मंडी निरीक्षक-गेटकर्मी गठजोड़ टूटते ही फल सब्जी टैक्स की आय बढ़ी

तीन-तीन बार निलंबित प्रभारी विकास नारायण मिश्रा वसूली से मुक्त, मगर तीन -पांच जारी
कटनी। मीडिया में व्यापक पैमाने पर फल-सब्जी मंडी टैक्स की रोजाना चोरी पर समाचार फैलते ही जिला प्रशासन ने कुछ सुधार के निर्णय लिए, जिसमें सबसे अहम निर्णय मंडी शुल्क प्रभारी विकास नारायण मिश्रा से वसूली प्रभार छीनना रहा और गेट पास कर्मियों को हर वाहन पर शुल्क चुकाने के बाद मंडी परिसर में प्रवेश देने के नियम का सख्ती से पालन कराना प्रमुख था। तीन-तीन बार अनियमितता अनुशासनहीनता पर सस्पेंड किए जा चुके पूर्व वसूली प्रभारी विकास नारायण मिश्रा एक बार फिर अपनी राजनैतिक पहुंच का उपयोग करते हुए कलेक्टर और मंडी सचिव को मजबूर करने पर उतारू हैं, ताकि उन्हें इस बार फिर से वसूली प्रभारी बनाया जाए तो गर्मी में आने वाली फलों की विपुल खेप पर टैक्स चोरी करके मंडी को हर माह कई लाखों की चपत लगा सकें।
तीन दिन पहले कृषि उपज मंडी सचिव केके नरगावे ने फल-सब्जी वालों (ट्रकों) का मंडी शुल्क चैक पोस्ट (गेट) पर जमा करवाने का आदेश दिया है। आवक गेट प्रभारी संतोष तिवारी, राजेश मोहन तिवारी, रघुवीर सिंह, कुशराम और सीताराम मार्को (सभी मंडी सहायक उप. निरीक्षक) को नोटिस दिया है कि शिकायतकर्ता मंगलजीत सिंह भट्टी एवं अन्य माध्यमों से फल सब्जी की मंडी शुल्क में चोरी करने और आढ़त-कटौती के संबंध में लगातार शिकायतें आ रही हैं। इसलिए शुल्क अपवंचन की रोकथाम हेतु मंडी प्रांगण में आने वाले ट्रकों का प्रवेश गेट पर ही प्रचलित दरों से इलेक्ट्रानिक तौल कांटा पर्ची के वजन के अनुसार मंडी शुल्क जमा करें व किसानों से किसी प्रकार की अनावश्यक कटौत्री न होने देवें। इस अनियमितता को शत-प्रतिशत रोका जाए। इसी सर्कुलर के साथ उप सहायक इंस्पेक्टर पूर्व फल सब्जी मंडी प्रभारी विकास नारायण मिश्रा की मनमानी के राज पर अंकुश लगाया गया।
विवादित एएसआई मिश्रा के कार्यकाल में प्राइवेट सब्जी फल मंडी वालों ने करोड़ों के शुल्क घोटाले कर डाले और मंडी की आय लगभग शून्य रही उस समय 2022 में भी अवैध वसूली व मिलीभगत पर गंभीर सवाल उठे थे। विधायक संदीप जायसवाल के पास भी एक व्यापारी की शिकायत पहुंची थी, जिस पर विधायक ने सख्त कार्यवाही की अनुशंसा की थी। जांच के चलते विकास नारायण मिश्रा फिर सस्पेंड हुए थे मगर भाजपा के भृष्ट नगरीय प्रशासन मंत्रालय से सेटिंग के कारण मिश्रा को क्लीन चिट के साथ पुन: वसूली प्रभार मिला और फिर चार पांच साल तक मंडी शुल्क अपवंचन की गति बेहद तीव्र चलती रही।
वजन में हेरफेर, बिना दस्तावेज प्रवेश और अवैध वसूली की शिकायत थी
कटनी कृषि उपज मंडी में मंडी शुल्क की चोरी और अवैध वसूली के आरोप की शिकायतें किसान व्यापारी ने देते हुए बताया था कि प्रवेश द्वार पर तैनात कर्मी बाहरी राज्यों से आने वाले सब्जी-फल से लदे ट्रकों का वास्तविक वजन कम दर्ज कर रहे हैं, जिससे प्रति ट्रक लगभग 5 टन तक की हेराफेरी हो रही है। कई मामलों में कांटा पर्ची और बिल्टी की जांच भी नहीं की जा रही। सूत्रों के अनुसार गेट पास कर्मी, गार्ड और जांच जिम्मेदारों की मिलीभगत से यह खेल चल रहा है, जहां आढ़तियों से बाद में कमीशन लिया जाता है। मंडी शुल्क वसूली के लिए बनाई गई टीम के कुछ सदस्यों पर सुबह के समय ही बड़े पैमाने पर अनियमित वसूली करने के आरोप हैं। अनिल तिवारी और गौतम नामक कर्मियों पर आढ़तियों से साठगांठ के आरोप लगाए जा रहे थे। मंडी सचिव की ढुलमुल भूमिका भी सवालों के घेरे में बताई जा रही है।
सीसीटीवी कैमरा दुरस्त हो
मंडी में रोजाना सब्जी, फल और अनाज से लदे ट्रकों व छोटे वाहनों की बड़ी संख्या आती है, लेकिन निगरानी के लिए लगाया गया सीसीटीवी कैमरा खराब बताया जा रहा है। प्रवेश शुल्क की पर्ची पांच रुपए की होने के बावजूद 10 से 20 रुपए तक वसूली के आरोप भी लगे हैं। इससे सरकारी राजस्व की चोरी और किसानों के शोषण की आशंका गहरा गई। मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग उठ रही है, ताकि मंडी व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके।
















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