VB-GRAMG पर केंद्रीय मंत्री डॉ वीरेंद्र कुमार की प्रेस कॉन्फ्रेंस संपन्न।
VB-GRAMG अधिनियम ग्रामीणों को रोजगार में अधिक स्पष्ट, प्रर्वतनीय और सुरक्षित कानूनी संरक्षण प्रदान करता है – केंद्रीय मंत्री डॉ वीरेंद्र कुमार।
टीकमगढ़ म प्र से कविन्द पटैरिया पत्रकार की रिपोर्ट

टीकमगढ़।आज स्थानीय सर्किट हाउस में केंद्रीय मंत्री डॉ वीरेंद्र कुमार की VB-GRAMG विषय पर प्रेस कॉन्फ्रेंस संपन्न हुई। मीडिया प्रभारी स्वप्निल तिवारी ने बताया कि प्रेस कॉन्फ्रेंस में विकसित भारत – गारंटी फार रोजगार एवं आजीविका मिशन ग्रामीण(VB-GRAMG) विषय पर मुख्य वक्ता के रूप में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय केंद्रीय मंत्री डॉ वीरेंद्र कुमार ने जिले के वरिष्ठ पत्रकारों से विस्तार से चर्चा करते हुए बात रखी, साथ में भाजपा जिलाध्यक्ष श्रीमती सरोज राजपूत, वरिष्ठ नेता विवेक चतुर्वेदी, सांसद प्रतिनिधि अनुराग वर्मा, रविंद्र श्रीवास्तव, अरविंद खटीक व मनोज देवलिया उपस्थित रहे। संचालन स्वप्निल तिवारी व आभार मीडिया प्रभारी प्रफुल्ल द्विवेदी ने किया।

केंद्रीय मंत्री डॉ वीरेंद्र कुमार ने पत्रकार वार्ता में बताया कि भारत सरकार ने ग्रामीण भारत की आजीविका सुरक्षा को सुदृढ़ करने तथा रोजगार को दीर्घकालिक विकास से जोड़ने के उद्देश्य से विकसित भारत–रोज़गार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) गारंटी अधिनियम, 2025 (VB-G RAM G Act, 2025) को लागू किया है। यह अधिनियम महज़ पूर्ववर्ती व्यवस्था का नामांतरण नहीं, बल्कि ग्रामीण रोजगार नीति का व्यापक पुनर्गठन है।यह नया कानून MGNREGA के अनुभवों से सीख लेते हुए उसकी संरचनात्मक कमियों को दूर करता है और ग्रामीण रोजगार को अल्पकालिक राहत के बजाय टिकाऊ अवसंरचना, उत्पादक परिसंपत्तियों और आजीविका सृजन से जोड़ता है। यह अधिनियम विकसित भारत @2047 के राष्ट्रीय लक्ष्य के अनुरूप तैयार किया गया है।

अधिनियम के अंतर्गत प्रति ग्रामीण परिवार वार्षिक रोजगार गारंटी 100 दिनों से बढ़ाकर 125 दिन कर दी गई है, जिससे ग्रामीण परिवारों की आय-सुरक्षा और स्थिरता को बल मिलेगा। साथ ही, खेती के प्रमुख मौसमों में किसानों और कृषि श्रम बाज़ार पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े, इसके लिए राज्यों को बुवाई एवं कटाई के समय अधिकतम 60 दिनों तक सार्वजनिक कार्यों में विराम घोषित करने का अधिकार दिया गया है। यह व्यवस्था किसान और श्रमिक—दोनों के हितों में संतुलन बनाए रखती है।ग्रामीण कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने हेतु अब रोजगार सृजन को चार स्पष्ट और परिणाम-उन्मुख क्षेत्रों में केंद्रित किया गया है जिसमें जल सुरक्षा से जुड़े कार्य, प्रमुख ग्रामीण बुनियादी ढांचा,आजीविका एवं उत्पादन से संबंधित अवसंरचना, तथा आपदा प्रबंधन एवं जलवायु अनुकूलन से जुड़े कार्य।इससे यह सुनिश्चित होगा कि सार्वजनिक धन का उपयोग टिकाऊ, उपयोगी और दीर्घकालिक परिसंपत्तियों के निर्माण में हो।
भ्रष्टाचार और अनियमितताओं पर प्रभावी नियंत्रण के लिए प्रौद्योगिकी को कानूनन अनिवार्य किया गया है। इसमें बायोमेट्रिक उपस्थिति, जियो-टैगिंग, सैटेलाइट इमेजरी, मोबाइल-आधारित रियल-टाइम निगरानी और AI आधारित धोखाधड़ी पहचान प्रणाली शामिल है। मजदूरी का भुगतान सीधे और डिजिटल माध्यम से किया जाएगा, जिससे बिचौलियों की भूमिका समाप्त होगी।मजदूरों के अधिकारों की सुरक्षा को और मज़बूत करते हुए अधिनियम में साप्ताहिक वेतन भुगतान का स्पष्ट प्रावधान किया गया है। किसी भी प्रकार की देरी होने पर स्वतः मुआवज़ा दिया जाएगा। इसके अतिरिक्त, एक डिजिटल, बहु-स्तरीय और समयबद्ध शिकायत निवारण प्रणाली लागू की गई है, जिसमें जिला स्तर पर लोकपालों की भूमिका सुनिश्चित की गई है।
प्रशासनिक क्षमता को सुदृढ़ करने हेतु प्रशासनिक व्यय की सीमा 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 9 प्रतिशत की गई है, ताकि जमीनी स्तर पर पर्याप्त मानव संसाधन, तकनीकी विशेषज्ञता, प्रशिक्षण और निगरानी उपलब्ध हो सके।
यह अधिनियम ग्रामीण मजदूरों के अधिकारों में किसी प्रकार की कटौती नहीं करता, बल्कि उन्हें अधिक स्पष्ट, प्रवर्तनीय और सुरक्षित कानूनी संरक्षण प्रदान करता है। साथ ही, यह संघीय ढांचे के अनुरूप केंद्र और राज्यों के बीच जवाबदेही आधारित साझेदारी को प्रोत्साहित करता है।सरकार का दृढ़ विश्वास है कि VB-G RAM G अधिनियम, 2025 ग्रामीण भारत को सशक्त बनाते हुए उसे केवल सहायता का पात्र नहीं, बल्कि विकसित भारत की यात्रा का सक्रिय भागीदार बनाएगा।

















Leave a Reply