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समाज सुधारक कालबेलिया समाज का उत्थान करने वाले श्रीकृष्णनाथ का सोमवार सुबह निधन।

सत्यार्थ न्यूज श्रीडूंगरगढ़-सवांददाता ब्युरो चीफ रमाकान्त

महान समाज सुधारक क्रांतिकारी परिवर्तन के धनी श्रीकृष्ण नाथ कालबेलिया पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिल भारतीय कानिफ नाथ सपेरा(कालबेलिया) कल्याण फाउण्डेशन भारत सरकार) का सोमवार सुबह निधन हो गया। जितेंद्र नाथ ने बताया की श्रीकृष्ण नाथ का जन्म श्रीडुंगरगढ़ के बिग्गा गांव में एक घुमंतू समुदाय के सपेरा (कालबेलिया) समाज में हुआ। जन्म से ही कृष्ण नाथ समाज में व्याप्त कुरूतियों को लेकर अचंभित थे। 1975 के वर्षों में लगभग पांचवी कक्षा उत्तीर्ण कर ली। पढ़ाई में शीर्ष स्थान रखतें थें। उस समय पांचवी कक्षा उत्तीर्ण करना आज के समय मे लगभग ग्रेजुएट डिप्लोमा धारी समझा जाता था। कृष्णनाथ ने अपनी सोच और पढ़ाई करने के बाद में राजस्थान सरकार में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी पद में कार्यतर थे लगभग 50 वर्ष की उम्र तक सरकारी सेवा करने के बाद में उनके मन समाज में फैली कुरूतियों को मिटाने की सोच लेकर समाज मे क्रांति की अलख जगाने में अपना सारा ध्यान लगा दिया तथा पूर्ण तरीके से सरकारी सेवा नही कर पाने की वजह से उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया गया। इसके बाद में सपेरा (कालबेलिया) में व्याप्त कुरूतियों व शिक्षा के प्रति अलख जगाई व लगभग भारत के 10 राज्यों में जगह जगह पहुंचकर समाज के लोगों को अपने हक़ व अधिकार के प्रति जागरूक किया। उनका संपूर्ण जीवन लगभग समाज सुधारक के रूप में गुज़र गया। उन्होंने अपने जीवन में समाज के लिए निस्वार्थ भाव कार्य किया। उन्होंने घुमंतू समुदाय के लिए भारत सरकार में विधि न्याय मंत्री (कैबिनेट मंत्री)अर्जुन राम मेघवाल (IAS) के सानिध्य में भी घुमंतू समुदाय के कई रिकॉर्ड व रिपोर्ट्स सरकारिया आयोग में कार्य किया। कृष्ण नाथ पिछले काफी समय से अस्वस्थ चल रहे थे। उनका मुख्य उद्देश्य समाज को शिक्षा के प्रति जागरूक करना व अपने हक़ व अधिकारों के प्रति जागरूक करना था। सोमवार सुबह उन्होंने अंतिम सांस ली।कृष्ण नाथ के अंतिम समय में भी समाज को शिक्षा के प्रति व अपने हक के लिए जागरूक कर करने का संदेश दिया।

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