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अछय नवमी आंवला नवमी व्रत विधि एवं महत्व

 

अछय नवमी आंवला नवमी व्रत विधि एवं महत्व

बरेली रायसेन मध्य प्रदेश से तखत सिंह परिहार सिलवाह

देवी रत्नमणि द्विवेदी


हर साल अक्षय नवमी कार्तिक माह की शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को मनाई जाती है। इस शुभ दिन पर आंवले के पेड़ की पूजा की जाती है। आंवले के पेड़ के नीचे भोजन भी बनाया जाता है। इस भोजन को सबसे पहले भगवान विष्णु और महादेव को अर्पित किया जाता है । सनातन धर्मग्रंथों से पता चलता है कि लक्ष्मी जी ने सबसे पहले आंवले के पेड़ की पूजा की थी। पेड़ के नीचे भोजन बनाकर किया जाता है
इस बार अक्षय नवमी तिथि
कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि 09 नवंबर, रात्रि 10: 45 मिनट से प्रारम्भ होकर
नवमी तिथि का समापन : 10 नवंबर, रात्रि 09: 01 मिनट पर
उदया तिथि के अनुसार 10 नवंबर को अक्षय नवमी मनाई जाएगी ।
अक्षय नवमी पर आंवले पेड़ के नीचे बैठकर भगवान विष्णु की आराधना की जाती है ।
अक्षय नवमी की पूजा विधि
धार्मिक ग्रंथों में आंवले को पवित्र माना गया है। इस दिन आंवले के पेड़ की पूजा करने से व्यक्ति के जीवन में सुख, समृद्धि और शांति आती है ।
इस दिन विशेष रूप से भगवान विष्णु की पूजा की जाती है । इस विशेष दिन पर, भक्त आंवले के पेड़ के नीचे बैठते हैं और भक्तिपूर्वक प्रार्थना करते हैं । अक्षय नवमी पर पितरों का श्राद्ध और तर्पण भी किया जाता है । नई शुरुआत के लिए भी यह दिन अनुकूल माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, व्यवसाय में निवेश करने या नई योजनाएं शुरू करने के लिए यह अनुकूल समय है ।
अक्षय नवमी की पूजा विधि
प्रातः काल जल्दी उठकर स्नानादि से निवृत्त होकर व्रत का संकल्प लें ।
इसके बाद आंवले के वृक्ष पर गंगाजल चढ़ाएं और रोली, चंदन, पुष्प आदि से श्रृंगार करें ।
इसके बाद आंवले के पेड़ के नीचे घी का दीया जलाएं ।
अब पेड़ की सात बार या 108 परिक्रमा करें ।
परिक्रमा के बाद आंवले के पेड़ के नीचे फल, मिठाई आदि का नैवेद्य अर्पित करें ।
अक्षय नवमी के दिन विशेष रूप से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है, इसलिए उनकी भी पूजा अर्चना करें ।
मंत्र जाप के दौरान “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करें ।
संभव हो तो अपनी क्षमता अनुसार किसी जरूरतमंद को भोजन, वस्त्र आदि दान कर सकते हैं ।
शाम को पूजा के बाद सुख-समृद्धि और खुशहाली की प्रार्थना करें और व्रत का पारण करें…..
लेखिका देवी रत्नमणि द्विवेदी
राष्ट्रीय कथाकार एवं धर्मगुरु
बरेली जिला रायसेन मध्य प्रदेश
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