न्यूज रिपोर्टर मीडिया प्रभारी मनोज मूंधड़ा बीकानेर श्रीडूंगरगढ
हस्त मुद्राओं का चमत्कारिक लाभ जानिए योग प्रशिक्षक ओम प्रकाश कालवा के साथ।
श्रीडूंगरगढ़। कस्बे की ओम योग सेवा संस्था के निदेशक योग प्रशिक्षक ओम प्रकाश कालवा ने सत्यार्थ न्यूज चैनल पर 46 वां अंक प्रकाशित करते हुए हस्त मुद्राओं के बारे में जानकारी देते हुए बताया। मुद्राओं का अभ्यास शरीर में ऊर्जा तत्वों को संतुलित करने में मदद करता है। ऊर्जा तत्वों का असंतुलन बीमारियों का मूल कारण है मुद्राएँ शरीर में ऊर्जा तत्वों के प्रवाह को नियंत्रित करती हैं। हमारे हाथ में पंचभूत, पंचभूत और मानव शरीर पर उनका प्रभाव। मुद्रा क्रय तथा विक्रय दोनों को बहुत आसान बना देती है। जबसे व्यक्ति ने विनिमय के माध्यम के रूप में मुद्रा का प्रयोग किया है, तभी से मनुष्य की समय तथा शक्ति की बहुत अधिक बचत हुई है। मुद्रा में सामान्य स्वीकृति का गुण भी है इसलिए मुद्रा का विनिमय का कार्य आसान बन जाता है। भारतीय संस्कृति में हर चीज के लिए एक विशेष आसन, मुद्रा, श्वास-प्रश्वास आदि की पहचान की गई है सैकड़ों मुद्राएँ हैं, कुछ स्वास्थ्य के लिए, कुछ कल्याण के लिए, कुछ अन्य प्रकार की प्रक्रियाओं को बनाने के लिए। जीवन के विभिन्न पहलुओं के लिए अलग-अलग मुद्राएँ हैं। भारतीय संस्कृति में, हर चीज के लिए उन्होंने एक खास आसन, एक मुद्रा और एक खास तरह की सांस लेने की विधि निर्धारित की है, ताकि एक इंसान अपने भीतर सर्वश्रेष्ठ को सामने ला सके। यह अभी भी संस्कृति में हर जगह मौजूद है, लेकिन इसका अभ्यास आवश्यक समझ और जागरूकता के बिना किया जा रहा है।
हस्त मुद्रा के प्रकार
हठयोग पर आधारित इस ग्रंथ को महर्षि घेरण्ड ने लिखा था। घेरंड में 25 और हठयोग प्रदीपिका में 10 मुद्राओं का उल्लेख मिलता है, लेकिन सभी योग के ग्रंथों की मुद्राओं को मिलाकर कुल 50 से 60 हस्त मुद्राएं हैं। महामुद्रा महाबंधो महावेधश्च, खेचरी। उड्यान मूलबन्धश्च बंधो जालन्धरमिघ:।।
भारतीय शास्त्रीय नृत्य में “हस्त मुद्रा” (संस्कृत में हाथ को हस्त कहते हैं) शब्दावली प्रयुक्त होती है। भारतीय शास्त्रीय नृत्य के सभी रूपों में मुद्राएं समान हैं, हालांकि उनके नाम और उनका उपयोग भिन्न हुआ करते हैं। भरतनाट्यम में 28 (या 32), कथकली में 24 और ओडिसी में 20 मूल मुद्राएं होती हैं। हाथों की 10 अंगुलियों से विशेष प्रकार की आकृतियां बनाना ही हस्त मुद्रा कही गई है। हाथों की सारी अंगुलियों में पांचों तत्व मौजूद होते हैं जैसे अंगूठे में अग्नि तत्व, तर्जनी अंगुली में वायु तत्व, मध्यमा अंगुली में आकाश तत्व, अनामिका अंगुली में पृथ्वी तत्व और कनिष्का अंगुली में जल तत्व।
नाेट :
-इन सभी हस्त मुद्राओं का अभ्यास अनुुभवी योग प्रशिक्षक के निर्देशन में करना लाभदायक सिद्ध
होता है।
निवेदन
-ओम योग सेवा संस्था श्री डूंगरगढ़।



























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