रासेयो स्वयंसेवकों का आवाज और यूनिसेफ द्वारा बाल संरक्षण पर एक दिवसीय जिला स्तरीय प्रशिक्षण सम्पन्न

🔳कटनी – बाल संरक्षण आज की बड़ी चुनौती है, इससे जूझने के लिए जरूरी है कि हम सजग हों और अपने आसपास को समझें। शिक्षा केवल अक्षर ज्ञान होने से नहीं आती बल्कि अपने समाज को गहरे से समझना और फिर वापस समाज को देना भी इसका अनिवार्य अंग है। नेतृत्व सपने देखने और दिखाने के अवसर देता है। हम भीड़ में एक चेहरा बन सकें इस बात का सुअवसर रासेयो आपको प्रदान करता है। बच्चों से जुड़े क़ानून को समझना आज बहुत जरुरी है। बाल संरक्षण जैसी बड़ी चुनौती के लिये युवाओं को आगे आना होगा। यह बात कटनी जिले के अग्रणी महाविद्यालय शासकीय तिलक स्नातकोत्तर महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. सुनील कुमार बाजपेई ने आवाज और यूनिसेफ द्वारा रासेयो कार्यक्रम समन्वयक डॉ. शोभाराम मेहरा जी के मार्गदर्शन में कटनी जिले के रासेयो स्वयंसेवकों के बाल संरक्षण विषय पर आयोजित एक दिवसीय प्रशिक्षण के शुभारंभ अवसर पर व्यक्त किये।
इस मौके पर संस्था के प्रशासनिक अधिकारी डॉ. जी. एम. मुस्तफा ने कहा कि यदि इस तरह से हम समाज के बच्चों को लेकर जागरूक हो जायेंगे तो फिर वह दिन दूर नहीं जबकि हर बच्चा सुरक्षित और संरक्षित महसूस करे।
इस कार्यशाला में भोपाल की संस्था आवाज के निदेशक और मुख्य प्रशिक्षक प्रशांत दुबे ने बताया कि मध्यप्रदेश बच्चों से जुड़े मामलों में ज्यादा संवेदनशील है। उन्होंने कहा कि बच्चों पर होने वाले अपराध में मध्यप्रदेश दूसरे पायदान पर है। जबकि बच्चों द्वारा किये जाने वाले अपराधों में मध्यप्रदेश पहले पायदान पर है। मध्यप्रदेश से रोजाना 32 बच्चे गायब होते हैं, जिनमें से 24 लडकियां हैं और 9 बच्चे फिर कभी वापस नहीं मिलते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि किस तरह से ट्रेफिकर्स गिरोह सक्रिय होकर बच्चों को गायब कर देते हैं। बच्चों के लैंगिक शोषण के मामले भी बहुत ज्यादा हैं। देश में हर दूसरा बच्चा लैंगिक शोषण का शिकार है। मध्यप्रदेश बाल विवाह को लेकर उन 5 राज्यों में शामिल है जहां कि बाल विवाह बहुत हैं। श्री दुबे ने इस प्रशिक्षण में प्रतिभागियों को बाल अधिकार और लैंगिक हिंसा से बच्चों पर पड़ने वाले प्रभाव की भी विस्तार से जानकारी दी।
कार्यशाला के दूसरे सत्र में आवाज के समन्वयक रुपेश वर्मा ने कहा कि भारत में 53 फीसदी बच्चों के साथ लैंगिक शोषण की घटनाएं घटित होती हैं। इनमें से भी लड़कों के साथ लैंगिक शोषण ज्यादा है। इस स्थिति से निबटने के लिए भारत देश में अब पाक्सो कानून है। वहीं तीसरे सत्र में उन्होंने जिले में मौजूद व्यवस्थाओं (सभी तरह के गृहों) और बाल कल्याण समिति तथा जेजे एक्ट के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने बाल संरक्षण क्लब तथा आग़ाज़ इंटर्नशिप के बारे में भी जानकारी दी।
इस अवसर पर रासेयो जिला समन्वयक डॉ. रुकमणी प्रताप सिंह ने कहा कि “यूथ एज चैम्पियन फॉर चाइल्ड राइट्स कार्यक्रम” के बारे में बताया कि बाल अधिकारों पर काम करने वाली संस्था आवाज, यूनिसेफ और रासेयो द्वारा संयुक्त रूप से बाल संरक्षण के लिए एक विशेष कार्यक्रम चलाया जा रहा है। यह कार्यक्रम मध्यप्रदेश के सभी सात विश्वविद्यालय परिक्षेत्र अंतर्गत समस्त 55 जिलों में संचालित किया जा रहा है। यह कार्यक्रम युवा स्वयंसेवकों को जागरूक करते हुए उनके माध्यम से जनसामान्य को जागरूक करने की यह अनूठी परियोजना है। कार्यक्रम में तिलक महाविद्यालय की महिला ईकाई कार्यक्रम अधिकारी डॉ. माधुरी गर्ग ने सभी का आभार मानते हुए कहा कि यह हमारा सौभाग्य है कि कटनी में इस तरह का राज्य स्तरीय प्रशिक्षण संपन्न हुआ है|
इस प्रशिक्षण कार्यशाला में कटनी जिले के 50 स्वयंसेवकों तथा 13 कार्यक्रम अधिकारियों का प्रशिक्षण किया गया| कार्यशाला के अंत में सभी को प्रमाण पत्र वितरित किये गये।
















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