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शिव जी का एक अनोखा मंदिर जहां पर दर्शनार्थियों के बाद शिवलिंग का दर्शन करने सांप भी आते हैं

शिवम सिंह 

बांदा। उत्तर प्रदेश के बांदा शहर में स्थापित प्राचीन बामदेवेश्वर मंदिर बुंदेलखंड में आस्था का केंद्र बिंदु माना जाता है। पौराणिक मान्यताओं की मानें तो पहाड़ की गुफाओं में विराजमान शिवलिंग को स्थापित नहीं किया गया, बल्कि महर्षि बामदेव के तपस्या के बाद यहां स्वयं शिवलिंग प्रकट हुआ था। इसी पर्वत में सर्पों का भी वास है। दर्शनार्थियों के बाद शिवलिंग का दर्शन करने सांप भी आते हैं। श्रावण मास भगवान शिव को प्रसन्न करने का सबसे उत्तम माह माना जाता है। इसी वजह से इस मंदिर में श्रावण मास में शिव भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा है। बामदेवेश्वर मंदिर के बारे में यह भी मान्यता है कि यहां पर भगवान श्रीराम ने भी पूजा की थी।ा है।

रामायण काल में भी उल्लेख

सावन मास में शिवभक्ति का खास महत्व है। इस माह में जो भी भगवान शिव की अराधना करते हैं उन्हें हजार गुना फल अधिक मिलता है। महर्षि बामदेव की नगरी में विराजमान श्रीबामदेवेश्वर बहुत ही प्राचीन स्थान हैं। इसका उल्लेख रामायण काल में भी बताया जा रहा है। पर्वत चोटी पर गुफा के अंदर विराजमान शिवलिंग की पूजा-अर्चना के लिए यूं तो प्रतिदिन भक्तों की भीड़ लगी रहती है, लेकिन सावन मास में श्रद्धालुओं की संख्या और बढ़ जाती है।

सोमवार के दिन लोग तड़के से ही प्रभु के दर्शन व पूजा अर्चना के लिए मंदिर में पहुंच जाते हैं। भीड़ इस कदर हो जाती है कि पंक्ति में खड़े होकर दर्शन के लिए पहुंचना पड़ता है।

प्रतिवर्ष एक जौ गुफा ऊंची होती है
मंदिर के पुजारी महाराज पुत्तन तिवारी बताते हैं कि महर्षि बामदेव का तपस्या स्थल बांबेश्वर पर्वत था। महर्षि की तपस्या से गुफा के अंदर शिवलिंग स्थापित हुए, यह शिवलिंग 12 ज्योतिर्लिंगों से भी प्राचीन है। पहले यह गुफा इतनी नीची थी कि लोगों को लेटकर दर्शन के लिए जाना पड़ता था। लेकिन धीरे-धीरे कर गुफा ऊंची होती चली गई और अब लोग दर्शन के लिए खड़े होकर प्रवेश कर जाते हैं। पुजारी जी कहते हैं कि प्रतिवर्ष एक जौ गुफा की ऊंची होने की किवदंती है।

ऋषि बामदेव से मिली बांदा को पहचान
ऋषि बाम देव गौतम ऋषि के पुत्र थे इसलिए उन्हें गौतम भी कहते हैं। वेदों के अनुसार सप्तऋषियों में ऋषि बामदेव का नाम भी आता है और उन्होंने संगीत की रचना की थी। रामायण काल में इस बामदेवेश्वर पर्वत पर वह निवास करते थे। इसी पर्वत पर स्थित भगवान शिव का मंदिर उन्होंने स्थापित किया था और बांदा नाम भी उन्हीं के नाम पर पड़ा है। धर्मशास्त्रों के मुताबिक,भगवान राम ने यहां आकर शिव की आराधना की थी।

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