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बीकानेर-30 जून 2024 रविवार आज का पंचांग व राशिफल और जानें कुछ खास बातें पंडित नरेश सारस्वत रिड़ी के साथ

न्यूज रिपोर्टर नरसीराम शर्मा बीकानेर श्रीडूंगरगढ

पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है!शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचाग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है !पंचांग में सूर्योदय सूर्यास्त, चद्रोदय-चन्द्रास्त काल, तिथि, नक्षत्र, मुहूर्त, योगकाल, करण, सूर्य-चंद्र के राशि, चौघड़िया मुहूर्त दिए गए हैं!

🙏 जय श्री कृष्णा🙏

आज का पंचांग

*दिनाँक:- 30/06/2024, रविवार*
नवमी, कृष्ण पक्ष,
आषाढ
“”””””””””””””””””””””””””””””””””””(समाप्ति काल)

तिथि———– नवमी 12:18:39 तक
पक्ष————————- कृष्ण
नक्षत्र———– रेवती 07:33:05
योग———- अतिगंड 16:13:12
करण————- गर 12:18:39
करण———– वणिज 23:21:01
वार———————– रविवार
माह———————– आषाढ
चन्द्र राशि——- मीन 07:33:05
चन्द्र राशि—————— मेष
सूर्य राशि—————– मिथुन
रितु————————- वर्षा
आयन—————- दक्षिणायण
संवत्सर——————– क्रोधी
संवत्सर (उत्तर) —————कालयुक्त
विक्रम संवत—————- 2081
गुजराती संवत————– 2080
शक संवत——————-1946
कलि संवत—————– 5125

वृन्दावन
सूर्योदय————— 05:28:27
सूर्यास्त————— 19:17:26
दिन काल————- 13:48:59
रात्री काल————- 10:11:22
चंद्रास्त—————- 13:50:40
चंद्रोदय—————- 25:16:07

लग्न—- मिथुन 14°31′ , 74°31′

सूर्य नक्षत्र—————— आर्द्रा
चन्द्र नक्षत्र——————- रेवती
नक्षत्र पाया——————- स्वर्ण

*🚩💮🚩 पद, चरण 🚩💮🚩*

ची—- रेवती 07:33:05

चु—- अश्विनी 13:15:22

चे—- अश्विनी 18:58:08

चो—- अश्विनी 24:41:24

💮 ग्रह गोचर 💮

ग्रह =राशी , अंश ,नक्षत्र, पद
==========================
सूर्य= मिथुन 14°10, आर्द्रा 3 ङ
चन्द्र=मीन 28°30 , रेवती 4 ची
बुध =मिथुन 01°53′ पुनर्वसु 4 ही
शु क्र= मिथुन 21°05, पुनर्वसु ‘ 1 के
मंगल=मेष 21°30 ‘ भरणी ‘ 3 ले
गुरु=वृषभ 13°30 रोहिणी , 2 वा
शनि=कुम्भ 25°10 ‘ पू o भा o ,2 सो
राहू=(व) मीन 17°10 रेवती , 1 दे
केतु=(व) कन्या 17°10 हस्त , 3 ण

💮 शुभा$शुभ मुहूर्त 💮

राहू काल 17:34 – 19:17 अशुभ
यम घंटा 12:23 – 14:07 अशुभ
गुली काल 15:50 – 17: 34अशुभ
अभिजित 11:55 – 12:51 शुभ
दूर मुहूर्त 17:27 – 18:22 अशुभ
वर्ज्यम 26:36* – 28:08* अशुभ
प्रदोष 19:17 – 21:21 शुभ

💮गंड मूल अहोरात्र अशुभ

🚩पंचक ⁵ 05:28 – 07:33 अशुभ

💮चोघडिया, दिन
उद्वेग 05:28 – 07:12 अशुभ
चर 07:12 – 08:56 शुभ
लाभ 08:56 – 10:39 शुभ
अमृत 10:39 – 12:23 शुभ
काल 12:23 – 14:07 अशुभ
शुभ 14:07 – 15:50 शुभ
रोग 15:50 – 17:34 अशुभ
उद्वेग 17:34 – 19:17 अशुभ

🚩चोघडिया, रात
शुभ 19:17 – 20:34 शुभ
अमृत 20:34 – 21:50 शुभ
चर 21:50 – 23:07 शुभ
रोग 23:07 – 24:23* अशुभ
काल 24:23* – 25:40* अशुभ
लाभ 25:40* – 26:56* शुभ
उद्वेग 26:56* – 28:12* अशुभ
शुभ 28:12* – 29:29* शुभ

💮होरा, दिन
सूर्य 05:28 – 06:38
शुक्र 06:38 – 07:47
बुध 07:47 – 08:56
चन्द्र 08:56 – 10:05
शनि 10:05 – 11:14
बृहस्पति 11:14 – 12:23
मंगल 12:23 – 13:32
सूर्य 13:32 – 14:41
शुक्र 14:41 – 15:50
बुध 15:50 – 16:59
चन्द्र 16:59 – 18:08
शनि 18:08 – 19:17

🚩होरा, रात
बृहस्पति 19:17 – 20:08
मंगल 20:08 – 20:59
सूर्य 20:59 – 21:50
शुक्र 21:50 – 22:41
बुध 22:41 – 23:32
चन्द्र 23:32 – 24:23
शनि 24:23* – 25:14
बृहस्पति 25:14* – 26:05
मंगल 26:05* – 26:56
सूर्य 26:56* – 27:47
शुक्र 27:47* – 28:38
बुध 28:38* – 29:29

*🚩 उदयलग्न प्रवेशकाल 🚩*

मिथुन > 03:38 से 06:18 तक
कर्क > 06:18 से 08:08 तक
सिंह > 08:08 से 10:48 तक
कन्या > 10:48 से 12:54 तक
तुला > 12:54 से 14: 56 तक
वृश्चिक > 14:56 से 17:28 तक
धनु > 17:28 से 19:18 तक
मकर > 19:18 से 21:32 तक
कुम्भ > 21:32 से 22:44 तक
मीन > 22:44 से 00:14 तक
मेष > 00:14 से 01:54 तक
वृषभ > 01:54 से 03:34 तक

*🚩विभिन्न शहरों का रेखांतर (समय)संस्कार*

(लगभग-वास्तविक समय के समीप)

दिल्ली +10मिनट——— जोधपुर -6 मिनट
जयपुर +5 मिनट—— अहमदाबाद-8 मिनट
कोटा +5 मिनट———— मुंबई-7 मिनट
लखनऊ +25 मिनट——–बीकानेर-5 मिनट
कोलकाता +54—–जैसलमेर -15 मिनट

*नोट*– दिन और रात्रि के चौघड़िया का आरंभ क्रमशः सूर्योदय और सूर्यास्त से होता है।
प्रत्येक चौघड़िए की अवधि डेढ़ घंटा होती है।
चर में चक्र चलाइये , उद्वेगे थलगार ।
शुभ में स्त्री श्रृंगार करे,लाभ में करो व्यापार ॥
रोग में रोगी स्नान करे ,काल करो भण्डार ।
अमृत में काम सभी करो , सहाय करो कर्तार ॥
अर्थात- चर में वाहन,मशीन आदि कार्य करें ।
उद्वेग में भूमि सम्बंधित एवं स्थायी कार्य करें ।
शुभ में स्त्री श्रृंगार ,सगाई व चूड़ा पहनना आदि कार्य करें ।
लाभ में व्यापार करें ।
रोग में जब रोगी रोग मुक्त हो जाय तो स्नान करें ।
काल में धन संग्रह करने पर धन वृद्धि होती है ।
अमृत में सभी शुभ कार्य करें ।

*💮दिशा शूल ज्ञान————-पश्चिम*
परिहार-: आवश्यकतानुसार यदि यात्रा करनी हो तो घी अथवा चिरौजी खाके यात्रा कर सकते है l
इस मंत्र का उच्चारण करें-:
*शीघ्र गौतम गच्छत्वं ग्रामेषु नगरेषु च l*
*भोजनं वसनं यानं मार्गं मे परिकल्पय: ll*

*🚩 अग्नि वास ज्ञान -:*
*यात्रा विवाह व्रत गोचरेषु,*
*चोलोपनिताद्यखिलव्रतेषु ।*
*दुर्गाविधानेषु सुत प्रसूतौ,*
*नैवाग्नि चक्रं परिचिन्तनियं ।।* *महारुद्र व्रतेSमायां ग्रसतेन्द्वर्कास्त राहुणाम्*
*नित्यनैमित्यके कार्ये अग्निचक्रं न दर्शायेत् ।।*

15 + 9 + 1 + 1 = 26 ÷ 4 = 2 शेष
आकाश लोक पर अग्नि वास हवन के लिए अशुभ कारक है l

*🚩💮 ग्रह मुख आहुति ज्ञान 💮🚩*

सूर्य नक्षत्र से अगले 3 नक्षत्र गणना के आधार पर क्रमानुसार सूर्य , बुध , शुक्र , शनि , चन्द्र , मंगल , गुरु , राहु केतु आहुति जानें । शुभ ग्रह की आहुति हवनादि कृत्य शुभपद होता है

गुरु ग्रह मुखहुति

* शिव वास एवं फल -:*

24 + 24 + 5 = 53 ÷ 7 = 4 शेष

सभायां = संताप कारक

*🚩भद्रा वास एवं फल -:*

*स्वर्गे भद्रा धनं धान्यं ,पाताले च धनागम:।*
*मृत्युलोके यदा भद्रा सर्वकार्य विनाशिनी।।*

रात्रि 23:22 से प्रारंभ

स्वर्ग लोक = शुभ कारक

*💮🚩 विशेष जानकारी 🚩💮*

*सर्वार्थ सिद्धि योग 07:33 से
शुभ विचार

धर्मार्थकाममोक्षाणां यस्यैकोऽपि न विद्यते ।
अजागलस्तनस्येव तस्य जन्म निरर्थकम् ।।
।। चा o नी o।।

जिस व्यक्ति ने न ही कोई ज्ञान संपादन किया, ना ही पैसा कमाया, मुक्ति के लिए जो आवश्यक है उसकी पूर्ति भी नहीं किया. वह एक निहायत बेकार जिंदगी जीता है जैसे के बकरी की गर्दन से झू🚩 सुभाषितानि 🚩

गीता -: ज्ञानविज्ञानयोग अo-07

त्रिभिर्गुणमयैर्भावैरेभिः सर्वमिदं जगत्‌ ।,
मोहितं नाभिजानाति मामेभ्यः परमव्ययम्‌ ॥,

गुणों के कार्य रूप सात्त्विक, राजस और तामस- इन तीनों प्रकार के भावों से यह सारा संसार- प्राणिसमुदाय मोहित हो रहा है, इसीलिए इन तीनों गुणों से परे मुझ अविनाशी को नहीं जानता॥,13॥,

देशे ग्रामे गृहे युद्धे सेवायां व्यवहारके।
नामराशेः प्रधानत्वं जन्मराशिं न चिन्तयेत्।।
विवाहे सर्वमाङ्गल्ये यात्रायां ग्रहगोचरे।
जन्मराशेः प्रधानत्वं नामराशिं न चिन्तयेत ।।

आज का राशिफल

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मेष🐐 (चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ)
आज के दिन आप अपनी ही धुन में रहेंगे। मन की ज्यादा सुनेंगे और करेंगे भी वैसा ही किसी का कार्यो में दखल देना कुछ ज्यादा ही अखरेगा जरासी बात पर नाराज हो जाएंगे जिससे मुख्य लक्ष्य से भटक सकते है। कार्य व्यवसाय आज अन्य दिन की तुलना में थोड़ा धीमा रहेगा इसका एक कारण आपका मानसिक रूप से तैयार ना होना भी रहेगा। लाभ हानि की परवाह किये बिना ही कार्य हाथ मे लेंगे बाद में ले देकर पूरा करने का प्रयास कुछ ना कुछ हानि ही कराएगा। घर में किसी ना किसी से व्यर्थ की बातों पर बहस कर समय खराब करेंगे। मानसिक रूप से बेचैनी अधिक रहने पर पूजा पाठ से भी विमुख रहेंगे एक साथ दो जगह मन भटकने के कारण आध्यात्मिकता का लाभ नही मिल सकेगा।

वृष🐂 (ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो)
आज आप अपने आस-पास कई बदलाव अनुभव करेंगे। कार्य क्षेत्र पर आज आपके मन के अनुसार कार्य होने से प्रसन्नता रहेगी लेकिन मध्यान के समय आप अपनी आलसी प्रवृति के कारण लाभ के अवसर हाथ से गवां सकते है। पूर्व निर्धारित कार्यक्रमो को प्राथमिकता से पूर्ण करना हितकर रहेगा। संध्या के समय थानाक रहने पर भी अपने आपको परिस्थितयो के अनुसार ढाल कर लाभ उठाएंगे। सहकर्मी आपकी कार्य कुशलता के कायल हो जाएंगे। किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में खर्च करेंगे। विरोधियो अथवा प्रतिस्पर्धियों को आज हलके में लेना हानि कराएगा। आकस्मिक खर्च होंगे। घरेलू सुख सामान्य रहेगा। ठंडी वस्तुओ का परहेज करें।

मिथुन👫 (का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, हा)
आज का दिन आपके लिए लाभदायक रहेगा। दिन के आरंभिक भाग में विदेश स्थित रिश्तेदारो अथवा व्यवहारों से शुभ समाचार मिलेंगे। विदेश यात्रा का अवसर भी मिल सकता है। नए अनुबंधों की शुरुआत के लिए आज का दिन उत्तम है। कमीशन के व्यवसाय से अधिक लाभ की संभावना है। सामाजिक व्यवहार बढ़ने से कार्य क्षेत्र पर भी आज कई बार आकस्मिक लाभ के अवसर मिलेंगे परंतु सभी का लाभ नहीं उठा पाएंगे। फिर भी आवश्यकता से अधिक धन लाभ सहज हो जाएगा। परिजनों के सहयोग से भाग्योन्नति होगी। आज के दिन प्रेम-प्यार से दूर रहें लंबी यात्रा अधिक आवश्यक होने पर ही करें नए पुराने मित्रो से सम्बन्ध प्रगाढ़ होंगे। गर्म सर्द की परेशानी की संभावना है।

कर्क🦀 (ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो)
आज के दिन आपमें भावुकता अधिक रहने के कारण छोटी-छोटी बाते दिल पर लेंगे अपने कार्यो को छोड़ अन्य के काम मे टांग अड़ाएंगे इसके परिणामस्वरूप स्नेहीजनों से आज दूरी बन सकती है। सेहत सामान्य रहेगी लेकिन एकाग्रता की कमी हर कार्य मे बाधक बनेगी। व्यर्थ की बहस या झगड़ो से बचें अपने काम से काम रखे तो अपनी दिनचर्या से लाभ उठा सकते है। सरकारी कार्य लंबित रहेंगे। मध्यान बाद माश्पेशी में अकड़न की समस्या रह सकती है। व्यावसायिक यात्रा का विचार बनेगा। घर का वातावरण स्थिर रहेगा। संध्या के समय आपके स्वयं लिए निर्णय सफल होंगे आवश्यकता अनुसार धन लाभ हो जाएगा लेकिन भ्रामक खबरों पर यकीन ना करें।

सिंह🦁 (मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे)
आज का दिन संभावनाओं पर ज्यादा केंद्रित रहेगा। परिश्रम करने में कमी नही रखेंगे फिर भी सफलता असफलता संपर्क में रहने वालों पर निर्भर रहेगी। मध्यान तक का समय उदासीनता में बीतेगा इसके बाद व्यस्तता बढ़ेगी कार्य व्यवसाय में गति आने से लाभ की संभावना जागेगी लेकिन धन प्राप्ति में विलंब होगा फिर भी आज के दिन से वृद्धि की आशा रख सकते है भले ही इसमें विलंब क्यो ना हो। सहकर्मी अपने मनमाने व्यवहार से कुछ समय के लिये परेशानी में डालेंगे लेकिन इससे बाहर भी स्वयं ही निकालेंगे। गृहस्थ में शांति रहेगी परन्तु आज किसी व्यक्ति विशेष का अभाव भी अनुभव करेंगे। सेहत को लेकर थोड़ी समस्या बनेगी पर प्रदर्शित नही करेंगे।

कन्या👩 (टो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो)
आज का दिन आपको प्रतिकूल फल देगा। आज दिन भर शरीर में स्फूर्ति की कमी रहेगी भावुकता भी अधिक रहने से स्वास्थ्य पर इसका नकारात्मक असर पड़ सकता है। आज आप अधिकांश कार्यो को बे मन से करेंगे जिससे कार्यो में विलम्ब होगा। सहकर्मियों से अहं को लेकर मतभेद होगा। अधिकारी वर्ग से सावधान रहें। प्रतिस्पर्धा अधिक रहने से व्यवसाय मंदा रहेगा मध्यान पश्चात स्थिति में सुधार आएगा पुराने संपर्कों से आंशिक लाभ होगा। अटपटे व्यवहार के कारण सामाजिक प्रतिष्ठा में कमी आएगी। पारिवारिक जीवन भी संघर्षमय रहेगा। संध्या बाद एकाग्रता बढ़ेगी पत्नी-संतान का सहयोग भी मिलेगा लेकिन घर के बुजुर्ग आपसे नाराज ही रहेंगे। यात्रा आज स्थगित रखे।

तुला⚖️ (रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते)
आज का दिन भी आपके लिए लाभदायक रहेगा। आज सामाजिक प्रतिष्ठा बढ़ेगी। कार्य क्षेत्र पर आज बेहतर काम के लिए सम्मानित होंगे। पूर्व निर्धारित कार्य ले देकर पूर्ण होने से मन को राहत पहुचेगी। सरकारी कार्यो में भी आज आसानी से सफलता मिलेगी। संध्या के समय आकस्मिक लाभ होगा। दाम्पत्य जीवन में खुशहाली बढ़ेगी पिता का सहयोग अथवा पैतृक कार्यो से समृद्धि आएगी। सामाजिक कार्यों में योगदान देंगे। किसी प्रियजन से शुभ समाचार मिलेगा लेकिन ध्यान रहे आज लालची प्रवृति के कारण सामाजिक सम्मान में कमी भी आ सकती है। गले सम्बंधित रोग होने की संभावना है। आवश्यक कार्य आज ही पूर्ण कर लें कल पर टालना विलंब कराएगा।

वृश्चिक🦂 (तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू)
आज आप धन लाभ की कामना से अधिकांश कार्य करेंगे लाभ होगा भी लेकिन खर्च लगे रहने से हाथ मे रुकेगा नही। कार्य व्यवसाय में तेजी मंदी लगी रहने के कारण बनी बनाई योजना लटकी रह जायेगी। आज आप असमर्थ होते हुए भी अन्य लोगो की सहायता के लिये तत्पर रहेंगे लेकिन परिजनों को आपका परोपकार कम ही जमेगा। आवश्यकता की वस्तुओं की जगह आज व्यर्थ के कार्यो पर खर्च होगा। घर मे किसी न किसी से इच्छा पूर्ति ना होने पर नाराजगी रहेगी। संध्या का समय अपेक्षा से अधिक आनंद दायक रहेगा। मित्र परिजनों के साथ मनोरंजन के अवसर मिलेंगे लेकिन एक दूसरे के प्रति आदर का अभाव रहेगा।

धनु🏹 (ये, यो, भा, भी, भू, ध, फा, ढा, भे)
आज के दिन आपको बुद्धि विवेक का लाभ मिलेगा आपकी सोच दूरदर्शी रहेगी लेकिन इससे मनिच्छित सफलता नही मिल सकेगी दिन के पहले भाग में घर मे पुरानी बात के कारण मतभेद रहेंगे शांत रहने का प्रयास करें अन्यथा दिन भर मानसिक अशांति रहेगी। कार्य क्षेत्र पर नए तरीके से काम करने का प्रयास करेंगे इससे अन्य लोगो मे आपकी बुद्धि कौशल का प्रचार होगा पर धन लाभ के लिये तरसना पड़ेगा परिश्रम करने पर भी अल्प लाभ से संतोष करना पड़ेगा। लोग केवल मीठा बोलकर अपना हित साधेंगे सहयोग कोई नही करेगा। सेहत में उतार-चढ़ाव बना रहेगा। परिवार की आवश्यकता पूर्ती करने में असमर्थ रहेंगे।

मकर🐊 (भो, जा, जी, खी, खू, खा, खो, गा, गी)
आज के दिन आपमे धैर्य की कमी रहेगी। किसी भी कार्यो को लेकर पहले लापरवाही करेंगे बाद में उसे जल्दबाजी में करने पर कुछ ना कुछ कमी रह जायेगी। धन संबंधित मामलों में जल्दबाजी ना करें अन्यथा आज के दिन का उचित लाभ लेने से वंचित रह जाएंगे कार्य व्यवसाय से आरंभ में ज्यादा आशा नही रहेगी लेकिन धीरे धीरे जमने पर अकस्मात धन के मार्ग खुलने से उत्साह बढेगा। दान-पुण्य के साथ किसी की सहायता पर खर्च करना पड़ेगा परोपकार की भावना के कारण अखरेगा नही। आज घर मे समय पर वादा पूर्ति ना करने पर विवाद हो सकता है। स्वास्थ्य आज सामान्य ही रहेगा। क्रोध से बचें।

कुंभ🍯 (गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा)
आज के दिन आपको दैनिक कार्यो के अतिरिक्त भाग दौड़ करनी पड़ेगा लेकिन इसका कोई सकारात्मक परिणाम नही मिलेगा। आज अधिकांश कार्य किसी अन्य पर निर्भर रहने के कारण अधूरे रह सकते है जोर जबरदस्ती करने पर हानि ही होगी। कार्य व्यवसाय अथवा सरकारी क्षेत्र से अशुभ समाचार मिलने या किसी अप्रिय घटना की संभावना मन को बेचैन रखेगी। धन की आमद सीमित रहेगी लेकिन ख़र्च अनियंत्रित होने पर बजट प्रभावित होगा। कार्य क्षेत्र पर सहकर्मी अथवा अधिकारी वर्ग से गलतफहमी बनेगी फिर भी मामला गंभीर नही होने देंगे। परिवार के सदस्य से हानि हो सकती है धैर्य से काम लें। यात्रा से सेहत में अकस्मात नरमी आएगी। बुजुर्गो के प्रति आदर भाव बढेगा।

मीन🐳 (दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची)
आज के दिन पूर्वार्ध में पहले मिली सफलता के कारण निश्चिन्त रहेंगे महत्त्वपूर्ण कार्यो में लापरवाही करेंगे लेकिन मध्यान के बाद ही स्थिति को भाँप कर मेहनत के लिये प्रेरित होंगे। आज किये परिश्रम का फल निकट भविष्य में कुछ ना कुछ आर्थिक अथवा अन्य प्रकार से वृद्धि कराएगा। घर मे सुखोपभोग के साधन की खरीद की योजना बनेगी परन्तु आज बजट की कमी के कारण टालना भी पड़ सकता है। धन लाभ आशाजनक लेकिन भाग दौड़ के बाद ही होगा खर्च साथ लगे रहने से परिजनों की इच्छापूर्ति करने में विलंब होगा फिर भी आपसी तालमेल बना रहेगा स्वास्थ्य को लेकर आशंकित रहेंगे।
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Dharm – Astha: पहले हम संक्षिप्त पूजा की विधि विधान बताते हैं

1. प्रातःकाल स्नानादि से निवृत्त हो स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
2. शान्तचित्त होकर परमात्मा का स्मरण करें।
3. भोजन एक समय से अधिक नहीं करना चाहिए।
4. भोजन तथा फलाहार सूर्य के प्रकाश रहते ही कर लेना चाहिए।
5. यदि निराहार रहने पर सूर्य छिप जाये तो दूसरे दिन सूर्य उदय हो जाने पर अर्घ्य देने के बाद ही भोजन करें।
6. व्रत के अंत में व्रत कथा सुननी चाहिए।
7. व्रत के दिन नमकीन तेलयुक्त भोजन कदापि ग्रहण न करें। इस व्रत के करने से मान-सम्मान बढ़ता है तथा शत्रुओं का क्षय होता है। आँख की पीड़ा के अतिरिक्त अन्य सब पीड़ायें दूर होती हैं। रविवार का व्रत सूर्य देवता की पूजा का व्रत है। यह व्रत जीवन में सुख-समृद्धि, धन-संपत्ति और शत्रुओं से सुरक्षा के लिए सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। इस दिन सूर्य देव को अर्घ्य देने का भी विशेष महत्व माना जाता है। रविवार के दिन सूर्य देव की पूजा करने से व्यक्ति के मान-सम्मान और तेज में वृद्धि होती है|

अब जानें विस्तार से रविवार व्रत की कहानी और पूजन विधि

रविवार की व्रत कहानी:-

Also read :Dharm – Astha : आज रविवार व्रत का इतिहास, पूजा विधि, आरती, मंत्र और उसके महत्व
एक समय की बात है, किसी शहर में एक बुढ़िया रहती थी। वह प्रत्येक रविवार को नियमपूर्वक व्रत रखती थी। ऐसा करने के लिए, रविवार को वह सूर्योदय से पहले उठती थी और स्नान करने के बाद, आंगन को साफ करने के लिए खुद को गाय के गोबर से लीपती थी। इसके बाद उसने सूर्य देव की पूजा की और रविवार व्रत की कथा सुनने के बाद सूर्य देव को भोग लगाया। पूजा के बाद बुढ़िया दिन में केवल एक बार भोजन करती थी। सूर्यदेव की कृपा से बुढ़िया को किसी भी प्रकार की चिंता या कष्ट नहीं रहा। धीरे-धीरे उसका घर धन-धान्य से भर गया। उसे इतनी अच्छी हालत में देखकर उसका पड़ोसी उससे ईर्ष्या करने लगा। बुढ़िया के पास गाय नहीं थी। इसलिए वह आंगन को ढकने के लिए अपने पड़ोसी से गाय का गोबर उधार लेती थी और पड़ोसी गाय को घर के अंदर बांध देता था। रविवार को गोबर न होने के कारण बुजुर्ग महिला अपना आंगन साफ ​​नहीं कर पाई। यह बात उसे अंदर ही अंदर दुखी कर देती है. इसलिए उस दिन उन्होंने न तो सूर्यदेव को भोग लगाया और न ही स्वयं खाया। जब सूरज डूब गया तो बुढ़िया खुद को सजा देते हुए भूखी-प्यासी सो गई। अगले दिन सूर्योदय से पहले जब बुढ़िया की आंख खुली तो वह अपने आंगन में एक सुंदर गाय और बछड़े को देखकर आश्चर्यचकित रह गई। सौभाग्य से उसने गाय को आँगन में बाँध दिया और जल्दी से चारा लाकर उसे खिला दिया। पड़ोसी की ईर्ष्या और भी बढ़ गई। फिर गाय के गोबर से सोना. खाद देखते ही पड़ोसन की आंखें फटी की फटी रह गईं। पड़ोसन बुढ़िया से छिपकर तुरंत गाय के पास गई और गोबर उठाकर अपने घर ले गई। वह अपनी गाय का गोबर भी वहीं रखती थी। सोने का गोबर मिलने के कुछ ही दिन बाद पड़ोसन अमीर हो गई। बुढ़िया के आँगन में गाय प्रतिदिन सूर्योदय से पहले सोना डालती थी। यह गोबर वह पड़ोस की बुढ़िया से छिपकर इकट्ठा करती थी। बहुत समय तक बुढ़िया को सुनहरे गोबर के बारे में कुछ भी पता नहीं था। बुढ़िया हमेशा की तरह हर रविवार को सूर्यदेव का व्रत करती और कहानी सुनती। लेकिन जैसे ही सूर्य देव को अपने पड़ोसी की चालाकी का पता चला, उन्होंने एक तेज़ तूफ़ान मचा दिया। उस भयानक तूफ़ान को देखकर बुढ़िया ने गाय को घर के अन्दर बाँध दिया। फिर, अगली सुबह, बुढ़िया उठी और आश्चर्यचकित रह गई। फिर बुढ़िया गाय को सदैव घर के अन्दर ही बाँधने लगी। सोने का गोबर पाकर बुढ़िया कुछ ही दिनों में बहुत अमीर हो गई। जब बुढ़िया अमीर हो गई तो उसकी पड़ोसन जलकर राख हो गई। पड़ोसन ने उसके पति को समझाकर नगर के राजा के पास भेज दिया। सुन्दर गाय को देखकर राजा बहुत प्रसन्न हुआ। अगली सुबह राजा ने गोबर को सोता हुआ देखा तो चौंक गया। तब राजा ने बुढ़िया की गाय और बछड़ा छीन लिया। इसके बाद वृद्धा की हालत फिर दयनीय हो गई। बुढ़िया बहुत दुखी हुई और सूर्य देव से प्रार्थना करने लगी।भगवान सूर्य को भूखी-प्यासी बुढ़िया पर बहुत दया आई। उसी रात सूर्य देव ने राजा को स्वप्न में कहा, हे राजन! बुढ़िया की गाय और बछड़ा तुरंत लौटा दो। नहीं तो आप पर मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ेगा। तुम्हारे महल नष्ट हो जायेंगे। सबकुछ खत्म हो जाएगा। सूर्य भगवान के स्वप्न से भयभीत होकर राजा ने सुबह उठते ही गाय और बछड़ा बुढ़िया को लौटा दिया। राजा ने अपनी गलती का प्रायश्चित किया और बुढ़िया से माफी मांगी और उसे बहुत सारा धन और आभूषण दिए। उसके बाद राजा ने पड़ोसन और उसके पति को भी उनकी दुष्टता का दण्ड दिया। इस प्रकार राजा ने पूरे राज्य में घोषणा करवा दी कि सभी लोग रविवार का व्रत विधिपूर्वक करें। इस व्रत को करने से घर में कभी भी धन-धान्य की कमी नहीं होगी। सभी लोग नियमित रूप से व्रत रखते थे. पूरे राज्य में खुशहाली थी. स्त्री-पुरुषों के जीवन में खुशियाँ ही खुशियाँ थीं। साथ ही सभी की शारीरिक परेशानियां भी दूर हो गईं।

रविवार व्रत नियम:-

व्रत वाले दिन तांबे से बनी चीजें खरीदने से बचें। इस दिन नीले, काले या भूरे रंग के कपड़े नहीं पहनने चाहिए। रविवार के दिन आपको लाल रंग के कपड़े पहनने चाहिए। रविवार को पूरे दिन उपवास रखें और सूर्यास्त के बाद केवल एक बार भोजन करें। भोजन में गेहूं की रोटी, दलिया, दूध, दही और घी का प्रयोग किया जा सकता है। इस दिन तेल या नमक का सेवन नहीं करना चाहिए। इस दिन चावल में दूध और गुड़ मिलाकर खाएं।

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रविवार व्रत पूजा विधि:-

रविवार के दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और लाल वस्त्र पहनें।

सबसे पहले सूर्य देव को जल चढ़ाकर पूजा की शुरुआत करें।

पूजा के लिए स्थानीय मंदिर में भगवान सूर्य की सुनहरी मूर्ति या चित्र स्थापित करें।

इसके बाद अक्षत, रक्त चंदन, लाल फूल और दूर्वा से भगवान सूर्य की विधिवत पूजा करें।

सेवा के बाद त्वरित कहानी सुनें.

रथकथा सुनने के बाद नियमित रूप से आरती करें।

व्रत रविवार पूजा आरती :-

ॐ जय सूर्य भगवान, जय हो दिनकर भगवान।

जगत् के नेत्रस्वरूपा, तुम हो त्रिगुण स्वरूपा।

धरत सब ही तव ध्यान, ॐ जय सूर्य भगवान।।

।।ॐ जय सूर्य भगवान।।

सारथी अरुण हैं प्रभु तुम, श्वेत कमलधारी। तुम चार भुजाधारी।।

अश्व हैं सात तुम्हारे, कोटि किरण पसारे। तुम हो देव महान।।

।।ॐ जय सूर्य भगवान।।

ऊषाकाल में जब तुम, उदयाचल आते। सब तब दर्शन पाते।।

फैलाते उजियारा, जागता तब जग सारा। करे सब तब गुणगान।।

।।ॐ जय सूर्य भगवान।।

संध्या में भुवनेश्वर अस्ताचल जाते। गोधन तब घर आते।।

गोधूलि बेला में, हर घर हर आंगन में। हो तव महिमा गान।।

।।ॐ जय सूर्य भगवान।।

देव-दनुज नर-नारी, ऋषि-मुनिवर भजते। आदित्य हृदय जपते।।

स्तोत्र ये मंगलकारी, इसकी है रचना न्यारी। दे नव जीवनदान।।

।।ॐ जय सूर्य भगवान।।

रविवार के लिए मंत्र जाप

ॐ ह्रीं घृणिः सूर्य आदित्यः क्लीं ॐ., ॐ घृणिं सूर्यः आदित्यः आई., ॐ ऐहि सूर्य सहस्त्रांशों तेजो राशे जगत्पते, अनुकंपयेम भक्त्या, गृहाणार्घय दिवाकर: आई., ऊं ह्रीं ह्रीं सूर्याय नमः आई., ऊं ह्रीं ह्रीं सूर्याय सहस्रकिरणराय मनोवांचित फलं देहि: देहत्याग।

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