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चौथ माता मेला-धार्मिक आस्था, लोक संस्कृति, सामाजिक समरसता और प्रशासनिक अनुशासन का अनुपम उदाहरण

खंडार रिपोर्टर भगवान शर्मा जिला सवाईमाधोपुर राजस्थान

चौथ माता मेला-धार्मिक आस्था, लोक संस्कृति, सामाजिक समरसता और प्रशासनिक अनुशासन का अनुपम उदाहरण

सत्यार्थ न्यूज़: सवाई माधोपुर जिले के चौथ का बरवाड़ा में हर वर्ष माघ महीने में आयोजित होने वाला चौथ माता मेला न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि यह लोक-संस्कृति और सामाजिक समरसता का अनुपम उदाहरण है। वर्ष 2026 में यह पावन आयोजन 5 से 8 जनवरी तक श्रद्धा और भव्यता के साथ सम्पन्न हुआ, जिसमें प्रदेश ही नहीं, बल्कि देश के विभिन्न कोनों से आए लाखों श्रद्धालुओं ने चौथ माता के दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित किया। इस दौरान दर्शनार्थियों, आयोजकों और स्थानीय लोगों ने प्रशासनिक अनुशासन की बेहतरीन मिसाल पेश की।
इस वर्ष मेले में लगभग 5 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने एक सप्ताह तक संपूर्ण क्षेत्र को चौथ माता के जयकारों से गुंजायमान रखा। क्षेत्र में कड़ाके की सर्दी और शीतलहर के बावजूद आस्था का उत्साह कम नहीं हुआ। डीजे-बाजों तथा भजनों की मधुर धुनों पर झूमते श्रद्धालु लगातार माता के दरबार की ओर बढ़ते और लौटते रहे। रात के समय भी दर्शन की अविरल श्रृंखला जारी रही, जो श्रद्धालुओं की अटूट भक्ति का जीवंत प्रमाण थी। मेले में झूले, चकरी सहित अन्य मनोरंजन के साधन श्रद्धालुओं के आर्कषण का केन्द्र रहे। वर्ष 2026 में चौथ माता मेले को सुव्यवस्थित, सुरक्षित और श्रद्धालु-अनुकूल बनाने के लिए जिला प्रशासन, मंदिर ट्रस्ट और स्थानीय ग्रामीणों के बीच अनुकरणीय समन्वय देखने को मिला। श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए यातायात प्रबंधन, पेयजल व्यवस्था, विद्युत आपूर्ति, स्वास्थ्य सेवाएं, स्वच्छता एवं कानून व्यवस्था के व्यापक और प्रभावी इंतजाम किए गए। प्रशासनिक सजगता और सहभागिता के चलते संपूर्ण मेला क्षेत्र में अनुशासन और सुव्यवस्था का वातावरण बना रहा।जिला कलक्टर कानाराम ने इस वर्ष चौथ माता के दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में वृद्धि की संभावना के दृष्टिगत सुरक्षा, यातायात, पेयजल, विद्युत, स्वास्थ्य एवं स्वच्छता व्यवस्थाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए सभी विभागों से आपसी समन्वय से कार्य करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ’स्वच्छ मेला’ ही स्वस्थ और प्रसन्न श्रद्धालुओं की पहचान है। मेले के दौरान 24 घण्टे विशेष स्वच्छता व्यवस्था सुनिश्चित करने, मंदिर परिसर एवं मेला मार्गों पर नियमित सफाई, प्लास्टिक कैरी बैग पर पूर्ण प्रतिबंध तथा कपड़े, जूट एवं कागज के थैलों के उपयोग के निर्देश दिए गए। मेला मार्गो पर पर्याप्त मात्रा में डस्टबिन लगाए गए तथा श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए अतिरिक्त चल शौचालय, ठंड से बचाव के लिए रैन बसेरों में रजाई-गद्दों की व्यवस्था और प्रमुख मार्गों पर विशेष पार्किंग व्यवस्था की गई। शुद्ध पेयजल आपूर्ति के लिए टैंकर, टंकियां और वॉशबेसिन उपलब्ध कराए गए। संपूर्ण मेला परिसर में सीसीटीवी कैमरे लगाकर कंट्रोल रूम से निगरानी रखने, यातायात नियंत्रण हेतु अटल पथ एवं आपात स्थिति में मंदिर परिसर से श्रद्वालुओं को नीचे तक लाने के लिए वैकल्पिक मार्ग चिन्हित किए गए। यात्रियों की सुविधा हेतु मेला नक्शा तैयार कर सार्वजनिक स्थलों पर लगाया गया और तथा कंट्रोल रूम के दूरभाष नंबर जगह-जगह प्रचारित किए गए। प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सहायता के लिए स्काउट, एनसीसी स्वयंसेवक, अग्निशमन वाहन, अग्निशमन यंत्र, मेडिकल टीमें एवं एम्बुलेंस भी तैनात की। साथ ही, चौथ का बरवाड़ा क्षेत्र के चिकित्सालयों में पर्याप्त मेडिकल स्टाफ, दवाइयों एवं एम्बुलेंस की व्यवस्था के लिए राउण्ड द क्लॉक ड्यूटी लगाई गई। श्रद्धालुओं की सहायता के लिए संपूर्ण मेले का नक्शा तैयार कर प्रमुख सार्वजनिक स्थलों पर लगाया गया। मार्गदर्शन एवं सहायता हेतु स्काउट एवं एनसीसी स्वयंसेवकों की तैनाती की गई। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए अग्निशमन वाहन, अग्निशमन यंत्र, तीन मेडिकल टीमें एवं एम्बुलेंस चौबीसों घंटे तैनात रहीं। पूरे मेला क्षेत्र, मेला मार्गों एवं मंदिर परिसर को 6 सेक्टर में बांटकर सुरक्षा की पुख्ता व्यवस्था की गई। इस कार्य में लगभग 1,200 पुलिस, आरएसी एवं होमगार्ड जवान तैनात रहे। शांति एवं कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए सामान्य वर्दी में भी महिला एवं पुरुष पुलिसकर्मियों ने 24 घंटे निगरानी की। सवाई माधोपुर में अगस्त 2025 में भी विश्वस्तरीय त्रिनेत्र गणेश लक्खी मेले का सफल आयोजन हुआ। भगवान गणेश के भक्त श्रद्धालुओं, आम लोगों, मेला समिति सहित विभिन्न प्रशासनिक अधिकारियों और विभिन्न संगठनों के कार्यकर्ताओं ने मेले की सभी गतिविधियों को सफल बनाने में सक्रिय सहयोग किया। लगातार भारी बरसात की चुनौतीपूर्ण स्थिति के बावजूद लाखों श्रद्धालुओं ने अनुशासित रहकर भक्ति-भाव से मेले में भागीदारी की तथा सभी व्यवस्थाएं नियंत्रित और अनुशासित रहीं। गणेश चतुर्थी को बुधवार के अनूठे संयोग के कारण न तो लोगों के उत्साह में कमी रही और न ही प्रशासनिक स्तर पर कोई ढिलाई नजर आई। स्थानीय लोगों के अनुसार, जिले में लगातार इन दो बड़े आयोजनों में सुचारू व्यवस्थाओं, बड़ी संख्या में दर्शनार्थियों की भागीदारी और सभी हितधारकों के बेहतर आपसी समन्वय ने यह दर्शाया कि सवाई माधोपुर जिला प्रदेश और देश की लोक सांस्कृतिक पहचान के प्रति बेहद गंभीर है। साथ ही, यह आयोजन प्रशासनिक दक्षता और जनसहभागिता के भी प्रेरक मॉडल हैं।

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