सुरेन्द्र विश्वकर्मा
दिनांक 20 अगस्त
जनपद हटा
स्थान बर्धा
बर्धा में हर्षोल्लास के साथ मनाया कजलिया पर्व,तरह तरह के हुए सांस्कृतिक खेल
बर्धा/मध्य प्रदेश का बुंदेलखंड क्षेत्र अपनी समृद्ध संस्कृति गौरवशाली इतिहास और रंग-बिरंगे त्योहारों के लिए प्रसिद्ध है इस क्षेत्र की लोक परंपराएं और त्यौहार अद्वितीय प्रथम और ऐतिहासिक घटनाओं से जुड़े हुए हैं उज्जैन में वीरता और शौर्य की झलक मिलती है ऐसा ही महत्वपूर्ण लोक उत्सव है काजलिया पर्व जिसे बुंदेलखंड में आस्था का प्रतीक माना जाता है!
कजलिया के पवन पर्व पर ग्रामीण क्षेत्रों में अनेकों पुरानी परंपराओं के साथ लोक नृत्य जैसे कार्यक्रम होते है,ग्रामीण लोगों द्वारा सैकड़ों की तादाद में बुंदेली शेरो का आनंद लिया जाता है साथ ही बुंदेली लोकों का कार्यक्रम भी किया जाता है ग्रामीण क्षेत्र यह पर्व खासतौर पर अच्छी बारिश,अच्छी फसल,और जीवन में सुख समृद्धि की कामना से किया जाता है!
कजलिया का ऐतिहासिक महत्व
कजलियां का ऐतिहासिक महत्व
आल्हा, ऊदल, लाखन, ताल्हन, सैयद, और राजा परमाल के पुत्र ब्रह्मा जैसे वीरों ने पृथ्वीराज की सेना को हराकर महोबा की रक्षा की. इस विजय के बाद राजकुमारी चंद्रावली और अन्य लोगों ने अपनी-अपनी कजलियां विसर्जित कीं. तब से यह पर्व बुंदेलखंड में विजयोत्सव के रूप में मनाया जाता है.


















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