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चंदौली : जिला के डी.डी.यू रेलवे के अधिकारियों और कर्मचारियों ने की फूल प्रूफ प्लानिंग,अब ट्रेनों की सुरक्षा पर लगाया कड़ा प्रबंध।

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रिपोर्टर शोएब की रिपोर्ट चन्दौली, उत्तर प्रदेश 

• जिला के डी.डी.यू रेलवे के अधिकारियों और कर्मचारियों ने की फूल प्रूफ प्लानिंग,अब ट्रेनों की सुरक्षा पर लगाया कड़ा प्रबंध।

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चंदौली : जिले में रेल लाइन के हर दो किमी पर आरपीएफ जवान व छह किमी पर गैंग मैन की तैनाती होगी। लगभग डेढ़ हजार किमी की रोजाना फुट पेट्रोलिंग तथा कंट्रोल रूम से निगरानी की जाएगी। साथ ही साथ फ्रेट कोरिडोर में भी खास सतर्कता बरती जा रही है, ताकि किसी भी प्रकार का सिक्योरिटी फेल न हो। रेल व यात्री ट्रेनों को नुकसान पहुंचाने के साजिश- कर्ताओं के खिलाफ रेलवे ने फुलप्रूफ सुरक्षा व्यवस्था का खाका तैयार किया है। रेलवे ट्रैक के हर दो किमी पर आरपीएफ जवानों की निगरानी है तो पटरियों, स्लीपर व गिट्टियों को देखने के लिए पांच से छह किमी पर गैंग मैन की तैनाती कर दी जा रही है। पीडीडीयू मंडल में लगभग डेढ़ हजार किमी मीटर की ट्रैक है। इस पर रोजाना फुट पेट्रोलिंग तेज कर दी गयी है। पेट्रोलिंग टीम सीधे कंट्रोल रूम को रिपोर्ट करती है। इसमें मौसम के आधार पर ड्यूटी लगाई और बदली जाती है।जैसा कि आप जानते हैं कि गर्मी के दिनों में पटरियों के टेढ़े होने की संभावना होती है और ठंड में चटकने की शिकायतें मिलती हैं। इसलिए गर्मी में दिन में पेट्रोलिंग तो ठंड में रात में होती है। सामान्य दिनों में विभाग अपने हिसाब से ड्यूटी लगाकर जांच पड़ताल करवाता है। आरपीएफ के जवानों की मुस्तैदी हर दो किमी पर होती है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में कोई सेंध न लगा सके।पंडित दीनदयाल उपाध्याय मंडल में 1375 किमी रेल लाइन है। इसकी देखरेख व मेंटेनेंस के लिए 2650 ट्रैक मेंटेनर कैडर के कर्मचारी नियुक्त हैं। ये रेलवे ट्रैक की निगरानी कर रहे हैं। ये कर्मचारी रेलवे ट्रैक की सुरक्षा और रख-रखाव के लिए जिम्मेदार हैं। इन कर्मचारियों की जिम्मेदारियों में शामिल ट्रैक की नियमित जांच, ट्रैक की मरम्मत और रखरखाव, सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करना व ट्रैक पर संदिग्ध गतिविधियों की जांच करना भी है। इन कर्मचारियों की मेहनत से रेलवे परिवहन सुरक्षित और सुचारु रहता है। वे रेलवे ट्रैक की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

फ्रेट कोरिडोर में भी है सतर्कता* फ्रेट कोरिडोर के डीडीयू यूनिट में 280 किमी ट्रैक है। इसकी सुरक्षा के लिए 67 डीजीआर (सेवा निवृत्त जवान) और 84 गैंग मैन की तैनाती की गई है। ये जवान और गैंग मैन रेलवे ट्रैक पर निगरानी करते हैं और सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित कराते हैं। इसके अलावा डीएफसी ट्रैक पर 24 घंटे गश्त की व्यवस्था है। डीएफसी के सभी स्टेशन सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में हैं। समय-समय पर संदिग्ध गतिविधियों की जांच होती है।डीजीआर जवान और गैंग मैन मिलकर फ्रेट कोरिडोर की सुरक्षा को मजबूत बनाते हैं और माल ढुलाई परिवहन को सुरक्षित और सुचारु बनाए रखते हैं। इसके अलावा यूनिट के आला अधिकारी ट्राली व निरीक्षण यान से भी निरीक्षण किया करते है। ट्रैक मेंटेनेस कैडर वे के कर्मचारी इंजीनियर विभाग के पास है। उन्हें भी लगाया गया है। आरपीएफ ने भी अपने कुछ अति संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त फोर्स की तैनाती की है। बाकी सिग्नल व इंजीनियरिंग विभाग को ट्रैक किनारे रखे अनयूज्ड सामान को हटाने के लिए बोला गया है। ताकि किसी वजह से सुरक्षा को खतरा न पहुंचे।

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