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आजादी की जश्न पर देश 78वीं वर्ष पर अमृत महोत्सव मना रही है, मूलभूल सुविधाओं के लिए तरस रहे है लोग,घासीपारा पोरहोंडी के स्कूली बच्चों को अपने जान जोखिम में डाल कर शिक्षा लेने को मजबूर  ,

संवाददाता  राकेश कुमार टांडिया अंतागढ़                                                   आजादी की जश्न पर देश 78वीं वर्ष पर अमृत महोत्सव मना रही है, मूलभूल सुविधाओं के लिए तरस रहे है लोग,घासीपारा पोरहोंडी के स्कूली बच्चों को अपने जान जोखिम में डाल कर शिक्षा लेने को मजबूर  ,

..कांकेर जिला मुख्यालय से 110 किलोमीटर है ग्राम घासीपारा पोरहोंडी के छोटे छोटे बच्चे प्रतिदिन नदी से होकरआना जाना करते हैं, जिससे हमेशा दुर्घटना होने का भय बना रहता है,शासकीय हाई स्कूल भैसासुर जाते हैं ,उनको भी बडी समस्या होता है ग्राम पंचायत पोरहोंडी और ग्राम पंचायत छोटे बोदेली के स्कूली बच्चे जान जोखिम में डालकर स्कूल जाने पर मजबूर , ब्लाक मुख्यालय कोयलीबेडा बारिश के दिनों संपर्क टूट जाता है, इसकी जानकारी कई बार शासन प्रशासन को कई बार अवगत होने के बाद भी, शासन प्रशासन इस क्षेत्र के बच्चों की स्कूली शिक्षा पर ध्यान नहीं दी जा रही है,
स्कूली बच्चे प्रतिदिन नदी से होकर गुजरते है , बहुत सारी समस्याओं का सामना करना इन छात्र-छात्राओं को करना पड़ता है, ग्राम पोरहोंडी, पोरोहकाल, माड़कटा, छोटे बोदेली कुरूसबोड़ी, सभी गांव के लोग शासन प्रशासन को कई बार अवगत कराने के बाद भी इन समस्याओं का समाधान नहीं हो पा रही है,,,
,दिक्कत आती है. कई बार नदी में पानी की आवक ज्यादा होने से स्कूली शिक्षक भी स्कूल तक नहीं आ पाते, ग्राम पोरहोंडी, पोरोहकाल, माड़कटा, छोटेबोदेली कुरूसबोड़ी, सभी गांव के लोग शासन प्रशासन को कई बार परेशानी बताने के बाद भी कुछ नहीं किया।जान जोखिम में डालकर स्कूल जाने वाले बच्चे बताते हैं कि यहां पर बड़े-बड़े गड्ढे हैं और पानी में फेर निकलता है, जिससे जान जाने का खतरा बना रहता है. इस रास्ते को लेकर हमने गांव के सरपंच को भी बताया था लेकिन अभी तक कोई सुनवाई नहीं हुई.
वहीं, गांव की महिलाएं बताती हैं कि आए दिन नदी में पानी होने के चलते गांव में एंबुलेंस भी नहीं आती है ,और किसी महिलाओं को प्रसव पीड़ा होती है तो उसे डोली में डालकर नदी को पार करना पड़ता है. इसकी जानकारी परमेश्वर नरेटी ने बताया कि स्कूल जाने वाले बच्चों को भारी जान जान जोखिम में डाल कर पढ़ने जाते हैं , नदी में पार करते समय घटना घट सकती हैं,
स्कूल जाने वाले बच्चों के नाम शांति दुग्गा, परमेश्वरी दुग्गा संतोषी दुग्गा, अशोक, देवसाय दुग्गा, दयाबत्ती, संतोषी दुग्गा एवं ग्रामीण परमेश्वर नरेटी, महेश नरेटी, सुनील उईके, बिरजू उसेंडी राजमू दुग्गा समस्त ग्रामवासियों मौजूद रहे।

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