अंकुर कुमार पांडेय
रिपोर्ट सत्यार्थ न्यूज
वाराणसी
ग़ाज़ीपुर राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के तहत सादात ब्लॉक की सफलता राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) – समाचार


उत्तर प्रदेश- गाजीपुर
- चिह्नित बच्चे: 6 वर्षीय प्रज्ञा (जन्मजात क्लब फुट) और 5 वर्षीय वीर सिंह (कटा होठ और तालू)।
- इलाज: जिला अस्पताल गाजीपुर और हेरिटेज अस्पताल वाराणसी में सफल और मुफ्त ऑपरेशन।
- प्रभारी चिकित्साधिकारी का संदेश: शून्य से 18 वर्ष तक के बच्चों का बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के अंतर्गत सादात ब्लॉक में स्वास्थ्य विभाग की टीम को एक बड़ी सफलता मिली है। प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. पंकज सिंह के पर्यवेक्षण में डॉक्टरों की टीम ने क्षेत्र भ्रमण के दौरान जन्मजात गंभीर बीमारियों से ग्रसित दो बच्चों की पहचान की। सरकारी मदद से दोनों बच्चों की सफल सर्जरी कराई गई है, जिससे उन्हें नया जीवन मिला है।
सादात क्षेत्र में निरीक्षण के दौरान चिकित्सकों और स्वास्थ्य कर्मियों की एक विशेष टीम ने इन दो मासूम बच्चों को चिह्नित किया था। इस सजग टीम में डॉ. प्रियंका यादव, डॉ. आनंद पाण्डेय, डॉ. एस.पी. राय, डॉ. कृतिका चौबे और फार्मासिस्ट खुशी साहू शामिल थीं।
इन बीमारियों से पीड़ित थे मासूम:
1. प्रज्ञा (6 वर्ष): सादात के ग्राम सरसौली निवासी रानी देवी की पुत्री, जो जन्मजात ‘क्लब फुट’ (टेढ़े पैर) की समस्या से पीड़ित थी।
2. वीर सिंह (5 माह): सादात निवासी विजय सिंह कुशवाहा और रानी कुशवाहा का पुत्र, जो जन्म से ‘क्लेफ्ट लिप एंड पैलेट’ (कटा होठ और तालू) की गंभीर बीमारी से ग्रसित था।
मुफ्त इलाज के बाद लौटी मुस्कान:
चिह्नित किए जाने के बाद आरबीएसके टीम की देखरेख में दोनों बच्चों को उच्च स्तरीय इलाज के लिए भेजा गया। वीर सिंह और प्रज्ञा का जिला अस्पताल गाजीपुर और हेरिटेज अस्पताल वाराणसी में सफलतापूर्वक ऑपरेशन किया गया। सफल सर्जरी के बाद बच्चों के चेहरे पर मुस्कान लौट आई है। परिजनों ने डॉक्टरों और सरकार की इस जनकल्याणकारी योजना के प्रति गहरा आभार व्यक्त किया है।
पैसे के अभाव में नहीं रुकेगा इलाज: प्रभारी चिकित्साधिकारी
प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. पंकज सिंह ने बताया कि राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य शून्य से 18 वर्ष तक के बच्चों में जन्मजात दोषों, बीमारियों और विकास में देरी (डेवलपमेंट डिले) की समय पर पहचान करना है। इसके तहत बच्चों का मुफ्त इलाज सुनिश्चित किया जाता है, ताकि कोई भी बच्चा पैसे के अभाव में चिकित्सा से वंचित न रहे।












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