Advertisement

बीकानेर-हर घर की ये साधारण सब्जी हड्डियों को बनाए फौलादी, जानें इसके खास फायदे

सवांददाता मीडिया प्रभारी मनोज मूंधड़ा बीकानेर श्रीडूंगरगढ

पौष्टिक गुणों से भरपूर आलू में विटामिन सी, बी कॉम्प्लेक्स, आयरन,कैल्शियम,मैंगनीज और फास्फोरस होते हैं,जो न केवल स्वादिष्ट व्यंजनों में जान डालते हैं बल्कि सेहत के लिए भी बेहद फायदेमंद होते हैं। आलू, जिसे सब्जियों का राजा भी कहा जाता है, भारतीय थाली में बेहद अहम स्थान रखता है। इसके बिना कई व्यंजन अधूरे माने जाते हैं। आलू (Potato) का हर घर में इस्तेमाल होता है और इसके कई पकवान लोगों की पसंदीदा सूची में शुमार होते हैं।

आलू के स्वास्थ्य लाभ:-आलू में अनेक पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो इसे सेहत के लिए बेहद फायदेमंद बनाते हैं।

विटामिन और खनिजों का भंडार: आलू में विटामिन सी,बी-कॉम्प्लेक्स, आयरनकैल्शियम, मैंगनीज और फास्फोरस भरपूर मात्रा में होते हैं,जो शरीर के विकास और प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करने में सहायक हैं।

मजबूत हड्डियों के लिए कैल्शियम: कैल्शियम का अच्छा स्रोत होने की वजह से आलू का सेवन हड्डियों को मजबूत बनाता है।

त्वचा और जलन में राहत: यदि त्वचा कहीं जल जाए तो कच्चे आलू को पीसकर लगाने से राहत मिलती है।
रोग प्रतिरोधक क्षमता: कैरोटीनॉयड और विटामिन सी की मौजूदगी से आलू प्रतिरक्षा तंत्र को मजबूत करता है और रोगों से बचाव में सहायक होता है।

स्वादिष्ट व्यंजनों में आलू का स्थान

भारत के विभिन्न क्षेत्रों में आलू से कई तरह के व्यंजन बनाए जाते हैं, जो हर उम्र के लोगों के दिलों पर राज करते हैं।

लोकप्रिय स्नैक्स: वड़ा पाव, चाट, समोसा, और टिक्की जैसे स्नैक्स में आलू का अहम योगदान है।

पारंपरिक व्यंजन: आलू की भरवां कचौरी, पापड़ और आलू का चोखा जैसे व्यंजन पारंपरिक रूप से खास मौकों पर बनते हैं।

अंतरराष्ट्रीय पकवान: आलू से बने फ्रेंच फ्राइज़ और चिप्स भी खूब पसंद किए जाते हैं।

आलू का ऐतिहासिक सफर: पेरू से भारत तक

आलू का इतिहास दक्षिण अमेरिका के पेरू से शुरू होता है, जहाँ इसकी खेती सात हजार साल पहले की जाती थी। वहां इसे ‘कामाटा’ और ‘बटाटा’ के नाम से जाना जाता था। 16वीं शताब्दी में स्पेन इसे यूरोप लेकर आया और इसका नाम पोटैटो’ रखा गया। भारत में आलू का आगमन यूरोपीय व्यापारियों के साथ हुआ, जो इसे 15वीं शताब्दी में लाए थे।

भारत में आलू की किस्में और उत्पादन प्रारंभिक दौर में

भारत में आलू की तीन प्रमुख किस्में थीं – फुलवा, गोला और साठा। वर्तमान में भारत आलू उत्पादन में विश्व में चीन और रूस के बाद तीसरे स्थान पर है, और यह पूरे साल बाजार में उपलब्ध रहता है। आलू, जो पेरू की पहाड़ियों से भारत के घरों तक पहुंचा, आज भी हमारी रसोई का अभिन्न हिस्सा है। इसके स्वास्थ्य लाभ और विविध व्यंजनों में इसका प्रयोग इसे सबकी पसंद का सुपरफूड बनाता है।

Spread the love

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!