पारुल राठौर
परमार्थ निकेतन, ऋषिकेश
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी और डा साध्वी भगवती सरस्वती जी के पावन सान्निध्य में दीप प्रज्वलित कर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का किया शुभारम्भ
डॉ. देवेंद्र कुमार तिवारी जी, प्रधानाचार्य, यूनाइटेड ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस ने सभी विशिष्ट अतिथियों का किया अभिनन्दन
अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्देश्य महाकुंभ के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, धार्मिक और सामाजिक पहलुओं पर अनुसंधान प्रस्तुत करना

अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन के मुख्य अतिथि स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी, साध्वी भगवती सरस्वती जी, विश्वविद्यालय के माननीय उपकुलपति, प्रोफेसर राजेंद्र सिंह (राजू भैया), यूनाइटेड विश्वविद्यालय के उपकुलपति, विशिष्ट शिक्षाविदो, शोधकर्ताओं, विद्वानों और छात्रों की गरिमामयी उपस्थिति

प्रयागराज, महाकुंभ 25 के पावन अवसर पर यूनाइटेड ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस द्वारा एक भव्य अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस सम्मेलन का उद्घाटन परमार्थ निकेेेतन के अध्यक्ष, स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी और डॉ. साध्वी भगवती सरस्वती जी के पावन सान्निध्य में सभी विशिष्ट विभूतियों ने दीप प्रज्वलित कर किया गया। इस ऐतिहासिक अवसर पर सभी विभूतियों ने महाकुंभ के महत्व और उसकी आध्यात्मिक और सांस्कृतिक धारा पर विचार व्यक्त किए।
सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने महाकुंभ के आध्यात्मिक महत्व को रेखांकित किया। डॉ. साध्वी भगवती सरस्वती जी ने महाकुंभ के सामाजिक, सांस्कृतिक और धार्मिक पहलुओं पर विस्तृत विचार साझा किए।
इस सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी और डॉ. साध्वी भगवती सरस्वती जी के पावन सान्निध्य ने सम्मेलन की गरिमा को और बढ़ाया है।

साथ ही विश्वविद्यालय के माननीय उपकुलपति प्रोफेसर राजेंद्र सिंह (राजू भैया), यूनाइटेड विश्वविद्यालय के उपकुलपति, शिक्षाविद, शोधकर्ता, विद्वान और छात्रों की गरिमामयी उपस्थिति रही।
यह अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन महाकुंभ के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, धार्मिक और सामाजिक पहलुओं पर शोध प्रस्तुत करने के उद्देश्य से आयोजित किया गया है। महाकुंभ एक ऐसा वैश्विक धार्मिक आयोजन है, जिसका महत्व केवल भारत में नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में है। यह आयोजन न केवल आध्यात्मिक रूप से, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी अत्यधिक महत्वपूर्ण है।

इस सम्मेलन का उद्देश्य महाकुंभ के विभिन्न पहलुओं पर शोध कार्य एवं विश्लेषण प्रस्तुत करना है, ताकि महाकुंभ की महत्ता को और उत्कृष्ट रूप से समझा जा सके। साथ ही, यह सम्मेलन समाज और संस्कृति के मूल्यों, जड़ों और मूल को समझने का एक अद्वितीय अवसर छात्रों को प्रदान कर रहा है। महाकुंभ, जो एक प्राचीन और आध्यात्मिक धरोहर है, आज भी श्रद्धालुओं को शुद्धता, ध्यान, साधना और आत्मिक शांति की ओर बढ़ाने का उत्कृष्ट कार्य कर रहा है।
सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य महाकुंभ के आध्यात्मिक और सांस्कृतिक धारा पर गहन विचार विमर्श करना है। साथ ही शोधकर्ताओं, विद्वानों और छात्रों को एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान करना है, जहाँ वे महाकुंभ के विविध पहलुओं पर अपने शोधपत्र प्रस्तुत कर सकते हैं।

स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि महाकुंभ केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि यह जीवन के हर क्षेत्र में ध्यान, साधना और आत्मनिर्भरता की ओर प्रेरित करने वाली एक दिव्य यात्रा है। युवा पीढ़ी को अपने भीतर की आध्यात्मिक शक्ति को पहचानते हुए सनातन संस्कृति से जुड़ने का एक अवसर प्रदान करता है ताकि वे अपने जीवन को सही दिशा दे सकें।
डॉ. साध्वी भगवती सरस्वती जी ने कहा कि महाकुंभ हमारे सनातन धर्म की गहरी धारा को व्यक्त करता है। युवा वर्ग को इस अद्भुत अवसर का सदुपयोग करते हुए समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिये एक-दूसरे को प्रेरित करें ताकि वे न केवल अपनी आत्मा को शुद्ध करें, बल्कि समाज को भी ऊँचा उठाएं।

यूनाइटेड ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के प्रधानाचार्य, डॉ. देवेंद्र कुमार तिवारी जी ने इस अवसर पर सभी विशिष्ट अतिथियों का अभिनन्दन किया और सम्मेलन के उद्देश्य को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि इस सम्मेलन के माध्यम से हम महाकुंभ की महत्वपूर्ण धरोहर को संरक्षित करने और इसे भविष्य की पीढ़ी के साथ साझा करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
डॉ. देवेंद्र कुमार तिवारी जी ने कहा कि पूज्य स्वामी जी और पूज्य साध्वी का पावन सान्निध्य ने इस सम्मेलन को दिव्यता व भव्यता प्रदान की है। हम सभी उन्हें अपने बीच पाकर गौरवान्वित हैं। वर्षों पहले भी आपका सान्निध्य पूरे यूनाइटेड ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस परिवार को प्राप्त हुआ था उसकी ऊर्जा व उष्मा आज भी हम सभी महसूस करते हैं।
यूनाइटेड ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के पदाधिकारियों ने हरित भेंट पौधा भेंट कर स्वामी जी, साध्वी जी और विशिष्ट अतिथियों का अभिनन्दन किया।



















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