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बीकानेर-तपस्या से कर्मों की निर्जरा होती है: साध्वी कुंथुश्री 10 दिनों की निराहार तपस्या पर मालू भवन में हुआ तपाभिनंदन कार्यक्रम

सवांददाता चीफ रिपोर्टर रमाकान्त झंवर बीकानेर श्रीडूंगरगढ

श्रीडूंगरगढ़। श्रीडूंगरगढ़ में जैन समाज द्वारा श्रावण और भाद्रपद मास में तपस्या करके आध्यात्मिकता में स्वयं को नियोजित किया जा रहा है। इसी क्रम में श्रीडूंगरगढ़ में जैन समाज के साध्वी सेवा केंद्र में सुप्यार देवी मालू की 10की तपस्या का तपाभिनंदन शासनश्री साध्वी कुंथुश्री के सान्निध्य में हुआ। साध्वी कुंथुश्री ने अपने मंगल उद्बोधन में कहा कि तप एक ऐसा सुरक्षा कवच है जिसे पहनने से व्यक्ति संभावित खतरों से बच सकता है। तप से कर्मों की निर्जरा होती है। इसलिए व्यक्ति को कुछ न कुछ तप अवश्य करना चाहिए।तपस्विनी मालू की 10दिनों की निराहार तपस्या पर साध्वी सुमंगलाश्री जी,साध्वी जीतयशा,साध्वी सम्यक्त्वप्रभा, साध्वी चंद्रयशा, संपत देवी मालू, रतन लाल गंग, सभा मंत्री प्रदीप पुगलिया, तेयुप सहमंत्री मनीष पटावरी, महिला मंडल से मधु झाबक ने विचार व्यक्त करते हुए तप अभिनन्दन किया। तपस्विनी मालू का जैन समाज की संस्थाओं द्वारा सम्मान किया गया। कार्यक्रम में सभा के उपाध्यक्ष दीपमाला डागा, कार्यकारिणी सदस्य जीतेश मालू,महेंद्र मालू, महेंद्र दुगड़, संजय बरडिया,अंबिका डागा,महिला मंडल मंत्री संगीता बोथरा, संगठन मंजू झाबक सहित परिवारजन और श्रावक श्रविका समाज उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन साध्वी सुमंगलाश्री ने किया।

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