Advertisement

लखनऊ : पारदर्शी भर्तियों से सॉल्वर गैंग को हो रही परेशानी : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

www.satyarath.com

• पारदर्शी भर्तियों से सॉल्वर गैंग को हो रही परेशानी : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

www.satyarath.com

लखनऊ, 10 सितंबर : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को यहां लोक भवन में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान यूपी अधीनस्थ सेवा चयन आयोग से चयनित 647 वन रक्षकों, वन्यजीव रक्षकों और 41 जूनियर इंजीनियरों को नियुक्ति पत्र वितरित किए।इस मौके पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जिन लोगों ने 2017 से पहले युवाओं को धोखा दिया था, वही लोग आज झूठा प्रचार कर रहे हैं। कमीशनखोरी को लूट का अड्डा बना दिया गया। पिछले दरवाजे से भर्तियां की गईं। सरकारों के पास न नीति थी, न नियम… इसलिए आज गैंग परेशान है। ऐसे में गैंग लीडर का परेशान होना स्वाभाविक है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आज जलवायु परिवर्तन देश और दुनिया के लिए एक ज्वलंत मुद्दा है। आज मानवता संकट से जूझ रही है। असमय अतिवृष्टि, ओलावृष्टि, बाढ़, सूखा से क्षति होती है। अति से हर जगह बचना चाहिए… अति हर चीज की अच्छी नहीं होती। अगर ये वन्यजीव रक्षक अपनी जिम्मेदारी समझ लें तो इस संकट से निपटना आसान हो जाएगा। उन्होंने कहा कि पहले नियुक्ति पत्र मिलने में कई साल लग जाते थे, लेकिन आज भर्ती के बाद 6 महीने से 1 साल के अंदर नियुक्ति पत्र मिल रहा है। इस भर्ती प्रक्रिया में आपको कोई सिफारिश या लेन-देन नहीं करना पड़ेगा। सरकार भी आपसे यही उम्मीद करती है। यदि भर्ती ईमानदारी से हुई है तो आपको भी ईमानदारी से काम करना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज प्लास्टिक पर्यावरण के लिए घातक बन गया है। अगर आप कभी पहाड़ों, जंगलों में जाएं तो आपको जंगल जलते हुए मिलेंगे। जंगल जलेंगे तो इसके दुष्परिणाम भी दिखेंगे। भूस्खलन होगा। साढ़े सात साल पहले हमने वन क्षेत्र बढ़ाने का संकल्प लिया था। इसके लिए हम हर वर्ष वृक्षारोपण कार्यक्रम चलाते हैं। इससे हमें कई अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रशंसा भी मिली है।योगी ने कहा कि आज प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में भी इंजीनियरों को नियुक्ति पत्र मिल रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने गंगा को अविरल और निर्मल बनाने के लिए नमामि गंगे अभियान भी शुरू किया। नदियों को प्रदूषण से मुक्त करने की जरूरत है। इससे हमें प्रकृति और पर्यावरण दोनों को बचाने में मदद मिलेगी। आज वन्य जीव संरक्षकों की भी नियुक्ति की जा रही है। हमें अक्सर वन्यजीव संघर्ष के बारे में देखने और सुनने को मिलता है। एक भी जीवन हमारे लिए दुखद है। अगर किसी वन्यजीव के कमांड एरिया में जलभराव होगा तो वह आबादी की ओर भागेगा, तराई क्षेत्र में जंगल और खेती दोनों एक-दूसरे से सटे हुए हैं। यदि जंगल में बाढ़ आ गई तो वन्यजीव पास के गन्ने के खेतों में शरण लेंगे। ऐसे में वन्य जीवों को कोई नहीं बचा सकता।यदि किसान खेत में अकेला होगा तो वन्य जीव हिंसक हो जायेंगे। जंगल और खेतों के सीमावर्ती क्षेत्र बिजली की बाड़ लगाने की जरूरत है। हमें भी पहले जागरूक होना होगा, फिर हम ग्रामीणों को इससे बचाव के बारे में भी बता सकते हैं। इस काम के लिए वन विभाग को पैसा भी दिया जाता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस कार्य में प्रशिक्षण की आवश्यकता है। कोई भी जानवर हिंसक नहीं है। ऐसा तब होता है जब कोई एक-दूसरे के क्षेत्र में अतिक्रमण करता है। इसके लिए हमें स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षण देना होगा। वन्यजीवों का जीवन चक्र भी मनुष्यों के साथ-साथ चलता है।उत्तर प्रदेश पहला राज्य है जिसे मानव-वन्यजीव संघर्ष के कारण होने वाली जनहानि के लिए आपदा के अंतर्गत मान्यता दी गई है और इसके लिए 5 लाख रुपये की धनराशि दी जाती है। अवैध खनन के विरुद्ध की गई कार्रवाई के कारण आज वन क्षेत्र में वृद्धि हुई है। वन्य जीवन बढ़ गया है।

Spread the love

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!