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महराजगंज ,क्या है जो परमात्मा नहीं जानता है?रमेश दासजी महराज

सत्यार्थ वेब न्यूज

शिवरतन कुमार गुप्ता “राज़”

Mon.9670089541

महराजगंज 26/05/2024

महराजगंज ,क्या है जो परमात्मा नहीं जानता है?रमेश दासजी महराज

www. Satyarath.com ऐसा क्या है जो परमपिता परमात्मा को नहीं मालूम है?, ओ तो घट – घट का वासी है,उसे तो सब कुछ मालूम है।फर्क है प्यारे!तो बस हमारे – आपके नजरिए की।आप हजार,लाख,करोड़ चोरी कर लो,और ए जानो की कोई देखा नहीं तो ए आपके – हमारे स्वविचार हैं,आदमी नहीं देखा जरूर सत्य है,परंतु प्यारे!जो अदृश्य है न परमपिता परमात्मा,मेरा श्री कृष्ण ओ तो बंद आंखों से भी सब कुछ देखता है।

उक्त विचार संझाई मंदिर गोरखपुर के महंत रमेश दासजी महराज के हैं। जो खुटहा बाजार (भिखमटोला) में चल रहे श्री कृष्ण ब्रह्मज्ञान महायज्ञ के पांचवें दिन को बोलते हुए कहा।

श्री रमेश दासजी महराज ने श्रोताओं को अपनी वाणी से मंत्रमुग्ध करते हुए कहा कि,प्यारे आप ऐसा जानते हो की मैं जो कुछ भी कर रहा हूं उसको कोई नहीं देख पा रहा है।यह तुम्हारी सोंच मिथ्या (गलत) है।

जिस दिन तुम्हारी अंतरात्मा की आंखें खुल जाएंगी तुम स्वतः जान जाओगे की परमात्मा तो सब कुछ देख रहा है,सुन रहा है।

..और यह सब संभव होगा तो भगवान की भक्ति से, संतों की सानिध्य से,भगवान के प्रेम में डूब जाओ।प्यारे!नदी में तैरना नहीं आता है और जब नदी में स्नान करने जाओगे तो निश्चित ही डूब जाओगे।लेकिन परमपिता परमात्मा एक ऐसा सागर है की, उसमें जब – जब डूबोगे,जितनी बार डूबोगे कुछ ना कुछ प्राप्त करके ही लौटोगे।

द्वापर युग में भगवान श्री कृष्ण जब गाय (गैय्या) को चराते थे (बाल्यावस्था में) तो क्या था,गोपियों के घर से माखन चोरी कर के अपने भी ग्रहण करते और अपने साथी ग्वालबालों को भी ग्रहण कराते थे।जबकि गोपियां अपनी दही,छाछ और मक्खन को हर संभव छिपा कर रखती थीं।फिर भी मेरा कान्हा…
अब सोचो की कान्हा कितनी सहजता से दही,छाछ या माखन चुराते थे कि गोपियों को बर्तनों की खनखनाहट तक नहीं सुनाई देती,इतना ही नहीं उनको घर में किसी के आने की आहट तक नहीं मिल पाती…
ओ तो जब बर्तन उठातीं तब पता चलता की माखन की चोरी हो गई।और मैय्या चोरी कोई छोटा चोर नहीं,बड़ा चोर नहीं अरे कोई बहुत बड़ा चोर भी नहीं चोरी किया,तो आखिर चोरी किसने किया…?तो चोरी कान्हा ने किया ।मुकदमा कहां चलेगा?जब वही चोर है,वही वकील है,वही न्यायालय है और वही तो सब कुछ है।प्यारे!गोपियां तो जान बूझ कर कान्हा को चोरी करने के लिए आमंत्रित करती थीं,क्योंकि गोपियों और कान्हा के बीच आत्मीय प्रेम था।एक दूसरे को बार – बार देख पाने की चाहत थी।गोपियों के घर से दही,माखन और छाछ की चोरी सबने जाना,सुना है लेकिन क्या कभी आप सबने जाना – सुना की गोपियों के घर में दही, छाछ और माखन की कमी हो गई…?नहीं न क्यों की जिस घर में परमात्मा खुद चोरी करेगा तो उस घर में कमी कैसे होगी।और जब कमी हो जाएगी तब परमात्मा चोरी कैसे करेगा?प्यारे!बस बात इतनी सी है कि भगवान से स्नेह कर लो,परमात्मा को अपना दोस्त बना लो,भाई बना लो,पिता बना लो, जो चाहो ओ बना लो जैसा चाहो वैसा बना लो, ओ तो सब कुछ बन कर तुम्हारा कल्याण करने के लिए तत्पर तैयार है।

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