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भदोही- रासायनिक उर्वरकों को इस्तेमाल से बंजरा हुई धरती

संवाददाता प्रवीण चौबे

 रासायनिक उर्वरकों को इस्तेमाल से बंजरा हुई धरती

 

ज्ञानपुर। मिट्टी की गुणवत्ता को सुधारने को लेकर तमाम प्रयास धरातल पर फेल हो जा रहे हैं। जैविक एवं देशी विधि की खेती के बाद भी मिट्टी में जीवांश कार्बन की मात्रा नहीं बढ़ रही है। नमूनों में उपजाऊ मिट्टी के लिए जरूरी जीवांश कार्बन की मात्रा 0.8 होनी चाहिए जो 0.1 से 0.2 तक ही आ रही है। इसी तरह मिट्टी में मुख्य पोषक तत्व नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटास का अनुपात 4.2.1 का होना चाहिए जो 8.3.1 है। जो आधे से भी कम है। स्थिति यह है कि 2853 हेक्टेयर भूमि अब तक उसर हो चुकी है। यदि इसे संतुलित करने के ठोस प्रयास नहीं हुए तो यह आंकड़ा बढ़ने में देर नहीं लगेगी। केंद्र सरकार ने मिट्टी की सेहत के प्रति किसानों को जागरूक बनाने के मकसद से मृदा हेल्थ कार्ड स्कीम चलाई है। जिसमें अलग-अलग क्षेत्र की मिट्टी की जांच की जाती है। जिससे मिट्टी में पाए जाने वाले 16 पोषक तत्वों की मात्रा और उसे बढ़ाने की तरकीब भी बताई जाती है। मानव शरीर की तरह मिट्टी में भी पोषक तत्वों की काफी जरूरत होती है। उनकी कमी से फसलों में तमाम प्रकार की बीमारी होने के साथ ही पैदावार भी प्रभावित होती है। दिसंबर 2019 तक मिट्टी की जांच के बाद एक लाख 60 हजार किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड का वितरण किया गया। 2020 में कोविड के कारण तीन साल मिट्टी की जांच नहीं हो सकी। 2023 में 12 मॉडल गांव में मिट्टी के पोषक तत्व की जांच की गई। तीन हजार नमूनों में करीब ढाई हजार में पोषकतत्व की कमी मिली। कृषि विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो मिट्टी की सेहत बेहतर करने के लिए पांच हजार हेक्टेयर में जैविक खेती एवं 10 हजार में मोटे अनाज की खेती की जा रही है, हालांकि पहले से प्रभावित रकबे में सुधार नहीं हो पा रहा है। अब तक 2853 हेक्टेयर खेती ऊसर हो चुकी है। जिस पर फसलों की बुआई नहीं हो पाती है। क्या बोले विशेषज्ञ
कृषि विज्ञान केंद्र बेजवां के विशेषज्ञ डॉ. आरपी चौधरी ने बताया कि अधिक उत्पादन की लालसा में जैविक उर्वरकों (गोबर की खाद, हरी खाद) के उपयोग की अनदेखी व रसायनिक उर्वरकों का अंधाधुंध प्रयोग से उपजाऊ मिट्टी में जीवांश कार्बन की मात्रा घटती जा रही है। किसानों को चाहिए कि हरी खाद, गोबर की खाद का प्रयोग अधिक करें।

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इनसेट

मिट्टी के लिए जरूरी पोषक तत्व

मुख्य पोषक तत्व : नाइट्रोजन, फास्फोरस व पोटास।

द्वितीय पोषक तत्व : सल्फर।
सूक्ष्म पोषक तत्व : जिक, लोहा, मैगनीज, तांबा, बोरान।
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उप निदेशक कृषि डॉ. अश्वनी सिंह ने कहा कि मिट्टी की उपजाऊ क्षमता को बढ़ाए रखने के लिए जरूरी जीवांश कार्बन की मात्रा को जैविक व गोबर की सड़ी खाद का अधिकाधिक प्रयोग जरूरी है। किसान गोबर की सड़ी खाद, सनई, ढैंचा से तैयार हरी खाद का अधिकाधिक प्रयोग करें। बताया कि इसके साथ ऊर्द, मूंद आदि की खेती के दौरान पौधों को जड़ से उखाड़ने के बजाय फलियां तोड़कर पौधों की खेत में ही जोताई करा देने से उर्वरा शक्ति में वृद्धि होगी।

संवाददाता प्रवीण चौबे
भदोही

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