सफलता की कहानी– लाख पति दीदी विद्या प्रधान : आत्मनिर्भरता की प्रेरक मिसाल

सूरज यादव, गौरेला पेंड्रा मरवाही| 14 सितंबर 2025/ एक साधारण गृहिणी ने असाधारण हौसलों के साथ अपने जीवन की दिशा बदल दी। हम बात कर रहे हैं जीपीएम जिले के पेंड्रा ब्लॉक के छोटे से गांव भाड़ी की रहने वाली विद्या प्रधान की, जिन्होंने सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश की है।
संघर्षों से सफलता तक का सफर: विद्या प्रधान का जीवन पहले घर तक सीमित था। मन में कुछ कर गुजरने की तमन्ना तो थी, लेकिन आर्थिक स्थिति कमजोर थी और संसाधन भी नहीं थे। उनके पास था तो बस एक हुनर– सिलाई-कढ़ाई का। पर इसी हुनर को उन्होंने अपनी ताकत बनाया। शुरुआत में यह सपना अधूरा सा लगता था, लेकिन उन्होंने गांव की ‘जय मां संतोषी महिला स्व-सहायता समूह’ से जुड़कर अपने सपनों को एक नई उड़ान दी। समूह से जुड़ने के बाद विद्या ने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के माध्यम से लोन लिया और अपने काम को विस्तार देना शुरू किया। उन्होंने नई सिलाई मशीनें खरीदीं और अपनी खुद की कपड़ों की दुकान शुरू कर दी। सिर्फ इतना ही नहीं, वह अन्य महिलाओं को टेलरिंग का प्रशिक्षण भी देने लगीं, जिससे गांव की कई महिलाएं भी आत्मनिर्भर बन रही हैं। इसके अलावा, उन्होंने सेंट्रिंग प्लेट का कार्य भी शुरू किया, जिससे उनकी आमदनी के और रास्ते खुल गए।
आज विद्या प्रधान की मासिक आय 10 से 15 हजार रुपए तक पहुँच चुकी है और वे लखपति दीदी बनकर न केवल अपने परिवार को आर्थिक संबल प्रदान कर रही हैं, बल्कि गांव की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा स्रोत बन गई हैं। विद्या की यह कहानी हमें सिखाती है कि अगर इरादे मजबूत हों, तो कोई भी कठिनाई रास्ता नहीं रोक सकती। उन्होंने न केवल खुद को सशक्त बनाया, बल्कि दूसरों को भी आत्मनिर्भर बनने की राह दिखाई। ब्लाक मिशन प्रबंधक सुश्री मंदाकिनी कोसरिया ने बताया कि महिलाए बिहान स्वसहायता समूह से जुड़कर आत्मनिर्भर की ओर बढ़ रही है और अपने पैरों पर खड़ी हो रही है।


















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