मध्य प्रदेश में ‘वोट चोरी’ का सनसनीखेज आरोप: कांग्रेस नेता उमंग सिंघार ने चुनाव आयोग और भाजपा पर साधा निशाना

भोपाल, (मध्य प्रदेश ब्यूरो) 19 अगस्त 2025: मध्य प्रदेश विधानसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस विधायक उमंग सिंघार ने आज एक प्रेस वार्ता में सनसनीखेज आरोप लगाते हुए कहा कि 2023 के विधानसभा चुनावों में बड़े पैमाने पर ‘वोट चोरी’ हुई है। सिंघार ने दावा किया कि चुनावी वर्ष में राज्य में 34 लाख से अधिक नाम मतदाता सूची में जोड़े गए, जिसमें अंतिम दो महीनों में प्रतिदिन औसतन 26 हजार नाम शामिल किए गए, कुल मिलाकर 16 लाख वोट जोड़े गए। उन्होंने चुनाव आयोग पर भाजपा के साथ मिलीभगत का आरोप लगाया और कहा कि अंतिम मतदाता सूची जारी होने के बाद भी 15-16 लाख नामों को बिना सूचना दिए जोड़ा गया, जिससे लोकतंत्र की नींव हिल गई है।

सिंघार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में विस्तार से बताया कि 2018 के चुनावों में भाजपा को कांग्रेस से महज 1 प्रतिशत अधिक वोट मिले थे, लेकिन 2023 में यह अंतर बढ़कर 8-9 प्रतिशत हो गया। उन्होंने इसे सीधे-सीधे ‘वोट चोरी’ का नतीजा करार दिया और कहा कि राज्य में लगभग 8-9 प्रतिशत वोटों की हेराफेरी हुई है। विपक्षी नेता ने विशेष रूप से उन 35 सीटों का जिक्र किया जहां कांग्रेस की हार का अंतर बहुत कम था, लेकिन उन सीटों पर जोड़े गए नए वोटों की संख्या हार के अंतर से कहीं अधिक थी। “यह संयोग नहीं, सुनियोजित साजिश है,” सिंघार ने कहा। उन्होंने जनता से अपील की कि वे इस मुद्दे पर जागरूक हों और लोकतंत्र की रक्षा के लिए आवाज उठाएं।
चुनावी पृष्ठभूमि और आरोपों का आधार

2023 के मध्य प्रदेश विधानसभा चुनावों में भाजपा ने 163 सीटें जीतकर सत्ता बरकरार रखी, जबकि कांग्रेस को महज 66 सीटों से संतोष करना पड़ा। कांग्रेस का दावा है कि कई सीटों पर अनियमितताएं हुईं, खासकर उन 27 सीटों पर जहां पार्टी मामूली अंतर से हारी। सिंघार ने कहा कि मतदाता सूची में अचानक नाम जोड़ने की प्रक्रिया पारदर्शी नहीं थी और चुनाव आयोग ने इसकी कोई सार्वजनिक जानकारी नहीं दी। “मतदाता सूची लोकतंत्र की रीढ़ है, लेकिन आयोग इसे साझा करने से इनकार क्यों कर रहा है?” उन्होंने पूछा। कांग्रेस ने इस मुद्दे पर राजनीतिक मामलों की समिति की बैठक भी बुलाई और ‘वोट चोरी’ के खिलाफ राज्यव्यापी जागरूकता अभियान शुरू करने की घोषणा की है, जिसमें रैलियां और जनसंपर्क शामिल होंगे।
सिंघार के आरोपों को कांग्रेस के राष्ट्रीय नेता राहुल गांधी के हालिया बयानों से भी बल मिला है, जिन्होंने लोकसभा में चुनाव आयोग पर ‘चुनाव चोरी’ का आरोप लगाया था। गांधी ने महाराष्ट्र और अन्य राज्यों में भी इसी तरह की अनियमितताओं का जिक्र किया, जहां मतदाता सूची में अचानक वृद्धि देखी गई। मध्य प्रदेश कांग्रेस प्रमुख जीतू पटवारी ने भी इस मुद्दे पर समर्थन जताया और कहा कि पार्टी सभी तथ्यों के साथ जनता के सामने आएगी।
भाजपा का जवाब: आरोपों को किया खारिज

भाजपा ने इन आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए खारिज कर दिया। भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने कहा, “उमंग सिंघार एक सम्मानित नेता हैं, लेकिन वे भी राहुल गांधी के राजनीतिक जाल में फंस गए हैं। लोकतंत्र में वोट चोरी जैसी कोई चीज नहीं होती।” शर्मा ने कांग्रेस पर हार का ठीकरा चुनाव आयोग पर फोड़ने का आरोप लगाया और कहा कि मतदाता सूची में नाम जोड़ना एक सामान्य प्रक्रिया है, जो सभी पार्टियों की जानकारी में होती है। भाजपा ने कांग्रेस से सबूत मांगे और कहा कि ऐसे आरोपों से सिर्फ राजनीतिक अस्थिरता फैलती है।
व्यापक संदर्भ और संभावित प्रभाव
यह विवाद मध्य प्रदेश की राजनीति में नया मोड़ ला सकता है, जहां कांग्रेस पहले से ही आंतरिक कलह से जूझ रही है। उमंग सिंघार, जो गांधवानी से चार बार के विधायक हैं और पूर्व वन मंत्री रह चुके हैं, आदिवासी समुदाय के प्रमुख नेता माने जाते हैं। उनके आरोपों से कांग्रेस को कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा मिल सकती है, लेकिन भाजपा इसे विपक्ष की हताशा करार दे रही है। चुनाव आयोग ने अभी तक इन आरोपों पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है, लेकिन कांग्रेस ने मांग की है कि मतदाता सूची की डिजिटल कॉपी और बूथ स्तर के सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध कराए जाएं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुद्दा आगामी लोकसभा चुनावों को प्रभावित कर सकता है, जहां विपक्ष चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठा रहा है। कांग्रेस ने राज्य में रैलियां आयोजित करने की योजना बनाई है ताकि ‘वोट चोरी’ के बारे में जनता को जागरूक किया जा सके। इस बीच, भाजपा सरकार ने विकास कार्यों पर फोकस करने की बात कही है।

















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