शीर्षक: उपराष्ट्रपति पद की दौड़ और सियासी समीकरण: क्या है बीजेपी की रणनीति?
लेखक: हरिशंकर पाराशर

नई दिल्ली, 22 जुलाई 2025: उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के स्वास्थ्य कारणों से इस्तीफे ने भारतीय राजनीति में एक नया तूफान खड़ा कर दिया है। उनके इस्तीफे की खबर ने जहां सियासी गलियारों में हलचल मचाई, वहीं अगले उपराष्ट्रपति के नाम को लेकर अटकलों का बाजार गर्म है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि धनखड़ का इस्तीफा अचानक क्यों? क्या यह वाकई स्वास्थ्य कारणों से था, या इसके पीछे कोई गहरी सियासी रणनीति है? और सबसे अहम, क्या बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इस दौड़ में सबसे आगे हैं, जैसा कि कुछ बीजेपी नेताओं ने संकेत दिया है?
धनखड़ के इस्तीफे का रहस्य
जगदीप धनखड़ ने 21 जुलाई 2025 को स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा दे दिया, जिसे राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया। लेकिन सवाल उठता है कि क्या यह इस्तीफा वाकई उनकी सेहत से जुड़ा था, या इसे किसी बड़े सियासी समीकरण का हिस्सा माना जाए? कुछ एक्स पोस्ट्स में दावा किया गया कि धनखड़ का इस्तीफा किसी ‘भयंकर लड़ाई’ या ‘बड़ी बीमारी’ का नतीजा हो सकता है। क्या यह इस्तीफा पहले से तय था, या सत्र शुरू होने के बाद अचानक लिया गया निर्णय? यह सवाल अनुत्तरित है, और बीजेपी का केंद्रीय नेतृत्व इस पर चुप्पी साधे हुए है।
नीतीश कुमार: उपराष्ट्रपति की दौड़ में कितना दम?
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का नाम उपराष्ट्रपति पद के लिए चर्चा में है। बीजेपी विधायक हरिभूषण ठाकुर बचौल ने कहा कि नीतीश की साफ छवि और प्रशासनिक अनुभव उन्हें इस गरिमामय पद के लिए उपयुक्त बनाते हैं। बिहार में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले यह बयान सियासी हलचल पैदा करने वाला है। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि बीजेपी नीतीश को दिल्ली भेजकर बिहार में अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है।
हालांकि, नीतीश की उम्र और स्वास्थ्य को लेकर सवाल उठ रहे हैं। अगर धनखड़ का इस्तीफा स्वास्थ्य के आधार पर हुआ, तो क्या नीतीश, जिनकी सेहत भी चर्चा का विषय रही है, इस पद के लिए उपयुक्त होंगे? इसके अलावा, नीतीश ने खुद उपराष्ट्रपति पद में रुचि न होने की बात कही है। जेडीयू की ओर से भी इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।
बीजेपी अध्यक्ष पद: नड्डा के बाद कौन?
उपराष्ट्रपति के साथ-साथ बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। जे.पी. नड्डा का कार्यकाल मार्च 2025 में समाप्त हो रहा है, और नया अध्यक्ष चुनने की प्रक्रिया में देरी ने कई सवाल खड़े किए हैं। क्या बीजेपी और आरएसएस किसी एक नाम पर सहमति नहीं बना पा रहे? कुछ नाम जैसे शिवराज सिंह चौहान, धर्मेंद्र प्रधान, और केशव प्रसाद मौर्य चर्चा में हैं, लेकिन निश्चितता नहीं है।
सवाल यह भी है कि क्या रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को उपराष्ट्रपति बनाया जा सकता है? कुछ एक्स पोस्ट्स में दावा किया गया कि राजनाथ अगले उपराष्ट्रपति हो सकते हैं। हालांकि, उनके संगठनात्मक अनुभव और वर्तमान भूमिका को देखते हुए यह संभावना कम लगती है। दूसरी ओर, नितिन गडकरी और हरिवंश नारायण सिंह जैसे नाम भी रेस में हैं।
* कांग्रेस से शशि थरूर: एक आश्चर्यजनक दावेदार?
सबसे चौंकाने वाली अटकलें कांग्रेस सांसद शशि थरूर के नाम को लेकर हैं। कुछ पत्रकारों ने दावा किया कि थरूर, जो हाल के वर्षों में मोदी सरकार की कुछ नीतियों की तारीफ कर चुके हैं, उपराष्ट्रपति पद के लिए बीजेपी की पसंद हो सकते हैं। यह कदम कांग्रेस को घेरने की रणनीति का हिस्सा हो सकती है। लेकिन क्या बीजेपी वाकई विपक्ष से किसी को इतना बड़ा पद देगी?
* ‘एक देश, एक चुनाव’ और सियासी समीकरण
‘एक देश, एक चुनाव’ का मुद्दा भी इस चर्चा में शामिल हो गया है। धनखड़ का कार्यकाल पूरा न हो पाना इस अवधारणा पर सवाल उठाता है। अगर नीतीश जैसे कद्दावर नेता को उपराष्ट्रपति बनाया जाता है, तो क्या यह बिहार में बीजेपी की रणनीति का हिस्सा होगा? क्या यह कदम बिहार विधानसभा चुनाव में ओबीसी वोटरों को लुभाने की कोशिश है?
75 की उम्र की बहस और नेतृत्व का संकट
बीजेपी में 75 वर्ष की आयु सीमा की अनौपचारिक नीति भी चर्चा में है। अगर यह नीति लागू होती है, तो कई वरिष्ठ नेता जैसे राजनाथ सिंह और नितिन गडकरी प्रभावित हो सकते हैं। लेकिन मोहन भागवत और नरेंद्र मोदी जैसे नेताओं के लिए यह नियम लागू क्यों नहीं होता? क्या बीजेपी में नेतृत्व का संकट है, जहां कोई भी नया अध्यक्ष बनने को तैयार नहीं?
उपराष्ट्रपति पद की दौड़ और बीजेपी के अध्यक्ष पद को लेकर सियासी गलियारों में अटकलों का दौर जारी है। नीतीश कुमार, राजनाथ सिंह, नितिन गडकरी, या शशि थरूर- कौन इस दौड़ में आगे निकलेगा, यह तो समय बताएगा। लेकिन धनखड़ के इस्तीफे का रहस्य और इसके पीछे की रणनीति अभी भी सवालों के घेरे में है। बीजेपी की रणनीति क्या होगी, और क्या यह बिहार विधानसभा चुनाव को प्रभावित करेगी? यह सवाल भारतीय राजनीति के अगले अध्याय को और रोचक बनाते हैं।

















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