GPM जिले में धान खरीदी केंद्र बना उगाही का अड्डा! देवरी कला धान खरीदी केंद्र में किसानों से खुलेआम लूट, वीडियो वायरल — जांच में आरोप सही, फिर FIR क्यों नहीं?

सूरज यादव, गौरेला–पेंड्रा–मरवाही। छत्तीसगढ़ प्रदेश में सुशासन के बड़े-बड़े दावों के बीच गौरेला–पेंड्रा–मरवाही जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने सरकार और प्रशासन दोनों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। देवरी कला धान खरीदी केंद्र में किसानों से खुलेआम अवैध वसूली का सनसनीखेज वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें एक युवक किसानों से जबरन पैसे लेते हुए साफ दिखाई दे रहा है। वीडियो के सामने आने के बाद यह साफ हो गया है कि धान खरीदी केंद्र किसानों की सेवा का माध्यम नहीं, बल्कि लूट और उगाही का संगठित अड्डा बन चुका था। समिति प्रबंधन पर सीधा आरोप, बाहरी व्यक्ति से करवाई वसूली

आरोप है कि आदिम जाति सेवा सहकारी समिति मर्यादित, देवरी कला (पेंड्रा) के समिति प्रबंधन चंद्रकांत सलाम ने पूरे खेल को अंजाम देने के लिए एक सिंडिकेट खड़ा किया। इसी के तहत एक बाहरी व्यक्ति को केंद्र में बैठाकर किसानों से अवैध वसूली करवाई गई।वायरल वीडियो में कोटमी निवासी विकास गुप्ता उर्फ विक्की किसानों से खुलेआम पैसे लेते हुए नजर आ रहा है। यह दृश्य न केवल नियमों की धज्जियां उड़ाता है, बल्कि प्रशासनिक संरक्षण की आशंका को भी मजबूती देता है।
जांच में आरोप सही, फिर कार्रवाई पर चुप्पी क्यों?
वीडियो वायरल होने के बाद मामला जिला प्रशासन तक पहुंचा। GPM कलेक्टर के निर्देश पर तहसीलदार सकोला, फूड इंस्पेक्टर और सहकारिता विभाग की संयुक्त टीम ने देवरी कला धान खरीदी केंद्र की जांच की।
सूत्रों के अनुसार,जांच में अवैध वसूली की पुष्टि हो चुकी है,
दोष प्रथम दृष्टया साबित भी हो गया है, इसके बावजूद अब तक FIR दर्ज नहीं होना कई सवाल खड़े करता है।
दबाव में प्रशासन या दोषियों को बचाने की तैयारी?
जब जांच में अपराध सही पाया गया, जब वीडियो में सब कुछ साफ दिख रहा है तो फिर FIR दर्ज करने में देरी क्यों? क्या प्रशासन किसी राजनीतिक या प्रशासनिक दबाव में है? या फिर दोषियों को बचाने की सुनियोजित कोशिश की जा रही है? खानापूर्ति या पूरे सिंडिकेट पर गिरेगी गाज? स्थानीय सूत्रों का दावा है कि इस उगाही सिंडिकेट के जरिए किसानों से अब तक लाखों रुपये की अवैध वसूली की जा चुकी है। अब देखने वाली बात यह होगी कि— कार्रवाई सिर्फ वीडियो में दिख रहे युवक तक सीमित रहेगी या समिति प्रबंधन, संरक्षण देने वाले अधिकारी और पूरे नेटवर्क पर कानून का शिकंजा कसेगा?

FIR कब दर्ज होगी?
किन-किन नामों का खुलासा होगा? और क्या धान खरीदी के नाम पर किसानों को लूटने वालों को सच में सजा मिलेगी, या मामला फिर ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा?


















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