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शंकरगढ वन क्षेत्राधिकारी के सह पर लालापुर में काटे गए हरे फलदार पेड़ कार्रवाई नहीं होने से लालापुर में मनबढ़ है बारा पावर प्लांट के उच्चाधिकारी

रिपोर्टर (रावेंद्र केशरवानी ,रोहन प्रयागराज उत्तर प्रदेश) शंकरगढ वन क्षेत्राधिकारी के सह पर लालापुर में काटे गए हरे फलदार पेड़
कार्रवाई नहीं होने से लालापुर में मनबढ़ है बारा पावर प्लांट के उच्चाधिकारी   (प्रयागराज) पर्यावरण को हरा भरा बनाए रखने के लिए सरकार द्वारा तमाम प्रयास किए जा रहे हैं लेकिन वन क्षेत्राधिकारी अजय कुमार व वन दरोगा मान सिंह एवं बारा पावर प्लांट के अधिकारियों की मिली भगत के चलते सरकार के इन तमाम प्रयासों का खुलेआम उल्लंघन कर रहे हैं । आलम यह है कि लालापुर थाना क्षेत्र के नौढिया तरहार में बारा पावर प्लांट के अधिकारियों ने कुछ ही घंटों में 45 फलदार हरे पेड़ो को काटकर धराशायी करवा दिया है । ग्रामीणों द्वारा बारा पावर प्लांट के अधिकारियों की जानकारी देने के बाद भी विभागीय अफसर इन पावर प्लांट के अधिकारियों पर कार्रवाई नही कर रहें हैं । इससे इन पावर प्लांट के अधिकारियों के हौसले और भी बुलंद हैं । पेड़ काटने के दौरान गांव के कुछ लोगों ने मामले की जानकारी वन क्षेत्राधिकारी अजय कुमार व वन दरोगा मानसिंह को दी , लेकिन शिकायत पर भी किसी ने संजीदगी नही बरती । आलम यह है कि 43 महुआ का हरा पेड़ व 2 आम का हरा पेड़ काटकर पावर प्लांट के अधिकारियों द्वारा अवैध तरीके से धराशायी कर दिया गया है । शिकायत के बाद भी जब कोई वन विभाग का अधिकारी नहीं पहुंचा तो लोगों ने वन क्षेत्राधिकारी व वन दरोगा पर मिली भगत का आरोप लगाया । लोगो ने कहा कि वन क्षेत्राधिकारी व वन दरोगा की सांठगांठ के चलते बारा पावर प्लांट के अधिकारियों पर कार्रवाई नही होती है जो कुछ ही घंटों में 45 हरे फलदार पेड़ो को काट कर धराशायी कर दिया । यदि ऐसा ही रहा तो आने वाले दिनों में बारा क्षेत्र की हरियाली पूरी तरह से पावर प्लांट के अधिकारी चट कर जाएंगे । यदि काटते हए किसी हरे पेड़ के विषय मे वन क्षेत्राधिकारी अजय कुमार व वन दरोगा से बात करने की कोशिश की जाती है तो पहले तो उनका फोन ही नहीं उठाता ,यदि उठना भी है तो उनका सीधा – सीधा कहना होता है कि सभी हरे पेड़ परमिशन के द्वारा काटे जा रहे हैं । जबकि शासनादेश एवं हाई कोर्ट का स्पष्ट आदेश है की पांच प्रकार के पेड़ जिनमें आम , नीम , महुआ , बरगद , और पीपल आदि पेड़ो की कटान किसी भी कीमत पर न कि जाए । फिर भी अधिकतर बारा में इन्हीं पेड़ों की कटान का सिलसिला जारी है । ग्रामीणों का कहना है कि अगर ऐसा ही सिलसिला चलता रहा तो एक दिन जितनी भी बाघ – बगीचे हरे – भरे जगह – जगह दिखाई पड़ रहे हैं ,वह विलुप्त हो जाएंगे जिससे मानव जीवन व पर्यावरण तथा पशु पक्षियों का जीना मुहाल हो जाएगा ।

 

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