Advertisement

बीकानेर-जैन धर्म के अनुसार समाधि चित्त की सुक्ष्म अवस्था है। : योग एक्सपर्ट ओम कालवा

सवांददाता मीडिया प्रभारी मनोज मूंधड़ा बीकानेर श्रीडूंगरगढ

जैन धर्म के अनुसार समाधि चित्त की सुक्ष्म अवस्था है। : योग एक्सपर्ट ओम कालवा

श्रीडूंगरगढ़ कस्बे की ओम योग सेवा संस्था के निदेशक योगाचार्य ओम प्रकाश कालवा ने चित्त समाधि के बारे में विस्तृत जानकारी देते हुए बताया। चित्त की समस्त वृत्तियों के निरोध होने पर चित्त की स्थिर एवं उत्कृष्ट अवस्था होती है। यही समाधि की अवस्था कहलाती है। हिन्दू, जैन, बौद्ध तथा योगी आदि सभी धर्मों में इसका महत्व बताया गया है। जब साधक ध्येय वस्तु के ध्यान मे पूरी तरह से डूब जाता है और उसे अपने अस्तित्व का ज्ञान नहीं रहता है तो उसे समाधि कहा जाता है। जैन धर्म के अनुसार चित्त समाधि का अर्थ समाधि चित्त की सूक्ष्म अवस्था है जिसमें चित्त ध्येय वस्तु के चिंतन में पूरी तरह लीन हो जाता है। जो व्यक्ति समाधि को प्राप्त करता है उसे स्पर्श, रस, गंध, रूप एवं शब्द इन 5 विषयों की इच्छा नहीं रहती तथा उसे भूख-प्यास, सर्दी-गर्मी, मान-अपमान तथा सुख-दु:ख आदि किसी की अनुभूति नहीं होती।

Spread the love

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!