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मथुरा : प्रभु करी कृपा पाॅवरी दीन्ही, सादर भरत सीस धर लीनी।

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रिपोर्ट यज्ञदत्त चतुर्वेदी की रिपोर्ट मथुरा, उत्तर प्रदेश

 

• भरत मनावन लीला, नगर में निकली भरत शत्रुघ्न सवारी।

प्रभु करी कृपा पाॅवरी दीन्ही, सादर भरत सीस धर लीनी।

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मथुरा : श्रीरामलीला सभा, मथुरा के तत्वावधान में चित्रकूट लीलामंच पर भरत मनावन व पादुका दान लीला का मार्मिक व हृदयस्पर्शी मंचन हुआ ।

भ्राता राम से वन में मिलने जाने के लिए भरतजी व शत्रुघ्न जी की सवारी गोविन्द गंज से प्रारम्भ होकर होली गेट, छत्ता बजार, स्वामी घाट, चैक बाजार होते हुए लाल दरवाजा पहुॅची । वहाॅं निषादराज से भेंट के बाद चित्रकूट पहुॅचे ।

 भीलों द्वारा प्रभु राम को चतुरंगिणी सेना के साथ आगमन की सूचना दी जाती है । लक्ष्मण क्रोधित होते हुए प्रभु श्री राम से कहते हैं कि राज्य के मद में चूर दोनों भाई भरत शत्रु/न अकंटक राज्य की कुमंत्रणा करके सेना के साथ आना उनका कुचक्र है । राम समझाते हैं कि भरत को कभी भी राज्य मद नहीं हो सकता । श्री राम के समक्ष पहुंचने पर भरत पाहिमाम्-पाहिमाम् कहते हुये पृथ्वी पर साष्टांग दण्डवत् करके चरणों में गिर पड़ते हैं श्री राम लक्ष्मण व जानकी गुरू वशिष्ठ व तीनों माताओं का भावपूर्ण मिलन होता है ।

 भरतजी की ओर से मुनि वशिष्ठ प्रस्ताव रखते हैं कि आप अयो/या वापिस लौट कर वहाॅं की राजगद्दी को शोभायमान करें, तो श्रीराम पिता की आज्ञा का अनुपालन करने की स्वयं को तथा भरत जी को सलाह देते हैं । भरतजी व सभासदों के अनेकों बार अनुनय विनय को सुनकर भी श्री राम अयो/या वापस लौटने की मना कर देते हैं, तो भरतजी प्रभु से अपनी पादुका प्रदान करने की प्रार्थना करते हैं । प्रभु श्री राम उन्हें पादुका देते हैं, जिन्हें भरतजी अपने मस्तक पर धारण करके अपनी सेना, मंत्री, माताओं व कुलगुरू वशिष्ठ के साथ वापिस अयो/या लौट जाते हैं ।

प्रसाद सेवा पूर्व ऊर्जा मंत्री रविकान्त गर्ग के द्वारा की गयी। लीला में गोपेश्वर नाथ चतुर्वेदी, रविकान्त गर्ग, जयन्ती प्रसाद अग्रवाल, नन्दकिशोर अग्रवाल, जुगलकिशोर अग्रवाल, मूल चन्द गर्ग, प्रदीप सर्राफ पी.के., विजय सर्राफ किरोड़ी, शैलेष सर्राफ, अजय मास्टर, सुरेन्द्र शर्मा खौना, विनोद सर्राफ, संजय बिजली, अनूप टैण्ट, पं0 अमित भारद्वाज, मदन मोहन श्रीवास्तव, अजयकान्त गर्ग, प्रदीप गोस्वामी, शैलेन्द्र हकीम, राम गोपाल शर्मा आदि प्रमुख रूप से उपस्थित थे । 07 अक्टूवर को खरदूषण वध, सीता हरण की लीला चित्रकूट लीलामंच मसानी पर सायं 7ः00 बजे से होगी

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