आस्था की डोर, विश्वास की चाल – पांढुरना से शिर्डी तक साईं भिक्षा झोली पालकी पदयात्रा का भावुक समापन
संवाददाता धनंजय जोशी
जिला पांढुरना मध्य प्रदेश

21 दिन, 650 किलोमीटर, 100 श्रद्धालु और साईं बाबा पर अटूट विश्वास
पांढुरना – जब आस्था कदमों को दिशा दे और विश्वास हर थकान को हर ले, तब यात्रा केवल दूरी नहीं रहती, वह साधना बन जाती है। नूतन वर्ष 1 जनवरी 2026 को पांढुरना स्थित साईं मंदिर (टेकड़ी) से आरंभ हुई साईं भिक्षा झोली पालकी पदयात्रा इसी साधना का जीवंत उदाहरण बनी। 21 दिनों की कठिन, लेकिन भक्तिमय पदयात्रा के बाद आज 21 जनवरी को यह पवित्र यात्रा शिर्डी धाम पहुंचकर साईं बाबा के समाधि स्थल पर भावुक क्षणों के साथ संपन्न हुई।
करीब 650 किलोमीटर की लंबी दूरी तय करते हुए 100 पदयात्री जब साईं बाबा के चरण पादुका के दर्शन हेतु मंदिर प्रांगण में पहुंचे, तो आंखें नम थीं और मन कृतज्ञता से भरा हुआ। आरती के दौरान ऐसा प्रतीत हुआ मानो स्वयं साईं बाबा अपने भक्तों की तपस्या स्वीकार कर रहे हों।

भजन, सेवा और त्याग से सजी यात्रा
पूरी यात्रा के दौरान पदयात्रियों ने भजन-कीर्तन, साईं नाम स्मरण और सेवा को ही अपना संबल बनाया। तपती धूप, ठंडी रातें, थकान और पीड़ा—सब कुछ साईं बाबा के नाम पर समर्पित रहा। हर कदम पर “सबका मालिक एक” का संदेश जीवंत होता चला गया।
शोभायात्रा में उमड़ी भावनाओं की लहर
शिर्डी पहुंचने पर साईं भिक्षा झोली पालकी की भव्य शोभायात्रा निकाली गई। सैकड़ों साईं भक्तों ने इसमें शामिल होकर अपने श्रद्धा-सुमन अर्पित किए। ढोल-नगाड़ों और “साईं राम” के जयघोष के बीच वातावरण पूरी तरह भक्तिरस में डूब गया। कई श्रद्धालु भावुक होकर बाबा के चरणों में नतमस्तक हो गए।

17 वर्षों की परंपरा, विश्वास का अविराम प्रवाह
यह पदयात्रा विगत 17 वर्षों से निरंतर साईं बाबा की कृपा से आयोजित की जा रही है। यह केवल एक यात्रा नहीं, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही आस्था, अनुशासन और सेवा की परंपरा बन चुकी है। हर वर्ष यह यात्रा साईं भक्तों को जोड़ती है, जाति, वर्ग और भेदभाव से ऊपर उठाकर एक सूत्र में पिरो देती है।
पदयात्रा समिति और भक्तों का समर्पण
इस पावन अवसर पर साईं भिक्षा झोली पदयात्रा समिति अध्यक्ष श्री रोशन (गोलु) तहकीत,
साईं मंदिर (टेकड़ी) संस्थान अध्यक्ष श्री उज्वल सिंह चौहान (अज्जू भैय्या),
श्री हर्षद कोल्हे,
श्री तुकाराम जी बालपांडे

सहित बड़ी संख्या में साईं भक्त उपस्थित रहे। सभी ने पदयात्रियों के धैर्य, अनुशासन और भक्ति को नमन करते हुए इसे समाज के लिए प्रेरणास्रोत बताया।
एक यात्रा नहीं, आत्मा की पुकार
श्रद्धालुओं का कहना है कि यह पदयात्रा शरीर की परीक्षा नहीं, बल्कि आत्मा की पुकार है—जहां हर कदम साईं बाबा के चरणों की ओर बढ़ता है और हर सांस उनके नाम से जुड़ जाती है। यह यात्रा एकता, सौहार्द और मानवता का ऐसा संदेश देती है, जिसकी आज समाज को सबसे अधिक आवश्यकता है।
साईं बाबा की कृपा से यह पदयात्रा अनंत श्रद्धा, विश्वास और प्रेम की मिसाल बनकर सदैव स्मरणीय रहेगी।















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