कागज़ कभी रोते नहीं, बस रुला देते हैं…
कागज़ कितना अनमोल है,
कागज़ कभी कोरा बन जाता, तो कभी बेसहारा हो जाता।
ए कागज़ कभी किस्मत बन जाता,
तो कभी जिंदगी को हार जाता है।
कागज़ रोते नहीं, बस रुला देते हैं।
चाहे प्रेम पत्र हो,रिजल्ट हो या फिर मेडिकल रिपोर्ट…
कागज़ तो कागज़ है…

बस लिखने की जरूरत है, अल्फ़ाज़ समेटने की हक़ीक़त है,
कोरे कागज़ पर लिखी स्याही को एक निगाहों को और दिल – ओ -दिमाग से सोचने की भावनात्मकता की जरूरत है।।
कभी यही कागज़ दिल को खुशियों से भर देते हैं, तो कभी जिंदगी भर रुला देते हैं…
कभी इन्हीं कागज़ों पर लिखी परीक्षा परिणामों को देख दिल मचल उठता है, तो कभी बेहतर परिणाम के लिए वर्षों बीत जाते हैं।
कभी यही कागज़ एक बीमार के लिए मुसीबत बन जाते हैं, तो कभी बीमारों को हॉस्पिटल से बाहर निकाल देते हैं।
कागज़ तो बस कागज़ है…

कागज़ रोते नहीं, बस रुला देते हैं
चाहे प्रेम पत्र हो रिजल्ट हो या फिर मेडिकल रिपोर्ट…
एक यही कागज़ लोगों को संपत्ति दिला देते हैं, तो कभी संपत्ति छीन लेते हैं…
कागज़ कभी मुकदमों की बाजी जीत जाते हैं, तो कभी जिंदगी की बाजी हार जाते हैं…
कागज़ कभी रोते नहीं बस रुला देते हैं
चाहे प्रेम पत्र हो, रिजल्ट हो या फिर मेडिकल रिपोर्ट…
कागज़ तो कागज़ है
कभी जिंदगी की सुख चैन छीन लेते हैं तो कभी जिंदगी को सुख चैन से भर देते हैं…
कागज़ कभी रोते नहीं बस रुला देते हैं
चाहे प्रेम पत्र हो रिजल्ट हो या फिर मेडिकल रिपोर्ट…
कागज़ भी कितने अजीब हैं

कभी सगे भाई को दुश्मन बना देते हैं तो कभी दुश्मन को अनमोल दोस्त बना देते हैं…
कागज़ कितने मासूम हैं
कभी दो दिलों को जोड़ देते हैं तो कभी दो दिलों को तोड़ देते हैं…
कभी प्रेम पत्र बन कर खुशियां लौटा देते हैं, तो कभी प्रेम पत्र बन कर खुशियां छीन लेते हैं…
कभी रिजल्ट बन कर जिंदगी भर की भविष्य संवार देते हैं तो कभी जिंदगी बिगाड़ देते हैं…
ए कागज़ कभी मेडिकल रिपोर्ट बन कर कभी पूरे कुनवे को रुला देते हैं, तो कभी पूरे कुनवे को खुशियों से लबरेज कर देते हैं…
कागज़ तो कागज़ है
कागज़ रोते नहीं हैं बस रुला देते हैं
चाहे प्रेम पत्र हो रिजल्ट हो या फिर मेडिकल रिपोर्ट
कागज़ तो कागज़ है…

सत्यार्थ वेब न्यूज
शिवरतन कुमार गुप्ता “राज़”
महराजगंज 07/03/025














Leave a Reply