खनिज व वन विभाग की लापरवाही से गोदावरी पॉवर एण्ड इस्पात पर नियम उल्लंघन के गंभीर आरोप
शिवसेना प्रदेश महासचिव चंद्रमौली मिश्रा ने उठाए 16 बिंदुओं पर सवाल, निष्पक्ष जांच व कार्यवाही की मांग
विशेष संवाददाता पुनीत मरकाम भानुप्रतापपुर कांकेर भानुप्रतापपुर।

खनिज विभाग एवं वन विभाग की शह पर रायपुर की कंपनी *मेसर्स गोदावरी पॉवर एण्ड इस्पात प्रा. लि.* पर नियमों को दरकिनार कर मनमानी तरीके से लौह अयस्क खनन करने के गंभीर आरोप लगे हैं। शिवसेना प्रदेश महासचिव *चंद्रमौली मिश्रा* ने पत्रकार वार्ता में कंपनी की अनियमितताओं को उजागर करते हुए *16 बिंदुओं में विस्तृत आपत्तियां* दर्ज कीं और निष्पक्ष जांच व कड़ी कार्यवाही की मांग की।
उन्होंने कहा कि कंपनी को कांकेर जिले के ग्राम कच्चे आरी डोंगरी कक्ष क्रमांक 608 (पुराना 139) के कुल *138.96 हेक्टेयर* क्षेत्र में खनन की लीज़ मिली थी। लेकिन कंपनी ने लीज की शर्तों का पालन न करते हुए बड़े पैमाने पर *अवैध वृक्ष कटाई, सेफ्टी जोन में छेड़छाड़, नाला विलुप्त करना, अवैध सड़क निर्माण, नियम विरुद्ध खनन व रात्रिकालीन परिवहन* जैसे कार्य किए हैं।
मिश्रा द्वारा उठाए गए 16 गंभीर बिंदु
1. *अवैध वृक्ष कटाई* – 32.360 हे. क्षेत्र में 11,765 वृक्ष चिन्हांकित हुए थे। 6070 वृक्ष काटे गए और 5695 वृक्ष शेष थे। जांच में पाया गया कि इनमें से *4983 वृक्ष मौके पर मौजूद ही नहीं हैं*। यानी कंपनी ने बिना अनुमति के अवैध कटाई कर दी।
2. *दोनों खनन क्षेत्रों का समायोजन नहीं* – 106.96 हे. और 32.360 हे. क्षेत्र को जोड़कर माइनिंग प्लान नहीं बनाया गया और न ही केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय से अनुमति ली गई।
3. *सेफ्टी जोन में छेड़छाड़* – कंपनी ने दक्षिण-पश्चिम दिशा के पिल्हरों के बीच सेफ्टी जोन को तोड़कर राजस्व क्षेत्र में बदल दिया।
4. *पूर्व दिशा का सेफ्टी जोन बदला* – कई पिल्हरों के बीच बनाए गए सेफ्टी जोन को बदलकर नए स्थान पर पौधारोपण कर दिया गया, जिसकी अनुमति नहीं ली गई।
5. *पौधारोपण में धांधली* – वर्ष 2010 से लगाए गए पौधे रिकॉर्ड में जीवित दिखाए गए, जबकि मौके पर अधिकांश पौधे मृत मिले।
6. *प्रथम स्वीकृति क्षेत्र (106.96 हे.) में उल्लंघन* – पिल्हर K से L, L से A और A से B तक के सेफ्टी जोन को हटा दिया गया।
7. *द्वितीय स्वीकृति क्षेत्र (32.36 हे.) में उल्लंघन* – पिल्हर D से A और A से B तक का सेफ्टी जोन हटाया गया।
8. *अनधिकृत मार्गों से लौह अयस्क की निकासी* – बिना अनुमति कंपनी ने अलग-अलग रास्तों से खनिज का परिवहन किया।
9. *डीजीपीएस कॉर्डिनेट व फेंसिंग का पालन नहीं* – खनन क्षेत्र में आवश्यक फेंसिंग नहीं की गई।
10. *बेंच पद्धति का पालन नहीं* – स्वीकृत पद्धति से खनन न कर नियम विरुद्ध तरीके से उत्खनन।
11. *वेस्ट मटेरियल पर गैराज निर्माण* – खनन नियमों के विपरीत कार्य किया गया।
12. *वनमार्ग का अवैध रूपांतरण* – कंपनी ने 1-1.5 किमी. फोरलेन सड़क बना दी, जो पूरी तरह अवैध है।
13. *प्राकृतिक नाला विलुप्त* – उत्खनन क्षेत्र का 12 मासी नाला पूरी तरह खत्म कर दिया गया।
14. *सरफेस प्लान का पालन नहीं* – स्वीकृत सरफेस प्लान से हटकर निर्माण कार्य।
15. *खनन प्लान में उल्लंघन* – जिला कलेक्टर से अनुमति लेकर 50 फीट कांक्रीट दीवार निर्माण कराया गया, जबकि यह माइनिंग प्लान में शामिल नहीं है।
16. *वृक्षों को नुकसान व अवैध कटाई* – वेस्ट मटेरियल ढहने से वृक्ष नष्ट हुए, जिन्हें कंपनी ने हटाकर रिकॉर्ड से गायब कर दिया।
17. *रात्रिकालीन परिवहन व टीपी जारी* – कानून के विपरीत कंपनी द्वारा रात में ही ट्रांसपोर्ट परमिट जारी कर खनिज परिवहन।
18. *अनिल लूनिया प्रकरण का अयस्क दबाया गया* – सर्वोच्च न्यायालय द्वारा नीलाम किए गए लौह अयस्क को कंपनी ने रास्ता बनाने में दबा दिया।
विभाग की भूमिका पर भी सवाल
मिश्रा ने कहा कि कंपनी की इतनी बड़ी अनियमितताओं के बावजूद *खनिज व वन विभाग आंख मूंदकर बैठे हैं* और कोई कार्रवाई नहीं कर रहे। उन्होंने इस पूरे मामले की *उच्च स्तरीय जांच* और दोषियों पर *कठोर कार्रवाई* की मांग की।


















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