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हर थैली एक हत्या है: कचरे में दम तोड़ती गौमाता की करुण पुकार”

सत्यार्थ न्यूज़ लाइव
सोयत कला से रिपोर्टर मोहम्मद आलम खान

हर थैली एक हत्या है: कचरे में दम तोड़ती गौमाता की करुण पुकार”

सोयतकलां नगर की गंदगी अब केवल दुर्गंध या दृश्य प्रदूषण नहीं रही, यह निरीह प्राणियों की मौत का कारण बन चुकी है। बीते आठ दिनों में सोयत नगर में दो दर्जन से अधिक गौमाताओं की मौत हो चुकी है। सोमवार को भी दो और गायों ने दम तोड़ दिया—और जब एक मृत गाय का पोस्टमार्टम किया गया, तो उसके पेट से जो निकला, उसने पूरे सिस्टम की संवेदनहीनता की पोल खोल दी।

40 किलो पॉलीथीन: मौत की थैली

डॉ. दीपक मेहरा, नगर पशु चिकित्सालय के प्रभारी, ने बताया कि मृत गाय के पेट से लगभग 40 किलो पॉलीथीन निकली। यह केवल आंकड़ा नहीं, यह हर उस थैली की गवाही है जो हमने कभी सब्ज़ियों के छिलकों में बांधकर सड़क पर फेंकी थी।


“यह सामान्य नहीं है,” डॉ. मेहरा कहते हैं, “यह सीधे तौर पर नगर की लचर सफाई व्यवस्था का परिणाम है।”
“हर डस्टबिन एक जीवनरक्षक बन सकता है”

सड़कों, गलियों और नुक्कड़ों पर बिखरा कचरा—खासकर पॉलीथीन में लिपटी खाद्य सामग्री—गायों को अपनी ओर आकर्षित करती है। भूख से व्याकुल गायें जब इन्हें निगलती हैं, तो वह ज़हर बनकर उनके शरीर में उतर जाता है। धीरे-धीरे उनका पाचन तंत्र क्षतिग्रस्त होता है और फिर दर्दनाक मृत्यु उनका अंत बनती है।

समस्या की जड़ स्पष्ट है: नगर की साफ-सफाई में गंभीर चूक।

जगह-जगह कचरे के ढेर

पॉलीथीन से सनी खाद्य वस्तुएँ

डस्टबिन का अभाव

और सबसे गंभीर, ट्रैचिंग ग्राउंड की असुरक्षित स्थिति
ट्रैचिंग ग्राउंड या मृत्यु का द्वार?

सोयत-पिडवा मार्ग पर स्थित ट्रैचिंग ग्राउंड नगर परिषद द्वारा कचरा फेंकने के लिए बनाया गया था, परंतु आज यह जगह गौहत्या का अघोषित अड्डा बन चुकी है।

मुख्य गेट तो बंद रहता है, परंतु ट्रैक्टर आदि के प्रवेश के लिए जो अस्थायी द्वार हमेशा खुला रहता है, वही मौत का रास्ता बन गया है। भूखी गायें इस रास्ते से अंदर जाती हैं और पॉलीथीन, सड़ा खाना और विषैले पदार्थ खाकर वापस नहीं लौटतीं।

यह केवल असावधानी नहीं, एक क्रूर अनदेखी है।
एक और खतरा: केड़ा जिसमें रेबीज जैसे लक्षण

इसी दौरान नगर में एक काले रंग का आक्रामक केड़ा भी मिला, जिसमें रेबीज जैसी आशंका जताई गई। अत्यधिक लार, हिंसक व्यवहार, और अनियंत्रित गतिविधियाँ—ये सभी लक्षण डॉ. मेहरा द्वारा जांच में दर्ज किए गए हैं। यह रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेज दी गई है और विशेषज्ञों ने इसे “संभावित सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट” करार दिया है

समाज की चुप्पी—एक और अपराध

हमारे समाज में “गाय हमारी माता है” कहना आसान है, पर जब वही माता पॉलीथीन खाकर तड़पती है, तो हम केवल मूक दर्शक बनकर रह जाते हैं।
क्या यह हमारी सामूहिक संवेदनहीनता की पराकाष्ठा नहीं है

अब सवाल नहीं, समाधान चाहिए

नगरवासियों की माँगें अब केवल अपील नहीं—एक चेतावनी हैं:

1. ट्रैचिंग ग्राउंड को चारों ओर से पूरी तरह घेरा जाए
2. ट्रैक्टर आने-जाने वाले द्वार को नियंत्रित किया जाए
3. सभी सार्वजनिक स्थलों पर बड़े और ठोस डस्टबिन लगाए जाएं
4. सफाई का समयबद्ध और नियमित कार्यक्रम सुनिश्चित किया जाए
5. खुले में कचरा फेंकने वालों पर जुर्माना और निगरानी लागू हो

“पॉलीथीन नहीं, यह धीमा ज़हर है”

हर बार जब कोई नागरिक खाने की चीजें पॉलीथीन में बांधकर फेंकता है, तो वह अनजाने में किसी जानवर की मौत का कारण बनता है। हमें यह समझना होगा कि पॉलीथीन केवल प्रदूषण नहीं, यह एक मौन हत्या है।

अंतिम शब्द: अब भी समय है

“हर कचरा पात्र, हर साफ गली—एक गौमाता की रक्षा”
अब वक्त है, कि हम सिर्फ प्रतिक्रियाएं देना बंद करें और कार्रवाई की शुरुआत करें।
क्योंकि हर बार जब कोई गाय पॉलीथीन खाकर मरती है—वह केवल उसका अंत नहीं, हमारे समाज की संवेदना का पतन होता है

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