DHR द्वारा स्थापित सरोजिनी नायडू मेडिकल कॉलेज, आगरा के M.R.U. विभाग द्वारा एक दिवसीय वर्कशॉप का आयोजन किया गया,
रिपोर्टर सोनू आगरा

जिसमें 04 जनपदों (आगरा, मथुरा, फ़िरोज़ाबाद,व कन्नौज) के जिला चिकित्सालय, पर कार्यरत सभी फैकल्टी, जूनियर रेजिडेंट, वरिष्ठ रेजिडेंट, लैब तकनीशियन द्वारा प्रतिभाग किया गया
आगरा। DHR द्वारा स्थापित सरोजिनी नायडू मेडिकल कॉलेज, आगरा के M.R.U. विभाग द्वारा दिनांक 07.06.25 को एक दिवसीय वर्कशॉप का आयोजन किया गया, जिसमें 04 जनपदों (आगरा, मथुरा, फ़िरोज़ाबाद,व कन्नौज) के जिला चिकित्सालय, पर कार्यरत सभी फैकल्टी, जूनियर रेजिडेंट, वरिष्ठ रेजिडेंट, लैब तकनीशियन द्वारा प्रतिभाग किया गया। इस वर्कशॉप का शुभारंभ प्रधानाचार्य प्रोफेसर डॉक्टर प्रशांत गुप्ता, डॉ० टी पी सिंह, सह प्रधानाचार्य, डॉ. जी.वी. सिंह मुख्य चिकित्सा अधीक्षक व एम.आर.यू. नोडल अधिकारी डॉ० ब्रिजेश शर्मा द्वारा किया गया। प्रधानाचार्य डॉक्टर प्रशांत गुप्ता जी ने मेडिकल कॉलेज में रिसर्च को और बढ़ावा देने की बात कहीl वर्कशॉप की आयोजन सचिव डॉ० आरती अग्रवाल द्वारा कार्यशाला की उपयोगिता का परिचय प्रस्तुत किया गया । वर्कशॉप का विषय: “Talk on Next-Generation Sequencing (NGS) Platform and Genetic Analyzer: Technologies, Applications, and Innovations” है, जिसका केन्द्रीय उद्देश्य विश्लेषणात्मक समाधान प्रदान करने के लिए है, जो जीनिक विश्लेषण और डायग्नोस्टिक्स के क्षेत्र में मजबूत, स्केलेबल और सटीक तकनीकों की समझ विकसित करेगा। यह संगोष्ठी शोधकर्ता और चिकित्सा विशेषज्ञों दोनों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण रही , जिससे वे नवीनतम तकनीकों का प्रयोग अपने अनुसंधान एवं क्लीनिकल प्रैक्टिस में कर सकेन्गे। कार्यक्रम विवरण: इस अवसर पर दो विशेषज्ञ व्याख्यान आयोजित किए गए: व्याख्यान – “क्लीनिकल और अनुसंधान में नेक्स्ट-जेनरेशन सीक्व्वेसर का भूमिका” वक्ता: डॉ. विकाश कुमार (सीनियर टेक्निकल स्पेशलिस्ट) इसमें NGS तकनीक के क्लीनिकल और शोध के क्षेत्र में उपयोग, इसके लाभ और प्रगति पर चर्चा की गई। व्याख्यान – “क्लीनिकल और अनुसंधान में जीन विश्लेषक” वक्ता: डॉ. दीप्ति (सीनियर एप्लिकेशन मैनेजर)

इस सत्र में जीन विश्लेषक की तकनीक, इसकी कार्यप्रणाली और अन्वेषण में इसकी भूमिका पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
इस आयोजन का उद्देश्य नवीनतम तकनीकों से जागरूकता बढ़ाना और शोध एवं क्लीनिकल डाइग्नोसिस में इन उपकरणों के प्रभावी उपयोग को प्रोत्साहित करना है। यह सम्मेलन जीनिक विश्लेषण में विशेषज्ञता प्राप्त करने वाले शोधकर्ताओं, चिकित्सकों और तकनीशियनों के लिए लाभकारी होगा। Whole Genome Sequencing का फायदा अनेक बीमारियों जैसे कि ट्यूबरक्लोसिस, कैंसर आदि के स्पेसिफिक डायग्नोसिस और स्पेसिफिक दवाइयां से चिकित्सा करने में मदद करेगाl
कार्यक्रम का संचालन डॉ. अखिल प्रताप सिंह और डॉ. नीतू चौहान सह-नोडल अधिकारी द्वारा किया गया। कार्यक्रम में डॉ० रेनू अग्रवाल, डॉ० गीतू, डॉ. दिव्या श्रीवास्तव, डॉ० विकास कुमार, डॉ० प्रज्ञा शाक्य, डॉ० पारुल गर्ग, डॉ. ईना गुप्ता, डॉ० प्रीति भारद्वाज, डॉ दिव्या, अंकिता सोनी, बंटी सिंह चाहर, पुष्पेंद्र यादव, सुमित गर्ग, आदि का महत्वपूर्ण योगदान रहा ।
नेक्स्ट‑जनरेशन सीक्वेंसिंग (NGS) एक उन्नत डीएनए अनुक्रमण तकनीक है जिसमें लाखों डीएनए या आरएनए अणुओं को एक ही समय में तेज़ी से पढ़ा जाता है, जिससे समय और लागत दोनों पर भारी बचत होती हैl NGS की उपयोगिता– कौन‑सी बीमारियों में काम आता है? 1. कैंसर (Cancer) ट्यूमर में उत्परिवर्तित जीन की पहचान कर लक्ष्यित उपचार जैसे कीमोथेरेपी या इम्यूनोथेरेपी को अनुकूलित करने में मदद मिलती हैl लिक्विड बायोप्सी: रक्त में ट्यूमर-डीएनए के निशान की पहचान कर रोग का पता चलता है, इसके बाद उपचार प्रभाव को ट्रैक किया जा सकता हैl 2. दुर्लभ एवं आनुवंशिक बीमारियाँ (Rare & Genetic Diseases) स्पाइनल मस्कुलर अट्रॉफी, सिरबियल फाइब्रोसिस जैसी रोगों में पूर्ण या एक्सॉम अनुक्रमण से जीन दोष की सटीक पहचान संभव होती हैl नवजात शिशुओं में जीनोम सीक्वेंसिंग से जल्दी निदान संभव हो जाता है—इंग्लैंड में 100,000 बच्चों की इस दिशा में शुरुआत हो चुकी हैl 3. संक्रामक रोग (Infectious Diseases) मेटाजिनोमिक NGS से बिना किसी पूर्व अनुमान के वायरल या बैक्टीरियल रोगजनकों की खोज हो सकती है—COVID‑19 के शुरुआती दिनों में SARS‑CoV‑2 इसी तरह पहचाना गया था। एनटीएच सेम्पल (जैसे CSF) का अनुक्रमण से नेमोनिया, मेनिनजाइटिस आदि के अज्ञात कारणों का भी पता चलता है। 4. तंत्रिका रोग (Neurological & Neurodegenerative Diseases) Alzheimer, Parkinson, multiple sclerosis, epilepsy जैसी जटिल बीमारियों में जीन म्यूटेशन और माइक्रोआरएनए प्रोफाइलिंग के ज़रिए निदान और जोखिम पहचान संभव है। 5. स्वचालित प्रतिरोध (Antimicrobial Resistance) नैदानिक मेटाजिनोमिक NGS से रोगजनकों में एंटीबायोटिक प्रतिरोध जीनों की पहचान की जाती है—इससे संक्रमण नियंत्रण हुआ करता है।6. फार्माको–जेनेटिक्स और ड्रग विकास NGS से ज्ञात SNPs और जीन बदलावों का अध्ययन करके डॉक्टर प्रत्येक व्यक्ति के लिए सबसे सुरक्षित और प्रभावी दवाएं चुन सकते हैं। नये ड्रग टार्गेट्स की खोज, बायोमार्कर पहचान, और क्लिनिकल ट्रायल्स में रोगी चयन NGS की मदद से होता है।

















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