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पर्वों के आयोजन में सामाजिक समरसता हेतु प्रत्येक वर्ग सहयोग करें : विधायक आशाराम नेताम शांति समिति की बैठक में गणेशोत्सव एवं ईद पर्व सौहार्द्रपूर्ण मनाने की गई अपील

विशेष संवाददाता :- राजेन्द्र मंडावी                                                       पर्वों के आयोजन में सामाजिक समरसता हेतु प्रत्येक वर्ग सहयोग करें : विधायक आशाराम नेताम 

शांति समिति की बैठक में गणेशोत्सव एवं ईद पर्व सौहार्द्रपूर्ण मनाने की गई अपील

 

कांकेर। जिले में दस दिवसीय गणेशोत्सव और ईद-ए-मिलादुन्नबी पर्व के आयोजन के दौरान कानून एवं शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए आज जिला स्तरीय शांति समिति की बैठक में उपस्थित कांकेर विधायक आशाराम नेताम ने सभी वर्गों से पूर्व वर्षों की भांति परस्पर सामाजिक समरसता, भाईचारा और सौहार्द्र के साथ मनाने की बात कही। उन्होंने पर्वों के दौरान सभी वर्ग से आवश्यक व अपेक्षित सहयोग करने और शासन द्वारा निर्धारित नियमों व कानूनों का पालन करने की अपील की। जिला कार्यालय के सभाकक्ष में आयोजित जिला स्तरीय शांति समिति की बैठक में कलेक्टर निलेश महादेव क्षीरसागर ने सोशल मीडिया के माध्यम से कतिपय असामाजिक तत्वों के द्वारा अपुष्ट अफवाहें फैलाई जाती हैं, जिनसे सभी को सतर्क एवं सजग रहना आवश्यक है।                                                                             उन्होंने इस दौरान नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल और न्यायालय द्वारा निर्धारित नियमों व दिशानिर्देशों का पालन करने के संबंध में समिति के पदाधिकारियों से आवश्यक सहयोग करने की अपील की। साथ ही यह भी बताया कि मूर्ति विसर्जन, शोभायात्रा, जुलूस एवं झांकी प्रदर्शन के लिए रूट चार्ट आदि हेतु जिला प्रशासन एवं पुलिस द्वारा माइक्रो प्लानिंग की जाएगी, जिसमें इस दौरान सभी आवश्यक सुविधाओं, सुरक्षा पहलुओं, पार्किंग, रूट चार्ट आदि के संबंध में विस्तार से कार्ययोजना तैयार की जाएगी।
बैठक में अपर कलेक्टर श्री एस. अहिरवार ने एनजीटी के निर्देशों की जानकारी देते हुए बताया कि आयोजन समितियों को जिला प्रशासन के सक्षम प्राधिकारी से विधिवत अनुमति लेनी होगी। यह भी बताया गया कि शोभायात्रा, जुलूस में एनजीटी द्वारा पारित निर्णयानुसार डीजे/लाउड स्पीकर यंत्रों की सीमा 10 डेसिबल ए/75 डेसिबल ए होगी। ध्वनि एवं पर्यावरण प्रदूषण रोकने रात्रि 10 बजे तक की समय-सीमा निर्धारित की गई है, का सभी आयोजन समिति पालन करें। सभी प्रकार के आयोजन की जानकारी जिला प्रशासन व पुलिस प्रशासन के संज्ञान में लाना अनिवार्य है तथा सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के बाद ही स्वागत द्वार, मंच-पंडाल का निर्माण व सार्वजनिक कार्यक्रम आयोजित किया जाए। इसके अलावा जुलूस/शोभायात्रा के दौरान बजाए जाने वाले गीत-संगीत कर्णप्रिय, गरिमामय तथा भक्तिपूर्ण हो, इसका भी ध्यान रखा जाए। अपर कलेक्टर ने एनजीटी और उच्च न्यायालय छत्तीसगढ़ के विभिन्न निर्देशों की भी विस्तारपूर्वक जानकारी दी। इस दौरान समिति के पदाधिकारियों ने भी अपने-अपने सुझाव दिए।

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