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कटनी में PPP मॉडल के खिलाफ उबाल: शहर बंद, जनता सड़कों पर उतरी

कटनी में PPP मॉडल के खिलाफ उबाल: शहर बंद, जनता सड़कों पर उतरी


प्रशासन की वादाखिलाफी पर भड़की जनता, मांग- केवल पूर्ण सरकारी मेडिकल कॉलेज
कटनी, 20 जनवरी। स्वास्थ्य सेवाओं के निजीकरण के खिलाफ कटनी की जनता ने आज जबरदस्त एकजुटता दिखाई। राज्य सरकार द्वारा जिले में प्रस्तावित मेडिकल कॉलेज को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर चलाने के फैसले के विरोध में शहर में बंद का व्यापक असर रहा। व्यापारी, सामाजिक संगठन और आम नागरिकों ने दोपहर तक दुकानें-प्रतिष्ठान बंद रखे, जबकि सड़कों पर प्रदर्शनकारियों की भीड़ ने प्रशासन को कड़ी चेतावनी दी।
जनता का गुस्सा इस बात पर है कि सरकार ने पहले पूर्ण सरकारी मेडिकल कॉलेज देने का वादा किया था, लेकिन अब PPP मॉडल थोपकर जनता के साथ धोखा किया जा रहा है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि PPP में इलाज, जांच और मेडिकल शिक्षा के शुल्क आसमान छू सकते हैं, जिससे गरीब और मध्यम वर्ग के लोग प्रभावित होंगे। सरकारी मेडिकल कॉलेज ही निशुल्क या न्यूनतम खर्च में इलाज और पारदर्शी शिक्षा सुनिश्चित कर सकता है।
शहर के प्रमुख बाजारों, व्यावसायिक इलाकों और उपनगरीय क्षेत्रों में बंद का जबरदस्त असर दिखा। हजारों लोग सड़कों पर उतरे और नारे लगाते हुए प्रशासन पर दबाव बनाया। वक्ताओं ने स्पष्ट कहा, “सरकारी जमीन और संसाधनों का इस्तेमाल निजी लाभ के लिए नहीं, जनहित के लिए होना चाहिए। मेडिकल कॉलेज सेवा का केंद्र बने, मुनाफे का नहीं।”
यह आंदोलन किसी एक राजनीतिक दल तक सीमित नहीं रहा, बल्कि व्यापक जनसमर्थन के साथ चला। सामाजिक संगठनों, व्यापारियों और आम नागरिकों ने एक सुर में मांग की कि PPP मॉडल पूरी तरह रद्द किया जाए और कटनी को पूर्णतः शासकीय मेडिकल कॉलेज मिले।
प्रशासन के खिलाफ सख्त लहजा अपनाते हुए प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने फैसले पर पुनर्विचार नहीं किया तो आंदोलन और तेज होगा। “जरूरत पड़ी तो इसे मिशन मोड में चलाया जाएगा, लेकिन कटनी की जमीन पर केवल सरकारी मेडिकल कॉलेज बनेगा।”
जनता का साफ संदेश है- निजी नहीं, जनहित का मेडिकल कॉलेज! अब सबकी निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं कि वह इस लोकतांत्रिक आवाज को कितनी गंभीरता से सुनता है। कटनीवासी एकजुट होकर कह रहे हैं- स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील क्षेत्र में निजीकरण बर्दाश्त नहीं होगा। पूर्ण सरकारी मेडिकल कॉलेज ही यहां की असली जरूरत है, जो सबके लिए सुलभ, विश्वसनीय और जनकल्याणकारी हो।

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