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गायमाता की महिमा को बढ़ाना,गायमाता के प्राणों को बचाना ,गायमाता का संवर्धन करना यही वास्तविक शुभ एवं श्रेष्ठ कार्य है- स्वामी गोपालानंद सरस्वती

गायमाता की महिमा को बढ़ाना,गायमाता के प्राणों को बचाना ,गायमाता का संवर्धन करना यही वास्तविक शुभ एवं श्रेष्ठ कार्य है- स्वामी गोपालानंद सरस्वती


सुसनेर। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव द्वारा मध्य प्रदेश के निराश्रित गोवंश के संरक्षण हेतु सम्पूर्ण मध्यप्रदेश में भारतीय नूतन संवत 2081 से घोषित गो रक्षा वर्ष के तहत जनपद पंचायत सुसनेर की समीपस्थ ननोरा, श्यामपुरा, सेमली व सालरिया ग्राम पंचायत की सीमा पर मध्यप्रदेश शासन द्वारा स्थापित एवं श्रीगोधाम महातीर्थ पथमेड़ा द्वारा संचालित विश्व के प्रथम श्री कामधेनु गो अभयारण्य मालवा में चल रहें एक वर्षीय वेदलक्षणा गो आराधना महामहोत्सव के 229 वे दिवस पर स्वामी गोपालानंद सरस्वती महाराज ने बताया कि आज भारत के आधुनिक वैज्ञानिक विद्युत-चुंबकीय तरंगों के अग्रदूत और व्यापक रूप से पहले आधुनिक भारतीय वैज्ञानिक माने जाने वाले जगदीश चंद्र बोस जो एक दूरदर्शी और प्रतिभाशाली प्रयोगवादी थे उनका आज निर्वाण दिवस है ।
स्वामीजी ने बताया कि जबसे श्वेत क्रांति एवं हरित क्रान्ति के मकड़जाड़ ने पुण्यभूमि भारत की धरतीमाता को दूषित करके हमें भगवती गोमाता से दूर किया है उसके लिए हमें पुनः गोमाता की और लौटना होगा क्योंकि गायमाता के बिना धरती मां का अस्तित्व नहीं है और जैविक कृषि अर्थात गो आधारित कृषि की इसे समय बहुत आवश्यकता है यानि जितनी आवश्यकता मनुष्य के लिए श्वास की है,उतनी ही आवश्यकता आवश्यकता इस समय भूमि को गो आधारित कृषि की है।
एक और तो हम भारत माता की जय जयकार कर रहें है वाही दूसरी और हम रासायनिक फर्टिलाइजर एवं कीटनाशक डालकर भारत माता को जहर खिला रहें है। यानि जितना खतरा भारत माता को चीन पाकिस्तान से नहीं हैं उससे कही गुणा खतरा भारत माता को इन रासायनिक खाद से है क्योंकि भारत की सीमा एवं आंतरिक रक्षा तो भारत एवं राज्यों ने अपनी व्यवस्था कर रखी है,लेकिन इस समय हमें रासायनिक खेती का बहिष्कार कर गो आधारित कृषि को बढ़ावा देना होगा तभी हम भारत माता के सच्चे सपूत कहलाने योग्य होंगे ।
स्वामीजी ने आगे बताया कि गायमाता इतनी कल्याणकारी है कि वह जन्म से लेकर मृत्यु तक मनुष्य के 42 संस्कारों में साथ देती है लेकिन कुछ मैकाले मानस पुत्रों ने हमारी संस्कृति को तोड़ मरोड़कर हमारे संस्कारों को भी 42 से घटाकर 16 संस्कारों तक सीमित कर दिया है ।
स्वामीजी ने बताया कि भले ही हमें गायमाता सस्ते में दिख रहीं हो कि ये तो सड़कों में घूम रही है ,ऐसा भाव हो लेकिन सड़कों पर दो बातें देखने के लिए मिलती है वह वह दोनों ही बातें बहुत कीमती है जिसमें एक तो नमक है जिसे व्यापारी कितना भी महंगा क्यों न हो उसे दुकान के बाहर ही रखता है लेकिन उसका महत्व तब समझ में आता है जब हम 56 प्रकार के मसाले डाले लेकिन अगर नमक9 नहीं डाला तो सब फीका है उसी प्रकार बिना गाय के 42 संस्कार इसलिए गायमाता की महिमा को बढ़ाना,गायमाता के प्राणों को बचाना ,गायमाता का संवर्धन करना इस समय यही वास्तविक शुभ एवम् श्रेष्ठ कार्य है ।

*229 वे दिवस पर डॉ. सुनील “पशुपालन एवं डेयरी विभाग द्वारा संचालित पौष्टिक आहार सयंत्र इटारसी” एवं संजय सैनी भोपाल डॉ.लटूर सिंह गुर्जर प्रान्त मंत्री भारतीय किसान संघ जयपुर प्रांत
कंसल्टेंट इंडिया फाउंडेशन नई दिल्ली &
BAIF ( बायफ ) development रिसर्च foundation pune एवं जैविक एवं संरक्षण खेती biochar निर्माण , रामकुमार अग्रवाल,IIT दिल्ली में साइंटिस्ट , दिनेश भावसार पिड़ावा (व्याख्याता) एवं श्री बीसा नीमा गो सेवा मित्र मण्डल खरगौन से निलेश महाजन, विठ्ठल महाजन, मोंटी महाजन, मिलन महाजन एवं निलेश श्रीमाली , गोरक्षा कमांडो फोर्स के राष्ट्रीय अध्यक्षा सुरेन्द्र सिंह SS टाईगर, एवं प्रभारी प्रह्लाद राठौर, जगदीश टेलर एवं बापू लाल वर्मा आदि अतिथि उपस्थित रहें*

*229 वे दिवस पर चुनरीयात्रा मध्यप्रदेश की ओर से *
एक वर्षीय गोकृपा कथा के 229 वें दिवस पर चुनरी यात्रा मध्यप्रदेश के आगर मालवा जिले की बडौद तहसील के डाबला क्षत्रिय ग्राम की महिला मण्डल की और से अपने परिवार की और से सम्पूर्ण विश्व के जन कल्याण के लिए गाजे बाजे के साथ भगवती गोमाता के लिए चुनरी लेकर पधारे और कथा मंच पर विराजित भगवती गोमाता को चुनरी ओढ़ाई एवं गोमाता का पूजन कर स्वामी गोपालानंद सरस्वती महाराज से आशीर्वाद लिया और अंत में सभी ने गो पूजन करके यज्ञशाला की परिक्रमा एवं गोष्ठ में गोसेवा करके सभी ने गोव्रती महाप्रसाद ग्रहण किया।
चित्र 1 : गोकथा सुनाते स्वामी गोपालानंद सरस्वती।
चित्र 2 : गोकथा में उपस्थित गौभक्त।
चित्र 3,4 : गोकथा में गोमाता को चुनड़ ओढाते गोभक्त ।
चित्र 5,6 : चुनरी यात्रा में आए गोभक्तो को सम्मानित करते महोत्सव के कार्यकर्ता
चित्र 7 : गो पूजन करते गो भक्त ।
चित्र 8 : गोमाता के लिए चुनड़ लाते गोभक्त
चित्र 9:अतिथियों का सम्मान करते आयोजन समिति के कार्यकर्ता ।

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