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दूज पर भरता है मेला गांगो माता की पूजा बर्षों पुराना है इतिहास

बरेली रायसेन मध्य प्रदेश से तखत सिंह परिहार की रिपोर्ट

दूज पर भरता है मेला गांगो माता की पूजा बर्षों पुराना है इतिहास

जामगढ़ है धार्मिक पर्यटन स्थल शासन से दरकार मिले संरक्षण

बरेली ।समीपस्थ ऐतिहासिक ग्राम जामगढ़ में मढ़ई मेले का लगभग 500 वर्ष पुराना इतिहास है। बताया जाता है कि यहां पहले 100 ढालों की पूजन हुआ करती थी। साथ ही आसपास के करीब 25
गांव के पंडा जामगढ़ में लगने वाले मढ़ई मेले में सम्मिलित होकर लोक उत्सव को गरिमा प्रदान करते थे। कालांतर में यह मेला घटते क्रम में है। पूर्व में ग्राम व आसपास के गांवों में आदिवासी
समाज का बाहुल्य था। यह लोक उत्सव आदिवासी समाज का प्रमुख उत्सव है। व साथ में अन्य
समाज भी इसमें सम्मिलित होते हैं। ग्राम जामगढ़ के समाजसेवी पं. कमलकिशोर शर्मा बताते हैं
कि मढ़ई मेले में मढ़ई माता गांगो देवी के रूप में देवी रक्तदन्ता, अहिरावण की मुख्य आराध्य
देवी की पूजन होती है। उक्त पूजन के विधान का उल्लेख कामाख्या तंत्र में भी है। जिस गावं में देवी रक्तदन्ता (गांगो माता मढ़ई माता) की पूजन होती है। कहते हैं मढ़ई मेला जहां भरता
है वहां की रक्षा देवी रक्तदन्ता करती है। साथ ही वहां देवीय प्रकोप, महामारी, अनिष्ठकारी
तांत्रिक प्रकोपों से देवी उस गांव की रक्षा करती है। जामगढ़ में आयोजित होने वाले इस मेले में
देवताओं के नाम की ढालें बांधी जाती है। ढालों की शादी गांगो देवी के साथ होती है। ढाल की
गांगो देवी का फेरा लगाकर लोकोत्सल मनाया जाता है। उपस्थित लोग नाच गाकर भगवान देवताओं की शादी कर उत्सव मनाते है। साथ ही एकादशी पर ढाल को आड़ी कर सामाजिक
शादी समारोह आदि प्रारंभ हो जाते हैं।

कठिन है डगर संरक्षण की दरकार…..

ऐतिहासिक पुरातत्त्वीय धार्मिक प्राचीन पर्यटन के महत्व के कारण ग्राम जामगढ़ को शासन द्वारा पर्यटन स्थल घोषित किया गया है, जिसे आज प्रशासनिक संरक्षण की दरकार है। लेकिन सड़क, बिजली, पानी व रख-रखाव की उचित व्यवस्था न होने के कारण श्रध्दालुओं, पर्यटकों व शैलानियों को सुगम मार्ग के अभाव में आवागमन में कठिनाई होती है। भक्तों शैलानियों, पर्यटकों की सुविधा के लिए धर्मशाला, आवागमन के लिये सड़क मार्ग की मांग उठती रही है, जो बेअसर रही। इस सबके बाद भी लोगों की श्रध्दा इन्हें इस चमत्कारी स्थान तक खींच लाती है।

सड़क मार्ग –

ग्राम से जामवंत गुफा शंकर जी गुफा माधामऊ होकर बम्होरी मार्ग से जोड़ा जावे।
जामगढ़, बापोली, सेमरी।
जामगढ़, हरडोब, आलीवाड़ा, ऊंटिया, सिलवाह।
जामगढ़, हमीरगंज

सड़क मार्ग बनने से पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा साथ ही आसपास के ग्रामीण व विद्यार्थीओं को हाईस्कूल, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र, पशुचिकित्सालय व साप्ताहिक बाजार आने में सुविधा होगी

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