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प्रयागराज-आसान नही इलाहबाद संसदीय सीट की अंकगणित को समझना

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आसान नही इलाहबाद संसदीय सीट की अंकगणित को समझना

इलाहाबाद 52 संसदीय क्षेत्र त्रिकोणीय भंवर में

बसपा के ओबीसी कार्ड ने भाजपा और कांग्रेस की बढ़ाई मुश्किलें

प्रयागराज। जैसे जैसे मतदान की तिथि निकट आती जा रही है वैसे वैसे प्रत्याशियों और उनके समर्थको में बेचैनी बढ़ती जा रही है। एक ओर भारतीय जनता पार्टी ने इलाहबाद संसदीय क्षेत्र से पंडित केसरीनाथ त्रिपाठी के सुपुत्र नीरज त्रिपाठी को मैदान में उतारा है तो दूसरी ओर इंडिया गठबंधन के कांग्रेस से अपर हिंदू कार्ड चलकर रेवती रमण सिंह के सुपुत्र पूर्व मंत्री उज्ज्वल रमण को प्रत्याशी बनाया है तो एकला चलो की राह पर बहुजन समाज पार्टी ने ओबीसी प्रत्याशी  रमेश पटेल को प्रत्याशी घोषित कर भाजपा और इंडिया गठबंधन की मुश्किलें बढ़ा दी है। प्रयागराज की दोनो सीटे इतनी महत्वपूर्ण है कि इंडिया गठंबधन के राहुल गांधी, अखिलेश यादव ने दो बड़ी जन सभाएं की तो भाजपा ने पीएम, सीएम सहित बड़े बड़े नेताओ का कैंप लगाकर दोनो सीट जीतने की पूरी ताकत झोंक दी है। चुंकि बहुजन समाज पार्टी का इलाहाबाद 52 संसदीय सीट से पटेल समाज का उम्मीदवार होने से काग्रेस और भाजपा को जातीय समीकरण अंकगणित का फार्मूला चिंता की लकीरें बढ़ा दी है। बारा, मेजा, कोरांव विधान सभाओं में ओबीसी की एक विशेष जाति की भारी संख्या ने बसपा प्रत्याशी को त्रिकोणीय चुनाव की स्थिति बनती जा रही है। एक ओर भाजपा और कांग्रेस के मजबूत फारवर्ड प्रत्याशी है तो दूसरी ओर बसपा का ओबीसी प्रत्याशी होने के मुद्दा विहीन चुनाव जातियों के  समीकरण में परिवर्तित होते दिख रहे है। देखना होगा कि जनता  किसे अपना आशीर्वाद देकर अपना प्रतिनिधि चुनती है। यह तो चार जून को नतीजे घोषित होने के बाद पता चलेगा कि जनता ने किसे स्वीकार किया किसे रिजेक्ट किया।

मंगलवार को बसपा ने कोरांव, मेजा, करछना, बारा और दक्षिणी विधानसभा में चुनावी रणनीति बनाने के लिए मुख्य चुनाव इंचार्ज चांद मोहम्मद अकरम, चुनाव इंचार्ज रामबृज गौतम, रमेश गौतम, मनोज पाल और धर्मेंद्र पटेल ने सामूहिक रूप से बताया की सेक्टर बूथ का हर पदाधिकारी रमेश पटेल को प्रत्याशी न मानकर स्वयं अपने आप को प्रत्याशी माने और बहन मायावती को प्रधानमंत्री बनाने के लिए बूथ, सेक्टर को जिताकर विधानसभा को जिताना है। विधानसभा को जिताकर प्रत्येक लोकसभा सीट जिताकर बहुजन समाज को देश का हुक्मरान और शासक बनाना है।

बैठक में चांद मोहम्मद अकरम, रामबृज गौतम, रमेश गौतम, मनोज पाल, धर्मेंद्र पटेल, अभयराज सिंह, जमुना प्रसाद, ईर्ष्या कपूर, संतोष कुमार (मुन्ना), रामचन्द्र, राजनरायन गौतम, बुद्धि प्रकाश, रोशन लाल विद्यार्थी के साथ सैकड़ो लोग उपस्थित रहे।

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