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पाली में डेढ़ वर्ष की बच्ची होद में गिर जाने से उसकी मृत्यु हो गयी, एक बार लौटी धड़कन, लेकिन नहीं बचा सके, भावुक हुए डॉक्टर

हर्षल रावल
10 जनवरी, 2025
सिरोही/राज.

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पाली में डेढ़ वर्ष की बच्ची होद में गिर जाने से उसकी मृत्यु हो गयी, एक बार लौटी धड़कन, लेकिन नहीं बचा सके, भावुक हुए डॉक्टर


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पाली। पाली में डेढ़ वर्ष की बच्ची घर के आंगन में खेलते-खेलते पानी के होद में गिर गई। पड़ोसियों ने होद से बच्ची को निकाला। फिर पिता पड़ोसी के साथ स्कूटी पर बच्ची को लेकर फौरन हॉस्पिटल पहुंचाया। डॉक्टरों ने 2 घंटे तक बच्ची को बचाने का संपूर्ण प्रयास किया। इस दौरान एक बार दिल की धड़कन (हार्ट बीट) भी लौटी, लेकिन बच्ची को बचा नहीं पाए। इस दौरान एक डॉक्टर अपने आंसू नहीं रोक सकीं। घटना गुरुवार शाम पाली के औद्योगिक थाना क्षेत्र के महाराणा प्रताप सर्किल क्षेत्र की है।
स्कूटी पर लेकर अस्पताल पहुंचा पिता जानकारी के अनुसार- महाराणा प्रताप सर्किल क्षेत्र में रहने वाले पारसमल की डेढ़ वर्ष की बेटी गुंजन गुरुवार दोपहर घर में खेल रही थी। बच्ची की माता घर के काम-काज में व्यस्त थीं। इस बीच गुंजन खेलते-खेलते घर में बने पानी के होद में गिर गई। कुछ देर पश्चात जब माता को बेटी का ध्यान आया तो वह उसे ढूंढने लगीं। जब होद में देखा तो बच्ची उसके अंदर पड़ी हुई थी। यह देख माता चीख पड़ी। माता की चीख सुनकर पहुंचे पड़ोसियों ने बच्ची को होद से निकाला। महिला ने पति पारसमल को फोन किया। पारसमल तुंरत घर पहुंचे और दोपहर करीब 3:30 बजे पड़ोसी की स्कूटी पर बच्ची को बांगड़ हॉस्पिटल के ट्रॉमा वार्ड में लेकर पहुंचे। डॉक्टर्स और नर्सिंग स्टाफ ने बच्ची की ECG की, सीपीआर दिया। हार्ट को पम्प करने का प्रयास किया, लेकिन बच्ची में कोई हरकत नहीं हुई।
सीपीआर दिया, इंजेक्शन लगाए, लेकिन बचा नहीं पाए ट्रॉमा वार्ड में चाइल्ड स्पेशलिस्ट डॉक्टर SN स्वर्णकार ने दोबारा ECG करवाई। बच्ची की जान बचाने की कुछ संभावना दिखी तो हॉस्पिटल के PNCU वार्ड में ले गए। जहां डॉक्टर स्वर्णकार और उनकी टीम के डॉक्टर राजवी और डॉक्टर कैलाश गुंजन की जान बचाने में जुटे।
हार्ट बीट वापस लाने के लिए इंजेक्शन लगाए, इलेक्ट्रॉनिक शॉट दिए, सीपीआर दिया। लेकिन 2 घंटे पश्चात भी बच्ची बच नहीं पाई। शाम 5:30 बजे बच्ची को मृत्य घोषित कर दिया गया। डॉ. स्वर्णकार और डॉ. राजवी बच्ची के मृत्यु पर दुःखी नजर आए। डॉक्टर बोले- दो घंटे प्रयास किया गया, बचा नहीं पाए डॉक्टर एसएन स्वर्णकार ने कहा- बच्ची को उसके पिता गुरुवार दोपहर 3:30 बजे ट्रॉमा सेंटर लेकर आए थे। तब बच्ची में बिल्कुल धड़कन नहीं थी। स्टाफ ने तुरंत सीपीआर देना आरंभ कर दिया था। फिर मुझे कॉल आया कि एक बच्ची आई है जो पानी में डूब गई थी। मैं तुरंत वहां पहुंचा।
थोड़ी देर सीपीआर देने के बाद ईसीजी की। हलचल दिखी तो तुरंत पीडियाट्रिक आईसीयू में भर्ती किया। बच्ची में धड़कन नहीं के बराबर थी। ऐसे में उसे एड्रेलिन के इंजेक्शन लगाए। कार्डियो परमोंडिरेसिस्ट करते रहे। बच्ची में कुछ देर बाद रिस्पॉन्स आया। उसकी हार्ट रेट ठीक हुई। इसके पश्चात ब्लड प्रेशर बढ़ाने की दवाएं दीं। कुछ देर पश्चात फिर गड़बड़ हुई तो उसे डीसी शॉक दिया। दो घंटे स्टाफ ने काफी परिश्रम की, लेकिन आखिरकार हम उसे बचा नहीं पाए। डॉक्टर स्वर्णकार ने कहा- “घर में यदि पानी का टैंक है तो परिवार के लोगों के सावधानी रखनी चाहिए। सब घर वाले टैंक को बंद कर ताला लगाकर रखें। छोटी-सी सावधानी से बड़ी हानि से बचा जा सकता है।”
तीन भाई-बहनों में सबसे छोटी थी गुंजन के पिता पारसमल ने बताया- मैं आरसीसी की छत डालने का कार्य करता हूं। घटना के समय मैं कार्य पर गया हुआ था। मेरे तीन बच्चों में गुंजन सबसे छोटी थी। बड़ा बेटा विजेंद्र 12 और छोटा बेटा केशव 9 वर्ष का है।

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