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लखनऊ के मुस्लिम धर्मगुरुओं ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया है।

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लखनऊ : मुख्य न्यायाधीश डी.वाई. की खंडपीठ. चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और उच्चतम न्यायालय के न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा ने जमीयत उलेमा-ए-हिंद की एक याचिका पर सुनवाई करते हुए मदरसों को वित्तीय सहायता बंद करने की राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग की सिफारिश पर रोक लगा दी। जिसके बाद लखनऊ के मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली, मौलाना यासीन अब्बास समेत तमाम मुस्लिम धर्मगुरुओं ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया।राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने एनसीपीसीआर के शिक्षा का अधिकार अधिनियम का पालन नहीं करने पर सरकारी वित्त पोषित और सहायता प्राप्त मदरसों को बंद करने की सिफारिश की थी। जिस पर मुस्लिम संगठन जमीयत उलेमा-ए-हिंद के वकील ने तमाम दलीलें रखीं।

वहीं, लखनऊ ईदगाह के इमाम और धर्मगुरु मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली ने कहा कि मदरसों के नाम पर कोई गलत फैसला नहीं होना चाहिए। मदरसे हर धर्म के लिए खुले हैं, मदरसे के छात्रों को भी शिक्षा का पूरा अधिकार है। हम सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हैं।

ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के महासचिव मौलाना यासीन अब्बास ने कहा कि मदरसों को लेकर सुप्रीम कोर्ट का फैसला स्वागत योग्य है। मदरसों को बंद करने की साजिश हो रही है। जिस पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले से रोक लग गई है।

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