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बीकानेर-पारलौकिक और आत्मिक शक्तियों को तप और साधना के द्वारा प्राप्त की जा सकती है। : कालवा

सवांददाता नरसीराम शर्मा बीकानेर श्रीडूंगरगढ़

पारलौकिक और आत्मिक शक्तियों को तप और साधना के द्वारा प्राप्त की जा सकती है। : कालवा

श्रीडूंगरगढ़ कस्बे की ओम योग सेवा संस्था के निदेशक योगाचार्य ओम प्रकाश कालवा ने सत्यार्थ न्यूज चैनल पर 62 वां अंक प्रकाशित करते हुए बताया । पारलौकिक और आत्मिक शक्तियों को तप और साधना के द्वारा प्राप्त की जा सकती है। अष्ठ सिद्धियों की विस्तृत जानकारी देते हुए कहा।

अर्थ

-अणिमा , महिमा, लघिमा, गरिमा तथा प्राप्ति प्राकाम्य इशित्व और वशित्व ये सिद्धियां “अष्टसिद्धि” कहलाती हैं। ‘सिद्धि’ शब्द का तात्पर्य सामान्यतः ऐसी पारलौकिक और आत्मिक शक्तियों से है जो तप और साधना के द्वारा प्राप्त होती हैं ।

प्राप्त करने का मार्ग

-आचार्य चरक बताते हैं कि जब योगी अपने शुद्ध सत्व (शुद्ध मन, रज और तम से रहित – जो मन को दूषित करते हैं) और आत्मा के सहयोग से योग का अभ्यास करता है तो उसे 8 सिद्धियां प्राप्त होती हैं। 8 सिद्धियां केवल उन लोगों द्वारा प्राप्त की जा सकती हैं जो अपने शुद्ध मन को आत्मा के साथ जोड़कर योग का अभ्यास करते हैं।

शक्तियां –

हिंदू धर्मग्रंथों में आठ सबसे शक्तिशाली सिद्धियाँ हैं: अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, इस्तिवा और वशित्व । यह किसी के शरीर के आकार को छोटा करने की क्षमता है, यहाँ तक कि एक परमाणु के आकार तक भी। भगवान कृष्ण ने श्रीमद्भागवतम् में सबसे छोटे से भी छोटे होने का वर्णन किया है।

निवेदन

-ओम योग सेवा संस्था श्री डूंगरगढ़ द्वारा जनहित में जारी।

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