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भीलवाड़ा में भारी बारिश सिस्टम की नाकामी से गई जान, राहत-बचाव व्यवस्था पर उठे सवाल

ब्यूरो चीफ मुकेश पाराशर

भीलवाड़ा में भारी बारिश सिस्टम की नाकामी से गई जान, राहत-बचाव व्यवस्था पर उठे सवाल


भीलवाड़ा – जिले में भारी बारिश का दौर लगातार जारी है। नदियों और नालों में उफान आम बात हो गई है, लेकिन हर साल की तरह इस बार भी प्रशासनिक नाकामी और संसाधनों की कमी के चलते लोग अपनी जान गंवा रहे हैं। हाल ही में चौहली (कंकरोलिया घाटी) के पास बनास नदी की पुलिया पर एक व्यक्ति तेज बहाव में बह गया। वह करीब एक घंटे तक बबूल की झाड़ी को पकड़कर मौत से जूझता रहा, लेकिन समय पर राहत-बचाव न होने के कारण उसकी जान चली गई। यह घटना जिले में आपदा प्रबंधन की लचर व्यवस्था और स्थानीय स्तर पर संसाधनों की कमी को उजागर करती है।
प्रशासनिक लंचरता और संसाधनों की कमी

जिले में आपदा प्रबंधन के लिए राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) और राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) की टीमें तैनात हैं, लेकिन ये टीमें जिला मुख्यालय पर ही रहती हैं। किसी भी घटना की सूचना मिलने पर इन्हें जिला मुख्यालय से रवाना होना पड़ता है, जिसके कारण कई घंटों की देरी हो जाती है। इस देरी के चलते कई बार उन लोगों की जान भी चली जाती है, जिन्हें समय पर मदद मिलने पर बचाया जा सकता था।चौहली की हालिया घटना इसका ज्वलंत उदाहरण है।

जनप्रतिनिधियों और प्रशासन की कोशिशें नाकाफी

चौहली घटना के दौरान विधायक गोपाल खंडेलवाल, प्रधान करण सिंह, उप प्रधान कैलाश सुथार, कंकरोलिया घाटी प्रशासक प्रतिनिधि कमलेश जाट, विरधोल के पूर्व सरपंच कालू लाल काछोला, थाना प्रभारी श्रद्धा शर्मा, कोटड़ी के महावीर मीणा, और पारोली के थाना प्रभारी प्रभाती लाल समेत क्षेत्र की जनता ने पीड़ित को बचाने की हरसंभव कोशिश की। विधायक और प्रधान ने जिला प्रशासन को तत्काल मौके पर पहुंचने के निर्देश दिए, लेकिन जिला मुख्यालय से दूरी और अंधेरा होने के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन को रोकना पड़ा। यह घटना सिस्टम की नाकामी का जीता-जागता सबूत है।

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