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जनजातीय गौरव दिवस पर सावरगांव से रायबासा तक जनजातीय संस्कृति की झलक

जनजातीय गौरव दिवस पर सावरगांव से रायबासा तक जनजातीय संस्कृति की झलक

लेज़िम नृत्य, बांस शिल्प प्रदर्शनी और बिरसा मुंडा पर आधारित नाटक से सजी श्रृंखला

ब्यूरो चीफ धनंजय जोशी
जिला पांढुरना मध्य प्रदेश

पांढुर्णा – मध्यप्रदेश शासन जनजातीय कार्य विभाग मंत्रालय भोपाल के निर्देशानुसार जनजातीय स्वतंत्रता सेनानियों को सम्मानित करने, स्वतंत्रता संग्राम और सांस्कृतिक विरासत में उनके योगदान को याद करने तथा जनजातीय क्षेत्रों के सामाजिक-आर्थिक विकास को पुनर्जीवित करने के उद्देश्य से 15 नवम्बर को धरती आबा भगवान बिरसा मुण्डा की जयंती को वर्ष 2021 से जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मनाया जा रहा है।
वर्ष 2025 की दिनांक 15 नवम्बर 2025 को भगवान बिरसा मुण्डा की 150वीं जयंती के समापन के अवसर पर 01 नवम्बर 2025 से 15 नवम्बर 2025 तक भव्य कार्यक्रमों का आयोजन करते हुए पांचवें जनजातीय गौरव दिवस को सम्मानपूर्वक मनाया जाना है।
इसी क्रम में भगवान बिरसा मुण्डा की 150वीं जयंती के समापन अवसर पर 01 नवम्बर से 15 नवम्बर 2025 तक जिलेभर में विविध कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है।


जनजाति_गौरव_दिवस के अंतर्गत आज जनजातीय संस्कृति और परंपराओं को समर्पित विविध कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।

प्रदेश जनजातीय कार्य विभाग के निर्देशानुसार तथा कलेक्टर श्री नीरज कुमार वशिष्ठ के मार्गदर्शन में जिले भर में कार्यक्रमों का आयोजन जारी है।

शासकीय हाई स्कूल सावरगांव में छात्राओं द्वारा पारंपरिक लेज़िम नृत्य का मनमोहक प्रदर्शन किया गया। इस विशेष नृत्य कार्यक्रम में छात्राओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। रंग-बिरंगे पारंपरिक परिधानों में सुसज्जित छात्राओं ने तालबद्ध आंदोलनों के साथ जनजातीय नृत्य शैली की खूबसूरती को मंच पर जीवंत कर दिया।

इसी के साथ जूनियर बालक छात्रावास रायबासा में “जनजाति गौरव पखवाड़ा” के अंतर्गत बांस शिल्प कलाओं का प्रदर्शन किया गया। इस प्रदर्शनी में जनजातीय विद्यार्थियों ने बांस से निर्मित विभिन्न कलात्मक वस्तुओं का प्रदर्शन किया, जो पारंपरिक शिल्पकला की उत्कृष्ट मिसाल रहे।

इसी क्रम में, जनजातीय सीनियर बालक छात्रावास पांढुर्णा में एक विशेष नाट्य प्रस्तुति का आयोजन किया गया। इस नाटक में बिरसा मुंडा के जीवन की महत्वपूर्ण घटनाओं, उनके संघर्ष, त्याग और बलिदान को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया। विद्यार्थियों ने इस नाटक के माध्यम से जनजातीय समाज के गौरवशाली इतिहास और स्वतंत्रता संग्राम में बिरसा मुंडा के योगदान को उजागर किया।

इन सभी आयोजनों का उद्देश्य जनजातीय समुदाय की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं का संरक्षण, प्रसार और नई पीढ़ी में गर्व की भावना का संचार करना रहा।

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