रिपोर्टर इन्द्र जीत प्रजापति
दिनांक 3-7-26
स्थान कालावाली
जिला सिरसा

भाजपा में अनुशासन का बड़ा एक्शन! कालांवाली में दो नेताओं को 7 दिन का नोटिस, संगठन ने दिए सख्त संकेत
कालांवाली। भारतीय जनता पार्टी ने संगठनात्मक अनुशासन को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए कालांवाली इकाई से जुड़े दो नेताओं को सात दिन का कारण बताओ नोटिस जारी किया है। पार्टी के भीतर इस कार्रवाई को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। सूत्रों का दावा है कि दोनों नेताओं पर संगठन विरोधी गतिविधियों, सोशल मीडिया पर पार्टी के खिलाफ बयानबाजी तथा स्थानीय नेतृत्व पर लगातार सवाल उठाने जैसे आरोप लगाए गए हैं। अब सबकी निगाहें उनके जवाब और संगठन के अगले फैसले पर टिकी हैं।
जानकारी के अनुसार, हाल ही में आयोजित भाजपा प्रदेशाध्यक्ष डॉ. अर्चना गुप्ता के कालांवाली दौरे के बाद प्रदेश और जिला संगठन ने स्थानीय स्तर पर सामने आई शिकायतों की समीक्षा की। इसी दौरान दो नेताओं की गतिविधियों को लेकर संगठन के पास कई शिकायतें पहुंचीं। बताया जा रहा है कि इन शिकायतों के आधार पर दोनों को सात दिन के भीतर अपना पक्ष रखने के निर्देश दिए गए हैं।
भाजपा जिला अध्यक्ष रेनू शर्मा ने भी नोटिस जारी होने की पुष्टि करते हुए कहा कि भाजपा एक अनुशासित संगठन है और संगठन की गरिमा सर्वोपरि है। उन्होंने कहा कि दो लोगों को नोटिस जारी किए गए हैं, लेकिन यह पूरी तरह पार्टी का आंतरिक मामला है, इसलिए किसी का नाम सार्वजनिक करना उचित नहीं है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि भाजपा में संगठन या नेतृत्व के खिलाफ सार्वजनिक बयानबाजी किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी और प्रत्येक कार्यकर्ता को पार्टी की मर्यादा का पालन करना होगा।
सूत्रों का कहना है कि यदि दोनों नेताओं का जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया तो संगठन उनके खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई कर सकता है। राजनीतिक गलियारों में यहां तक चर्चा है कि निष्कासन जैसे विकल्प पर भी विचार किया जा सकता है। हालांकि इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
बताया जा रहा है कि पिछले कुछ समय से संबंधित नेताओं की सोशल मीडिया गतिविधियों और सार्वजनिक टिप्पणियों पर संगठन की नजर थी। आरोप है कि पार्टी की नीतियों, संगठनात्मक निर्णयों तथा स्थानीय नेतृत्व के खिलाफ लगातार आपत्तिजनक टिप्पणियां की जा रही थीं, जिससे कार्यकर्ताओं में भ्रम की स्थिति पैदा हो रही थी। इन्हीं शिकायतों के आधार पर संगठन ने कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि प्रदेशाध्यक्ष के दौरे के बाद भाजपा संगठन अब चुनावी तैयारियों से पहले अनुशासन को लेकर कोई ढिलाई नहीं बरतना चाहता। पार्टी का स्पष्ट संदेश है कि यदि किसी कार्यकर्ता या पदाधिकारी को संगठन के किसी निर्णय पर आपत्ति है तो उसे पार्टी के आंतरिक मंच पर रखा जाए, न कि सोशल मीडिया या सार्वजनिक मंचों पर।
स्थानीय भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच भी इस कार्रवाई को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कई कार्यकर्ताओं का कहना है कि अनुशासन किसी भी राजनीतिक दल की सबसे बड़ी ताकत होता है और संगठन विरोधी गतिविधियों पर समय रहते कार्रवाई होना आवश्यक है। वहीं कुछ लोगों का मानना है कि संबंधित नेताओं को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर मिलना चाहिए और अंतिम निर्णय तथ्यों एवं जांच के आधार पर ही होना चाहिए।
फिलहाल दोनों नेताओं की ओर से कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं पार्टी की ओर से भी संभावित आगे की कार्रवाई को लेकर कोई औपचारिक प्रेस विज्ञप्ति जारी नहीं की गई है। अब सबकी नजर सात दिन की समय-सीमा पूरी होने के बाद प्रदेश संगठन के अगले कदम पर टिकी है। यदि जवाब संतोषजनक नहीं रहा, तो यह मामला कालांवाली भाजपा की राजनीति में बड़ा मोड़ साबित हो सकता है और संगठन के भीतर अनुशासन को लेकर एक स्पष्ट संदेश भी जाएगा।

















Leave a Reply