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सुसनेर-25 करोड़ से अधिक की योजना चढ़ी भ्रष्टाचार की भेंट

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सत्यार्थ न्यूज़ / मनीष माली की रिपोर्ट

25 करोड़ से अधिक की योजना चढ़ी भ्रष्टाचार की भेंट

विधायक सहित जनप्रतिनिधियों ने माफ कीजिए साहब हम नहीं कर सकते यह अधुरी योजना का लोकार्पण कहकर किया था पेयजल लोकार्पण का बहिष्कार

मल्टी अर्बन कम्पनी के ठेकेदार ने मेंटेनेंस के पैसे लेने के चक्कर मे कर दी आधी अधूरी योजना चालू जिसका खामियाजा भुगत रही सुसनेर की जनता

सुसनेर। वर्ष 2050 तक सुसनेर को पेयजल संकट से मुक्ति दिलाने और 24 घंटे शुद्ध पेयजल प्रदाय करने के लिए 17 जून 2017 से नागपुर की मल्टी अर्बन कंपनी की ओर से नगर में शुरू हुई ₹25 करोड़ 35 लाख की पेयजल योजना का भोपाल से प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने विभागीय अधिकारियों के गुमराह करने के कारण आधी अधूरी योजना का लोकार्पण कर मेंटेनेंस के पैसे पाने की जल्दी में ठेकेदार ने शुरुआत तो कर दी थी। किंतु योजना के लोकार्पण के समय ही सुसनेर में स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने योजना की शुरुआत में ही विसंगति वह इसका क्रियान्वयन सही तरीके से नहीं किए जाने को लेकर योजना का लोकार्पण करने से मना कर दिया था। उस समय अतिथि के रूप में मौजूद क्षेत्र के तत्कालीन विधायक राणा विक्रमसिंह, पूर्व विधायक बद्रीलाल सोनी, पूर्व नगर परिषद अध्यक्ष चतुर्भुजदास भूतड़ा, लोकतंत्र सेनानी संघ जिला उपाध्यक्ष गोवर्धन शुक्ला, भाजपा नेता मांगीलाल सोनी, भाजपा महिला मोर्चा मण्डल अध्यक्ष आशा विष्णु भावसार सहित अन्य जनप्रतिनिधियों ने पीआईयू प्रोजेक्ट मैनेजर संतोष श्रीवास्तव सहित मल्टी अर्बन कंपनी के अधिकारियों को यह कहते हुए कहा की माफ कीजिए साहब हम नहीं कर सकते आपकी इस अधुरी पेयजल योजना का लोकार्पण हम इस कार्यक्रम का बहिष्कार करते हैं। जब तक योजना का कार्य सही तरीके से नगर में नहीं होगा तथा लोगों को पानी नहीं मिलेगा तब तक हमें यह योजना स्वीकृति नहीं है। जनप्रतिनिधियों ने योजना की विसंगतियों को लेकर कई बार समाचार पत्रों में समाचार प्रकाशित होने की खबर का हवाला कंपनी के अधिकारी को दिया था। इसके बाद जनप्रतिनिधि कार्यक्रम स्थल से रवाना हो गए। बता दें कि 25 वर्षों से सुसनेर नगर में पेयजल संकट झेल रहे नगर वासियों के लिए प्रदेश सरकार के द्वारा वर्ष 2017 में पेयजल योजना स्वीकृत की गई थी इसके तहत 24 घंटे पानी दिया जाना था। किंतु योजना के लोकार्पण हो जाने के इतने महीनों बाद भी 2,3 दिन में आज भी एक बार पेयजल सप्लाई किया जा रहा है। पेयजल का वर्ष 2019 में पूरा होना था किंतु 2024 तक इसका कार्य पूर्ण नहीं हो पाया है। एवं 25 करोड़ से अधिक की राशि खर्च होने के बावजूद आज भी प्यासे है सुसनेर वासी।

सुसनेर। मई में जहां सूरज आग उगल रहा है वहीं भूजलस्तर लगातार लुढ़कता जा रहा है। ट्यूबवेल और हैंडपंपों ने दम तोड़ दिया है। लोग पानी की मशक्कत में जुटे हुए हैं। ऐसे में नगर परिषद के द्वारा नलजल योजना के माध्यम से दो दिनों में एक बार 35 मिनट पानी वह भी कम प्रेशर से सप्लाई किया जा रहा है। नवीन पेयजल योजना से पानी की सप्लाई शुरू होने के बाद दावा तो 24 घंटे पानी की सप्लाई का था, किंतु वर्तमान में 2,3 दिनों में एक बार पेयजल की सप्लाई हो रही हैं। वह भी पर्याप्त मात्रा में नहीं हो पा रही हैं। इसके चलते गर्मी में लोगों को पेयजल संकट झेलना पड़ रहा हैं। निजी संपवेल में न पानी खत्म होने के बाद पीने के पाने के के लिए दूर-दूर भटकना पड़ रहा हैं। 17 जून 2017 से मल्टी अर्बन कंपनी द्वारा नगर में 25 करोड़ की लागत से न पेयजल पाइप लाइन डालने का कार्य को कर रही हैं, किंतु कंपनी अभी तक २ पर्याप्त मात्रा में पानी की सप्लाई नहीं इं कर पा रही है। नगरीय क्षेत्र में ऐसे र अलग-अलग क्षेत्र के 350 से 400 घर ऐसे हैं जहां पर पेयजल को लेकर अभी तक कोई योजना नहीं बनाई है। यहां की एक दो किलोमीटर दूरी पर महिलाएं और युवतियां सुबह शाम हैंडपंप और और टैंकरों टैंकरों पर एक घड़ा पानी भरने को लाइन लगा रही हैं। उनके साथ में छोटे बच्चे भी धूप में तप रहे हैं। तब कहीं जाकर परिवार को पानी मिल रहा है। निजी टैंकरों के माध्यम से प्रतिदिन 200 से 300 रुपए खर्च कर पानी खरीद रहे हैं।
वर्तमान में योजना के ये है हालात —-
मल्टी अर्बन कंपनी के द्वारा नगर में क्रियान्वित की जा रही पेयजल योजना में वर्तमान में 2 से 3 दिनों में पेयजल सप्लाई किया जा रहा है। योजना के तहत नगर के अधिकांश क्षेत्र में पानी नहीं पहुंच रहा है जिससे लोगों को जल संकट का सामना करना पड़ रहा है। योजना का संचालन 10 सालों तक कंपनी को करना है किंतु नगर परिषद के कर्मचारी पेयजल सप्लाई कर रहे हैं। हालात यह है कि नगर के कई हिस्से ऐसे हैं जहां पर अभी तक पाइप लाइन ही नहीं डाली गई है।
चित्र : सुसनेर में पेयजल योजना का फिल्टर प्लांट सिर्फ बच्चो के देखने का बनकर रह गया शोपीस, नही बुझ रही नगरवासियों की प्यास।

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