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राजस्थान दिवस चैत्र शुक्ल प्रतिपदा 19 मार्च, 2026 को मनाया जाएगा।

राजस्थान दिवस चैत्र शुक्ल प्रतिपदा 19 मार्च, 2026 को मनाया जाएगा।

संवाददाता:-
हर्षल रावल
16 मार्च, 2026
सिरोही/राज.


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सिरोही। राजस्थान एक मात्र प्रदेश हैं, जो भारतीय नववर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को अपना राजस्थान दिवस मनाता हैं। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा, 30 मार्च 1949 को राजस्थान का गठन हुआ था, जिसे पहले “राजपूताना” कहा जाता था।
19 मार्च 2026 को राजस्थान अपना स्थापना दिवस मनाने जा रहा है, राजस्थान इस मुख्य दिवस को हिंदू पंचांग की तिथि चैत्र शुल्क प्रतिपदा को मनाएंगा।
राजस्थान की स्थापना हिन्दू पंचांग के अनुसार संवत् २००६ चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को शुभ मुहूर्त देखकर हुई थी! उस दिन ग्रेगोरियन कैलेण्डर में तिथि 30 मार्च 1949 थी, बाद में हिन्दू कैलेण्डर की तिथि चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को भुला दिया गया और 30 मार्च को ही स्थापना मनाया जानें लगा!

चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को क्यों मनाया जाना चाहिए राजस्थान दिवस:-
गौरतलब है कि स्वतंत्रता से पूर्व यह प्रदेश राजपूताना नाम से जाना जाता था, स्वतंत्रता के पश्चात 19 रियासतों व कुछ ठिकानों को एकजुट करके एक प्रदेश के रूप में स्थापित करने की योजना बनाई गई तथा प्रदेश को राजस्थान नाम दिया गया। राजस्थान का एकीकरण सात चरणों में संपन्न हुआ था, एकीकरण के चौथे चरण में संयुक्त राजस्थान व जयपुर, जोधपुर, बीकानेर व जैसलमेर रियासतो को मिलाकर वृहद राजस्थान का निर्माण किया गया।
सनातन नववर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा (30 मार्च,1949) को सरदार वल्लभ भाई पटेल ने जयपुर में एक समारोह में वृहद् राजस्थान का उद्घाटन किया था। इसलिए प्रतिवर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा सनातन नववर्ष को प्रदेशभर में बड़ी धूमधाम से राजस्थान स्थापना दिवस मनाया जाता है।
स्वामी विवेकानंद ने अपने एक भाषण में कहा था ‘यदि हमें गौरव से जीने की भावना जागृत करनी है और यदि हम अपने हृदय में देशभक्ति के बीच बीज बोना चाहते हैं तो हमें हिंदू राष्ट्रीय पंचांग की तिथियों का आश्रय लेना होगा। जो कोई भी विदेशियों की तिथियों पर निर्भर रहता है, वह गुलाम बन जाता है और आत्म सम्मान खो देता है।’ स्वामी विवेकानंद की यह उद्घोषणा भारतीय संस्कृति और कालगणना के महत्त्व को रेखांकित करता है।
लेकिन साथ ही भारत के नीति निर्माताओं को भी मार्गदर्शन देता है कि उन्हें राष्ट्र और समाज के उत्थान और उसके आत्मविश्वास को सुदृढ़ करने के लिए क्या करना चाहिए।

सरदार वल्लभ भाई पटेल का ऐतिहासिक भाषण:-
चैत्र शुक्ल प्रतिपदा, 30 मार्च 1949 को संयुक्त राजस्थान के उद्घाटन के अवसर पर तत्कालीन गृहमंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल ने भी अपने भाषण में इस बात का उल्लेख किया था। अपने महत्वपूर्ण भाषण में तब उन्होंने कहा था, ‘राजपूताना में आज नए वर्ष का प्रारंभ है। यहां आज के दिवस वर्ष बदलता है। शक बदलता है। यह नया वर्ष है। तो आज के दिन हमें नए महा-राजस्थान के महत्व को पूर्ण रीति से समझ लेना चाहिए। आज अपना हृदय शुद्ध कर ईश्वर से हमें प्रार्थना करनी चाहिए कि वह हमें राजस्थान के लिए योग्य राजस्थानी बनाये। राजस्थान को उठाने के लिए, राजपूतानी प्रजा की सेवा के लिए, ईश्वर हमको शक्ति और बुद्धि दे। आज इस शुभ दिन हमें ईश्वर का आशीर्वाद मांगना है। मैं आशा करता हूं कि आप सब मेरे साथ राजस्थान की सेवा की इस प्रतिज्ञा में, इस प्रार्थना में, सम्मिलित होंगे। जय हिंद!’

Opinion: राजस्थान दिवस वर्ष प्रतिपदा पर मनाने का निर्णय सांस्कृतिक विरासत को स्थापित करने वाला कदम
Rajasthan Diwas 2025 : राजस्थान सरकार ने राजस्थान स्थापना दिवस को मौजूदा ग्रेगोरियन तिथि 30 मार्च की बजाय हिन्दू पंचांग की चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को मनाने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है। यह कदम राजस्थान की सांस्कृतिक पहचान और गौरवशाली परंपराओं को पुनर्स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना गया है।

जयपुर : स्वामी विवेकानंद ने अपने एक भाषण में कहा था ‘यदि हमें गौरव से जीने की भावना जागृत करनी है और यदि हम अपने हृदय में देशभक्ति के बीच बीज बोना चाहते हैं तो हमें हिंदू राष्ट्रीय पंचांग की तिथियों का आश्रय लेना होगा। जो कोई भी विदेशियों की तिथियों पर निर्भर रहता है वह गुलाम बन जाता है और आत्म सम्मान खो देता है।’ स्वामी विवेकानंद की यह उद्घोषणा भारतीय संस्कृति और काल गणना के महत्त्व को रेखांकित करता है। लेकिन साथ ही भारत के नीति निर्माताओं को भी मार्गदर्शन देता है कि उन्हें राष्ट्र और समाज के उत्थान और उसके आत्मविश्वास को सुदृढ़ करने के लिए क्या करना चाहिए।

राजस्थान दिवस पर सरकार का ऐतिहासिक निर्णय

हाल ही में राजस्थान सरकार ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लेकर राजस्थान राजस्थान का स्थापना दिवस भारतीय तिथि के अनुसार चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को मनाने की घोषणा की है। विधानसभा के पटल पर मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा का ये निर्णय भारत की सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने की ओर महत्वपूर्ण कदम है। निश्चित तौर पर इससे राजस्थान दिवस समारोह राजस्थान की आम जनता का उत्सव बन सकेगा।

संघ की प्रेरणा और वर्षों पुरानी मांग

गौरतलब है कि संघ की प्रेरणा से 1992 में भारतीय नववर्ष मनाने के लिए गठित नववर्ष समारोह समिति गत 24 वर्षों से राजस्थान सरकार से लगातार मांग कर रही थी कि राजस्थान स्थापना दिवस 30 मार्च को नहीं मनाया जाकर वर्ष प्रतिपदा नव संवत्सर पर मनाया जाए। इसके पीछे उनका तर्क है कि राजस्थान की स्थापना हिन्दू पंचांग के अनुसार इसी दिन शुभ मुहूर्त देखकर हुई थी। उस दिन 30 मार्च थी। बाद में वर्ष प्रतिपदा को भुला दिया गया और 30 मार्च को स्थापना दिवस मनाया जाने लगा।

सरदार वल्लभ भाई पटेल का ऐतिहासिक भाषण

30 मार्च 1949 को संयुक्त राजस्थान के उद्घाटन के अवसर पर तत्कालीन गृहमंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल ने भी अपने भाषण में इस बात का उल्लेख किया था। अपने महत्वपूर्ण भाषण में तब उन्होंने कहा था, ‘राजपूताना में आज नए वर्ष का प्रारंभ है। यहां आज के दिवस वर्ष बदलता है। शक बदलता है। यह नया वर्ष है। तो आज के दिन हमें नए महा-राजस्थान के महत्व को पूर्ण रीति से समझ लेना चाहिए। आज अपना हृदय साफ कर ईश्वर से हमें प्रार्थना करनी चाहिए कि वह हमें राजस्थान के लिए योग्य राजस्थानी बनाये। राजस्थान को उठाने के लिए, राजपूतानी प्रजा की सेवा के लिए, ईश्वर हमको शक्ति और बुद्धि दे। आज इस शुभ दिन हमें ईश्वर का आशीर्वाद मांगना है। मैं आशा करता हूं कि आप सब मेरे साथ राजस्थान की सेवा की इस प्रतिज्ञा में, इस प्रार्थना में, सम्मिलित होंगे। जय हिंद!’

भारतीय नववर्ष और प्रकृति का सामंजस्य

बल्लभ भाई पटेल के भाषण की बातें राजस्थान का स्थापना दिवस समारोह वर्ष प्रतिपदा जैसे शुभ अवसर पर आयोजित करने के लिए पर्याप्त है। भारतीय नववर्ष महज़ एक तिथि बदलना नहीं है। यह वह अवसर होता है जब प्रकृति पूरी तरह सजधज कर दुल्हन का सा स्वरूप धारण करती है। वसंत ऋतु की शुरुआत होती है, जब पेड़-पौधों में नए पत्ते और फूल खिलते हैं। वातावरण में उत्साह का संचार होता है। इसका खगोलीय महत्व है, जिसका विस्तार से वर्णन भारतीय शास्त्रीय परंपरा में है ।

वर्ष प्रतिपदा का खगोलीय और ऐतिहासिक महत्व

वर्ष प्रतिपदा एक खगोलीय गणना है, जो ब्रह्मांडीय घटनाओं से जुड़ा हुआ है। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को पृथ्वी सूर्य के चारों ओर एक पूर्ण चक्र पूरा करती है। इस दिन दिन-रात बराबर होते हैं, जो संतुलन और नए जीवन का प्रतीक है। इसके अतिरिक्त भारत में अनेक ऐतिहासिक घटनाएं हैं जो इस दिन से जुड़ी है, जो सामाजिक और राष्ट्रीय जीवन को प्रेरणा देती है। राजा विक्रमादित्य ने इसी दिन विक्रम संवत की स्थापना की थी। भगवान श्रीराम का राज्याभिषेक भी इसी दिन हुआ था। यह सिखों के दूसरे गुरु श्री अंगद देव जी का जन्मदिन भी है। स्वामी दयानन्द सरस्वती ने इसी दिन आर्य समाज की स्थापना की थी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक डॉक्टर केशवराव बलिराम हेडगेवार का जन्म भी इसी दिन हुआ था।

राजस्थान का एकीकरण और ऐतिहासिक संदर्भ:-
राजस्थान के इतिहास की बात करें, तो इसे पूर्व में राजपूताना के नाम से जाना जाता था। तब यहां अनेक रियासतें थीं, जिन्हें मिलाकर यह राज्य बना। राजस्थान का एकीकरण 7 चरणों में पूरा हुआ। इसका आरंभ 18 अप्रैल 1948 को अलवर, भरतपुर, धौलपुर और करौली रियासतों के विलय से हुई। विभिन्न चरणों में रियासतें जुड़ती गईं तथा अन्त में 1949 में वर्ष प्रतिपदा (30 मार्च) के दिन जोधपुर, जयपुर, जैसलमेर और बीकानेर रियासतों के विलय से ‘वृहत्तर राजस्थान संघ’ बना। इसे ही राजस्थान स्थापना दिवस कहा जाता है। इसमें सरदार वल्लभभाई पटेल की सक्रिय भूमिका थी। वे सरकार की विलय योजना के अंतर्गत विभिन्न रियासतों को भारतीय संघ में सम्मिलित करने का कार्य कर रहे थे।

पुनश्च: जन्म कुंडली और विवाह जैसे महत्वपूर्ण संस्कार हम ग्रह-नक्षत्रों की दिशा पर आधारित तिथियों के अनुसार तय करते हैं, लेकिन अपनी सुविधा के लिए उनकी वर्षगांठ के लिये ग्रेगोरियन कैलेंडर पर निर्भर हो जाते हैं।

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