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बीकानेर-परमहंस योगानंद ध्यान और क्रिया योग की शिक्षाओं को पश्चिमी देशों में फैलाया : कालवा

सवांददाता मीडिया प्रभारी मनोज मूंधड़ा बीकानेर श्रीडूंगरगढ़

परमहंस योगानंद ध्यान और क्रिया योग की शिक्षाओं
को पश्चिमी देशों में फैलाया : कालवा

श्रीडूंगरगढ़ कस्बे की ओम योग सेवा संस्था के निदेशक योगाचार्य ओम प्रकाश कालवा ने सत्यार्थ न्यूज चैनल पर 80 वां अंक प्रकाशित करते हुए परमहंस योगानंद के बारे में विस्तृत जानकारी देते हुए बताया। परमहंस योगानंद भारत के विशेष योगियों में से एक थे उन्होंने ध्यान और क्रिया योग की शिक्षाओं को पश्चिमी देशों में फैलाया उन्होंने ‘ऑटोबायोग्राफी ऑफ ए योगी’ भी लिखी,ये किताब काफी पॉपुलर हुई थी। परमहंस योगानन्द जन्म मुकुंद लाल घोष 5 जनवरी 1893-7 मार्च 1952 एक भारतीय-अमेरिकी हिन्दू भिक्षु,योगी और गुरु थे,जिन्होंने अपने संगठन,सेल्फ-रियलाइज़ेशन फ़ेलोशिप (एसआरएफ) योगदा सत्संग सोसाइटी (वाईएसएस) ऑफ़ इंडिया के माध्यम से लाखों लोगों को ध्यान और क्रिया योग से परिचित कराया – यह एकमात्र ऐसा संगठन था जिसे उन्होंने लोगों को जागरूक करने के लिए बनाया था। और जब “नस्लों का मिश्रण” करना अभी भी अमेरिकी कानून के विरुद्ध था,तब योगानंद ने सामाजिक और नस्लीय बाधाओं को तोड़ने के प्रयास में एक भारतीय पुरुष और एक अमेरिकी महिला से सार्वजनिक रूप से विवाह किया। ऐसा करके,उन्होंने अपने अंतिम विश्वास को उदाहरण के द्वारा सिखाया कि हम सभी एक हैं। परमहंस योगानंद द्वारा लिखित ‘योगी आत्मकथा’ एक आध्यात्मिक क्लासिक है। जो योगानंद की जीवन यात्रा और आध्यात्मिक खोज की कहानी कहती है। साथ ही चेतना और ब्रह्मांड की प्रकृति पर गहन शिक्षा भी देती है।

निवेदन

ओम योग सेवा संस्था श्री डूंगरगढ़ द्वारा जनहित में जारी।


सत्यार्थ न्यूज श्रीडूंगरगढ़- छायाचित्र


सत्यार्थ न्यूज श्रीडूंगरगढ़- बालयोगी -योगानंद कालवा

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