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डोनाल्ड ट्रंप ने रोकी विदेशी मदद, सिर्फ दो देशों को दी छूट, यूक्रेन के लिए बड़ी ‘टेंशन’

वाशिंगटन : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने शुक्रवार को एक व्यापक आदेश में, केवल इजरायल और मिस्र को छोड़कर, यूक्रेन सहित सभी विदेशी सहायता पर रोक लगा दी है. इस आदेश से सामान्य सहायता से लेकर सैन्य सहायता तक सब कुछ प्रभावित करेगा. इसमें केवल आपातकालीन खाद्य सहायता और इजरायल, मिस्र के लिए सैन्य मदद को छूट दी गई है. लीक हुआ नोटिस राष्ट्रपति ट्रंप की ओर से सोमवार को जारी किए गए कार्यकारी आदेश के बाद आया.

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, संयुक्त राज्य अमेरिका दुनिया का सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय सहायता दाता है. इस काम के लिए वाशिंगटन ने 2023 में 68 बिलियन डॉलर खर्च किए थे. कर्मचारियों को भेजे गए ज्ञापन में कहा गया , “जब तक प्रत्येक सहायता नई मदद या मदद बढ़ाने के फैसले की समीक्षा और स्वीकृति नहीं हो जाती, तब तक नई सहायता या मौजूदा मदद के विस्तार के लिए कोई नया फंड जारी नहीं

यह कदम अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति के मुताबिक है, जिसमें विदेशों में सहायता पर बेहद सख्त रवैया अपनाया गया है. विदेश मंत्री मार्को रुबियो पहले कह चुके हैं कि अमेरिका को विदेशों में तभी खर्च करना चाहिए जब इससे अमेरिका ‘मजबूत’, ‘सुरक्षित’ या ‘अधिक समृद्ध’ होता हो.

इस फैसला का सबसे बड़ा असर यूक्रेन पर पड़ेगा जिसे रूसी हमले का सामना करने के लिए अमेरिकी मदद की सख्त जरूरी है. कीव को ट्रंप के पूर्ववर्ती जो बाइडेन प्रशासन की तरफ से अरबों डॉलर के हथियार मिले थे. रूबियो के ज्ञापन में, इस रोक को उचित ठहराते हुए कहा गया है कि नए प्रशासन के लिए यह आकलन करना असंभव है कि मौजूदा विदेशी सहायता प्रतिबद्धताएँ “दोहराई नहीं गई हैं, प्रभावी हैं और राष्ट्रपति ट्रम्प की विदेश नीति के अनुरूप हैं.”

सरकारी नोटिस के अनुसार, रूबियो ने आपातकालीन खाद्य सहायता आदेश में छूट दी. इजरायल और हमास के बीच युद्ध विराम शुरू होने के बाद गाजा पट्टी में मानवीय सहायता में वृद्धि और सूडान सहित दुनिया भर में कई अन्य भूख संकटों के बीच यह फैसला किया गया.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक इंटरव्यू में कहा कि यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की को रूस के साथ समझौता करना चाहिए था, बजाय इसके कि वह लड़ाई में कूदें। उन्होंने फॉक्स न्यूज़ को दिए इंटरव्यू में कहा, “जेलेंस्की एक बहुत बड़े और ताकतवर देश से लड़ रहे थे। उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए था। हम एक समझौता कर सकते थे।” ट्रंप का कहना है कि रूस की ताकत और सैन्य क्षमता के सामने यूक्रेन का प्रतिरोध करना गलत फैसला था। उन्होंने कहा, “मैंने यह समझौता आसानी से करवा सकता था, लेकिन जेलेंस्की ने फैसला किया कि वह लड़ेंगे।”

ट्रंप ने यह भी कहा कि अगर वह राष्ट्रपति होते, तो युद्ध को एक दिन में खत्म कर सकते थे। उन्होंने जेलेंस्की के इस फैसले को “गलत” बताया, जिससे युद्ध शुरू हुआ। ट्रंप के इस बयान के विपरीत, मौजूदा राष्ट्रपति जो बाइडेन ने यूक्रेन के आत्मरक्षा के अधिकार का समर्थन किया है। बाइडेन ने रूस पर प्रतिबंध लगाए और यूक्रेन को बड़ी मात्रा में सैन्य सहायता प्रदान की। ट्रंप ने कहा, “अगर रूस जल्द ही इस युद्ध को खत्म नहीं करता, तो अमेरिका रूस पर भारी प्रतिबंध और टैक्स लगाएगा।”
इस युद्ध के कारण लाखों लोगों की जानें गई हैं और बड़ी तबाही हुई है। ट्रंप ने इस स्थिति को जेलेंस्की के नेतृत्व की नाकामी बताया। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि वह दोनों पक्षों के लिए “सही समझौता” कराने की कोशिश करेंगे।

सितंबर में ट्रंप ने जेलेंस्की से मुलाकात के दौरान कहा था कि वह एक ऐसा समझौता करेंगे जो दोनों पक्षों के लिए “फायदेमंद” हो। लेकिन उनके बयान ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या वह युद्ध की जटिलताओं को सही ढंग से समझते हैं। डोनाल्ड ट्रंप के इस बयान ने यूक्रेन-रूस युद्ध और विदेश नीति पर उनके रुख को लेकर नई बहस छेड़ दी है। युद्ध खत्म होने का फिलहाल कोई संकेत नहीं है, लेकिन ट्रंप का बयान इस मुद्दे पर उनकी सोच को उजागर करता है।

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