले को दो साल की जेल या एक लाख रुपये का जुर्माना या दोनों हो सकते हैं। उन्होंने बताया कि इस अधिनियम के तहत किसी महिला को जेल नहीं हो सकती लेकिन जुर्माने से दंडित किया जा सकता है। इसी प्रकार अधिनियम के तहत किसी भी सद्भावनापूर्ण कार्रवाई पर बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी के खिलाफ कोई वाद या अभियोजन नहीं किया जा सकता है।

अपर सत्र न्यायाधीश ने कहा कि माता-पिता को अपने बच्चों का विवाह विधि अनुरूप विवाह की निर्धारित आयु के पहले अर्थात 18 वर्ष से कम आयु की लडकी और 21 वर्ष से कम आयु के लडके का विवाह किसी भी दशा में नहीं करना चाहिए। वैवाहिक निमंत्रण पत्रिका में वर और वधु की आयु का भी उल्लेख करना चाहिए। उन्होंने कहा कि बाल विवाह करवाने वाले वर-वधु दोनों पक्षों के माता-पिता, भाई-बहन, अन्य पारिवारिक सदस्यों, विवाह करवाने वाले पंडित अथवा अन्य धर्मगुरू, विवाह में शामिल बाराती, घराती, बाजेवाले, घोडेवाले, टेन्टवाले, हलवाई तथा विवाह कार्यक्रम में सम्मिलित होने वाले अन्य सभी संबंधित व्यक्तियों पर कानूनी कार्रवाई की जाती है। जनसाधारण एवं विवाह में सेवा देने वाले सेवाप्रदाता बाल विवाह कार्यक्रम में ना तो शामिल हों और ना ही अपनी सेवाएं दें। पुलिस अधीक्षक श्री पंकज पाण्डे द्वारा भी बाल विवाह अधिनियम 2006 अंतर्गत बाल विवाह कराने वालों पर की जाने वाली कार्रवाई और बाल विवाह की रोकथाम हेतु पुलिस बल द्वारा किए जा रहे प्रयासों के बारे में बताया गया।

कार्यक्रम में नगर पालिका अध्यक्ष श्रीमती सविता सेन ने कहा कि बाल विवाह एक कुप्रथा जिससे ना केवल बच्चों का बचपन छिन जाता है बल्कि उनकी पढ़ाई अधूरी छूटने के साथ-साथ उनका शारीरिक एवं मानसिक विकास अवरूद्ध होता है। इसलिए हम सभी का नैतिक दायित्व है कि बाल विवाह न होने दें। बाल विवाह को रोकने के लिए नागरिक भी आगे आएं और कहीं भी बाल विवाह होने की सूचना मिलने पर शासन-प्रशासन को अवगत कराएं। जिससे कि बाल विवाह को रोका जा सके। कार्यक्रम में महिला बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी श्री दीपक संकत द्वारा जिले में बाल विवाह की रोकथाम हेतु किए जा रहे कार्यो, प्रयासों के बारे में विस्तार से बताया गया। कृषक सहयोग संस्थान के श्री एसबी सेन द्वारा भी संबोधित किया गया। इस अवसर पर महाविद्यालय की जनभागीदारी समिति के अध्यक्ष श्री मनोज कुशवाह, महाविद्यालय के वरिष्ठ प्राध्यापक श्री जुनेजा सहित अन्य अधिकारी, कर्मचारी, बालक-बालिकाएं और आमजन उपस्थित रहे।

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